facebookmetapixel
Advertisement
छात्रों के विरोध के आगे झुकी सरकार! कैसे PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री बने प्रधानपश्चिम एशिया संकट व तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अगले हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट का हाल?नीट पेपर लीक, परीक्षा रद्द, आंदोलन और अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा…..3 मई से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सक्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयास

पानी से रोशन होगा बिहार

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 6:40 AM IST

चीन और जापान ने बिहार में जल विद्युत परियोजनाओं में निवेश की मंशा जाहिर की है। इस सिलसिले में चीन की टीम बिहार पहुंच रही है।


वह जल विद्युत परियोजनाओं को हाइटेक जेनेरेशन उपकरणों की आपूर्ति के लिए बाजार की खोज भी करेगी। वैसे भी बिहार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (बीएचपीसी) ने डेहरी-ऑन-सोन के पहरवा में चीन की तकनीक का पहले से ही इस्तेमाल किया है। इसके अलावा जापान भी पनबिजली के लिए सहायता राशि देने को तैयार है।

बिहार के ऊर्जा मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने बताया कि राज्य में जल विद्युत की काफी संभावना है। अगर इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो विद्युत संकट से निजात पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जल विद्युत पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी काफी उपयुक्त है। जापान की इलेक्ट्रिक पावर डेवलपमेंट कंपनी कैमूर जिले में 345 मेगावाट क्षमता की सिनाफदर और 1600 मेगावाट क्षमता की हाथीदह-दुर्गावती पंप स्टोरेज के कार्यान्वयन के लिए भी तैयार है।

जापान पावर के निदेशक एस कोणडो ने पहले ही इन दोनों परियोजना स्थलों का दौरा कर लिया है। वह इस दौरे के बाद काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि बारिश की वजह से पहले से ही जलाशय भर चुके हैं। इसलिए इस परियोजना की सफलता में कोई संदेह नहीं है। उन्होंने बीएचपीसी से कहा कि इस परियोजना के लिए जरुरी फंड के लिए जापान बैंक ऑफ इंटरनेशनल कोऑपरेशन ने सहमति प्रदान कर दी है।

इस पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए सरकार और बीएचपीसी पर किसी तरह की वित्त व्यवस्था करने का भार नहीं होगा। जापान की पांच सदस्यीय टीम इस संबंध में बीएचपीसी के अधिकारियों से मिल चुकी है और परियोजना स्थल के भ्रमण की योजना भी बना रही है। भ्रमणकारी टीम तीन दिन तक प्रस्तावित परियोजना स्थल का गहन अध्ययन करेगी। इस टीम में भूगर्भशास्त्री और सिविल इंजीनियर भी शामिल होंगे।

आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी बिहार में बिजली के विकास की दर काफी धीमी है। राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 1700 मेगावाट की है। इस तरह से बिहार में बिजली उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय दर 9.5 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। इसी तरह बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत भी अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

राज्य की प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 104 किलोवाट प्रति घंटे है, जबकि इसकी राष्ट्रीय खपत 220 किलोवाट प्रति घंटे है। उत्तरी क्षेत्र में तो बिजली की उपलब्धता काफी दयनीय है। उत्तर बिहार की बिजली खपत तो महज 18 किलोवाट प्रति घंटे है। बिजली की कमी की वजह से राज्य में औद्योगिक विकास की दर काफी धीमी है।

Advertisement
First Published - June 19, 2008 | 9:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement