कौशल विकास कंपनी अपग्रेड द्वारा एडटेक प्लेटफॉर्म अनएकेडमी को पूरी तरह स्टॉक डील में खरीदने के प्रस्ताव ने उस कारोबार के लिए उम्मीद पैदा की है जो लॉकडाउन के बाद स्कूलों के खुलने से प्रभावित होने के कारण लड़खड़ा रहा है। वर्ष 2022 से चल रही फंडिंग की समस्या अभी तक सुलझने के कोई संकेत नहीं दिखा रही है।
ग्राहकों और भागीदारों द्वारा संदिग्ध कॉरपोरेट गवर्नेंस और असामान्य दस्तूर अपनाने के आरोपों के बीच भारत के पहले हाई-प्रोफाइल एडटेक यूनिकॉर्न बैजूस के पतन ने इस क्षेत्र के आकर्षण को बहुत हद तक धूमिल कर दिया। महामारी के बाद अनएकेडमी और नोएडा स्थित वेदांतु जैसे प्लेटफॉर्मों की संघर्षपूर्ण स्थिति ने भी इस क्षेत्र की स्थिति को और खराब कर दिया है। ये कभी इस क्षेत्र में अग्रणी थे।
ताजा सौदा अपग्रेड की तरफ से दो महीने में दूसरी पेशकश है। जनवरी में चल रही बातचीत मूल्यांकन को लेकर मतभेद के कारण विफल रही थी। बताया जाता है कि उद्यमी और फिल्म निर्माता रॉनी स्क्रूवाला द्वारा सह-संस्थापित अपग्रेड ने 30 करोड़ डॉलर का मूल्यांकन प्रस्तावित किया था जो अनएकेडमी के निवेशकों द्वारा चाहे जा रहे 2.25 अरब डॉलर के मूल्यांकन से काफी कम था। वर्ष 2021 में इसका मूल्यांकन 3.4 अरब डॉलर के साथ उच्चतम स्तर पर था।
2024 में अनएकेडमी और कोटा में तैयारी कराने वाली प्रमुख संस्था एलेन करियर इंस्टीट्यूट के बीच चल रही बातचीत भी इन्हीं वजहों से विफल हो गई थी। इस सौदे के संभावित पुनर्जीवन (फिलहाल केवल एक टर्म-शीट पर हस्ताक्षर हुए हैं) से यह संकेत नहीं मिलना चाहिए कि इस क्षेत्र को नई जान मिल रही है। आगे के सौदे 2021 और 2022 जैसी सुर्खियां बटोरने वाली ऊंची मूल्यांकन दरों पर होने की संभावना नहीं है।
निवेशकों के बीच नजरिया यह है कि नया निवेश जुटाने के लिए प्रवर्तकों को बड़े पैमाने पर कटौती करनी पड़ेगी (जिसका संकेत अपग्रेड-अनएकेडमी सौदे से मिलता है)। 2024 में एडटेक फंडिंग में हल्की बढ़ोतरी ने उम्मीदें जगाईं लेकिन 2025 में सौदों की संख्या घटकर 31 रह गई, जो 2024 में 48 थी और जो 2021 के उछाल वर्ष में 172 तथा 2022 में 95 की तुलना में बहुत कम है। यह एक दशक में सबसे कम है। फंडिंग भी 2024 के 57.2 करोड़ डॉलर से घटकर 2025 में 24 करोड़ डॉलर रह गई। यह 2021 के 4.78 अरब डॉलर और 2022 के 2.44 अरब डॉलर से तेज गिरावट है।
नोएडा मुख्यालय वाली फिजिक्सवाला सूचीबद्ध होने वाली पहली एडटेक कंपनी बनी। उसका शेयर बाजार प्रदर्शन इस दृष्टिकोण को दर्शाता है। नवंबर 2025 में 145 रुपये पर सूचीबद्ध होने के बाद, इसका शेयर अब लगभग 80-86 रुपये पर ठहरा हुआ है। कई तरह से एडटेक क्षेत्र खराब रणनीति सोच का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह गलती उद्यमियों और निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल निवेशक, दोनों की ओर से नजर आती है। अधिकांश एडटेक प्लेटफॉर्म महामारी के वर्षों में तेजी से बढ़े और के-12 (किंडरगार्टन से कक्षा 12 तक) क्षेत्र में प्रवेश कर गए, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान पारंपरिक स्कूल बंद थे और ये एडटेक संस्थान निवेशकों से लगातार बढ़ते हुए मूल्यांकन का लाभ उठा रहे थे।
आश्चर्य नहीं कि स्कूलों के फिर से खुलने के बाद वे प्रासंगिक बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टेस्ट तैयारी और कोचिंग व्यवसाय में लगे प्लेटफॉर्म अनुभवी पारंपरिक संस्थानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाए। बैजूस और अनएकेडमी ने हाइब्रिड ऑनलाइन/ऑफलाइन मॉडल अपनाने की कोशिश में भारी नकदी खर्च की, आक्रामक रूप से स्टार्टअप्स का अधिग्रहण किया और इतनी तेजी से विस्तार किया कि गुणवत्ता नियंत्रण प्रभावित हुआ। परिणामस्वरूप लाभ में कमी आई और छंटनी हुई।
निवेशकों की प्राथमिकताएं भी बदलती रही हैं। महामारी के बाद के दौर में कौशल उन्नयन, उच्च शिक्षा और पेशेवर पढ़ाई को एडटेक निवेश के लिए अधिक लाभकारी विकल्प माना गया। अब आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के आगमन के साथ निवेशक फिर से के-12 शिक्षा की ओर रुख कर रहे हैं, जहां प्लेटफॉर्म की स्कूल छात्रों को व्यक्तिगत शिक्षा देने की क्षमता एक प्रमुख विभेदक तत्व बनकर उभरेगी। लेकिन यहां भी फंडिंग में बेहतरी अभी नजर आनी है।