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आपका किराया है ₹50 हजार से ज्यादा? 31 मार्च से पहले जान लें TDS के ये नए नियम, नहीं तो लगेगा जुर्माना

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50,000 रुपये से अधिक किराये पर 2% TDS काटना जरूरी है। इसके लिए अगर आप मार्च की डेडलाइन चूकते हैं तो आपको भारी पेनाल्टी और ब्याज देना पड़ सकता है

Last Updated- March 09, 2026 | 3:41 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अगर आपका महीने का किराया 50 हजार रुपये से ज्यादा है, तो आपके लिए TDS काटने के नियम को मानना जरूरी है। यह नियम उन लोगों के लिए है जो घर या फ्लैट किराए पर लेते हैं और मकान मालिक को बड़ी रकम देते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ये नियम इसलिए बनाया है ताकि किराए से होने वाली कमाई पर टैक्स समय से कट जाए। ये नियम 2017 से चल रहा है और हाल ही में इसमें कुछ बदलाव हुए हैं, जैसे टैक्स की दर कम होना। अगर आप इंडिविजुअल (व्यक्तिगत) हैं या हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) से ताल्लुक रखते हैं, और आपका बिजनेस टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आता, तो ये नियम आप पर लागू होता है। ऐसे में मार्च के महीने तक TDS काटकर जमा करना जरूरी हो जाता है, वरना जुर्माना लग सकता है। चलिए, इस नियम की बारीकियों को समझते हैं।

सेक्शन 194-IB क्या कहता है और किस पर लागू होता है

यह सेक्शन इनकम टैक्स एक्ट का हिस्सा है जो किराए पर TDS काटने की बात करता है। इसके मुताबिक, अगर आपका किराया हर महीने 50 हजार रुपये से ज्यादा है, तो आपको मकान मालिक को पैसे देने से पहले टैक्स काटना जरूरी है। ये नियम सिर्फ ‘रेजिडेंट लैंडलॉर्ड’(Resident Landlord) पर लागू होता है, मतलब अगर मकान मालिक भारत का निवासी है। खास बात ये है कि अगर पूरे साल में किसी एक महीने में भी किराया 50 हजार से ऊपर चला गया, तो पूरे साल का TDS काटना जरूरी हो जाता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि पूरे फाइनेंशियल ईयर का TDS कटे, अगर आपने साल के बीच में ही घर लिया या छोड़ दिया, तो केवल उसी अवधि के किराये पर TDS लागू होगा। मिसाल के तौर पर, अगर जनवरी में किराया 55 हजार रुपये हो गया, लेकिन बाकी महीनों में कम था, तब भी आपको इससे पहले का पूरा हिसाब देखना पड़ेगा।

ये नियम उन इंडिविजुअल्स या HUF पर लगता है जो पिछले साल टैक्स ऑडिट के घेरे में नहीं आए थे। टैक्स ऑडिट वो होता है जब आपका बिजनेस टर्नओवर ज्यादा होता है और सेक्शन 44AB के तहत चेकिंग होती है। अगर आपका बिजनेस छोटा है या आप सैलरीड पर्सन हैं, तो ये नियम आप पर फिट बैठता है। लेकिन अगर आप कंपनी हैं या बड़ा बिजनेस चलाते हैं, तो आपके लिए अलग सेक्शन 194-I है, जहां सालाना किराया 2.4 लाख रुपये से ऊपर होने पर TDS कटता है। बजट 2025 में इस थ्रेशोल्ड को बढ़ाकर 6 लाख कर दिया गया, लेकिन वो सेक्शन 194-I के लिए है। 194-IB में महीने का 50 हजार रुपये वाला नियम अभी भी वैसा ही है।

इस नियम का मकसद यह है कि किराए से कमाने वाले मकान मालिकों की आय पर सरकार को समय से टैक्स मिल सके। पहले कई मामलों में किराया तो दिया जाता था, लेकिन उस पर टैक्स नहीं कटता था, जिससे राजस्व का नुकसान हो सकता था। इसी वजह से सरकार ने किराएदार को ही TDS काटने की जिम्मेदारी दी है।

