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खाद्य, SUV और ऑनलाइन गेमिंग पर GST काउंसिल के फैसले से बढ़ी चिंताएं

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परिषद ने सिनेमा घरों में बेचे जाने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों पर जीएसटी दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी। दरों में ऐसी चुनिंदा छेड़छाड़ से बचा जाना चाहिए था।

Last Updated- July 12, 2023 | 11:44 PM IST
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने मंगलवार को अपनी 50वीं बैठक में कुछ अहम निर्णय लिए। उदाहरण के लिए परिषद ने जीएसटी अपील पंचाट की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के 1 अगस्त से प्रभावी होने की अ​धिसूचना जारी की जाएगी। राज्यों में इसके पीठ स्थापित किए जाएंगे और इनकी शुरुआत राज्यों की राजधानियों से की जाएगी। इसका प्रमुख पीठ दिल्ली में स्थापित होगा।

अब यह सुनि​श्चित करना होगा कि इन पीठ की स्थापना जल्दी से जल्दी हो सके ताकि विवादों को समय रहते निपटाया जा सके। ऐसा करने से कारोबारी सुगमता की ​स्थिति बेहतर होगी। फिलहाल कर अधिकारियों के साथ विवाद उच्च न्यायालयों में जाते हैं जहां उनका निपटान आसान नहीं है क्योंकि वहां पहले ही बहुत सारे मामले लंबित हैं। ऐसे में सभी राज्यों में पर्याप्त संख्या में पीठ की स्थापना से कारोबारियों और कर प्रशासन दोनों को मदद मिलेगी। दूसरा अहम निर्णय ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और घुड़दौड़ पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने का है क्योंकि यह इन गतिवि​धियों को जुए के समकक्ष ला देगा।

कारोबार खासतौर पर ऑनलाइन गेमिंग के क्षेत्र में कम कर दर की मांग की जा रही थी। कहा जा रहा था कि उच्च कर दर से इस तेजी से विकसित होते क्षेत्र को नुकसान पहुंचेगा। चूंकि तकनीक अक्सर राष्ट्रीय सीमाओं से परे होती है इसलिए खेलों को आसानी से भारतीय कंपनियों की कीमत पर विदेशों में ले जाया जा सकता है।

ऐसे में भारत एक उभरते क्षेत्र को गंवा बैठेगा और इसका असर रोजगार निर्माण पर भी पड़ेगा। यह भी कहा जा सकता है कि परिषद को इस पहलू पर विचार करना चाहिए था। चूंकि यह निर्णय काफी विमर्श के बाद हुआ है इसलिए लगता नहीं कि हाल फिलहाल में इसकी समीक्षा होगी।

कुछ अन्य निर्णय व्यवस्था के डिजाइन और क्रियान्वयन में बुनियादी खामी दर्शाते हैं जिन्हें बहुत पहले दूर कर लिया जाना चाहिए था। उदाहरण के लिए परिषद ने सिनेमा घरों में बेचे जाने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों पर जीएसटी दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी। उसने स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल की परिभाषा में भी बदलाव किया ताकि जीएसटी पर उपकर लगाया जा सके।

उसने बिना पके-बिना तले स्नैक्स, फिश सॉल्युबल पेस्ट तथा कुछ वस्तुओं पर दरों में कमी की है। दरों में ऐसी चुनिंदा छेड़छाड़ से बचा जाना चाहिए था। यह बात अहम है कि कर दरें स्पष्ट और ​स्थिर हों। दरों और स्लैबों को समुचित बनाने का काम काफी समय से लंबित है। उचित समीक्षा और मशविरे के बाद इसे एकबारगी अंजाम दिया जाना चाहिए।

ध्यान देने वाली बात है कि परिषद के कुछ सदस्यों ने धनशोधन निवारण अ​धिनियम (पीएमएलए), 2022 के प्रावधानों में संशोधन का भी मुद्दा उठाया ताकि प्रवर्तन निदेशालय जीएसटी नेटवर्क के साथ सूचनाएं साझा कर सके। कहा जा रहा है कि इससे धनशोधन के कारण जीएसटी को हो रहे नुकसान को रोका जा सकेगा। केंद्र और राज्यों के कर अ​धिकारी अनुपालन की कमियों को दूर करने के लिए प्रयासरत हैं।

बड़ी तादाद में फर्जी संस्थाओं का पता चला है। साथ ही ऐसे नेटवर्क भी पकड़े गए हैं जो फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे करते थे। इसमें दो राय नहीं कि कर प्रशासन को व्यवस्था को धता बताने वालों को पकड़ना ही चाहिए। बहरहाल, यह भी अहम है कि ईमानदार करदाताओं को अधिक परेशानी न हो। पीएमएलए के प्रावधान के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि प्रवर्तन निदेशालय और कर प्रशासन दोनों को अपने रुख को सही र​खना चाहिए। इस प्रावधान को अनुचित कर मांग करने का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए।

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First Published - July 12, 2023 | 11:25 PM IST

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