अगर मकान मालिक अपना PAN नहीं देता, तो नियमों के मुताबिक ज्यादा दर से TDS कट सकता है, हालांकि, आम तौर पर PAN उपलब्ध होने पर ही पेमेंट किया जाता है। यह नियम मुख्य रूप से घर या फ्लैट जैसी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के किराये पर लागू होता है, जबकि प्लांट या मशीनरी के किराये पर यह सेक्शन लागू नहीं होता।

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TDS काटने की दर और कब काटें

अब बात TDS की दर की। पहले ये 5 प्रतिशत था, लेकिन 2024 के बजट में इसे घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया। यह बदलाव 1 अक्टूबर 2024 से ही लागू हो चुका है। मतलब, अगर आपका किराया 60 हजार रुपये महीना है, तो TDS 1200 रुपये होगा। अगर लैंडलॉर्ड का PAN नहीं है, तो रेट 20 प्रतिशत तक जा सकता है, लेकिन वो भी सिर्फ आखिरी महीने के किराए तक सीमित रहेगा।

TDS कब काटें? यह आखिरी महीने के किराए पर कटता है। फाइनेंशियल ईयर के आखिर में, यानी मार्च में, या अगर आप प्रॉपर्टी पहले छोड़ देते हैं तो उस महीने में। जैसे, अगर आपका टेनेंसी ईयर अप्रैल से मार्च तक है, तो मार्च के किराए से TDS काटें। लेकिन पूरे साल का TDS एक साथ काटा जाता है, न कि हर महीने। मिसाल दें तो, अगर साल भर का कुल किराया 6 लाख रुपये है (महीने का 50 हजार), तो TDS 12 हजार रुपये होगा (2 प्रतिशत पर)।

जमा कैसे करें? आपको TAN नंबर की जरूरत नहीं है, बस अपना PAN और लैंडलॉर्ड का PAN इस्तेमाल करें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर Form 26QC भरें और TDS जमा करें। ये ऑनलाइन होता है, बैंक या नेट बैंकिंग से पेमेंट करें। जमा करने के बाद, Form 16C जेनरेट करें और लैंडलॉर्ड को दें, ये उनका प्रूफ होगा कि TDS कट गया है। डिपॉजिट की डेडलाइन डिडक्शन वाले महीने के अंत से 30 दिन है। जैसे, मार्च 2026 में काटा TDS तो 30 अप्रैल 2026 तक जमा करें। अगर देर हुई, तो परेशानी हो सकती है।

नियम न मानने पर लगेगा जुर्माना और ब्याज

अगर आप TDS नहीं काटते या जमा नहीं करते, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको डिफॉल्टर मान सकता है। सबसे पहले, ब्याज लगेगा। अगर TDS नहीं काटा तो यह 1 प्रतिशत प्रति महीना, और अगर काटा लेकिन जमा नहीं किया तो 1.5 प्रतिशत प्रति महीना लगेगा। यह ब्याज उस वक्त से लगेगा जब TDS काटना चाहिए था। इसके अलावा, TDS रिटर्न न फाइल करने पर रोजाना 200 रुपये का लेट फी लग सकता है।

सबसे बड़ा जुर्माना सेक्शन 271H के तहत है, जहां 1 लाख रुपये तक पेनाल्टी लग सकती है अगर आप TDS स्टेटमेंट नहीं फाइल करते। और अगर TDS बिल्कुल नहीं काटा, तो पूरा टैक्स आपसे वसूला जा सकता है। ये सब इसलिए क्योंकि सरकार किराए की इनकम पर नजर रखना चाहती है। हाल के सालों में ऐसे कई केस आए हैं जहां किराएदारों को नोटिस मिले और उन्हें पेनाल्टी भरनी पड़ी।

अगर लैंडलॉर्ड फॉर्म 13 सबमिट करके नो TDS सर्टिफिकेट ले ले, तो TDS नहीं काटना पड़ता। लेकिन ये रेयर है। टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक, ये नियम किराएदारों के लिए बोझ लग सकता है, लेकिन इसे लागू करना आसान है और ऑनलाइन तरीके से हो जाता है। अगर आपका किराया ज्यादा है, तो अभी से प्लानिंग करें ताकि मार्च में जल्दबाजी न हो।

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First Published - March 9, 2026 | 3:41 PM IST

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