facebookmetapixel
Advertisement
दिल्ली-एनसीआर में GRAP-1 की पाबंदियां लागू, वायु गुणवत्ता ‘खराब’ कैटेगरी में पहुंची Chana Price: चना हुआ गरम, आवक घटने और निचले भाव पर खरीद बढ़ने से भाव चढ़ेम्युचुअल फंड में महिला निवेशकों का AUM FY26 में ₹11 लाख करोड़ के पार, SIP में 29% हिस्सेदारीExplainer: क्या सिर्फ परिवार की प्रॉपर्टी में रहने से मिल जाता है मालिकाना हक? जानिए कानून क्या कहता हैThe Wealth Company बनी EGR से जुड़ने वाली पहली AMC, अब NSE पर मिलेगा शेयर की तरह सोनाBharat Electronics Q4 Results: मुनाफा 5% बढ़कर ₹2,225 करोड़ के पार, रेवेन्यू में भी 12% की जोरदार बढ़ोतरीIndia Markets Outlook: लंबी अव​धि में ग्रोथ की संभावना मजबूत, मार्च 2027 तक 29,000 पर पहुंच सकता है निफ्टीICICI PRU MF ने लॉन्च किए 2 नए SIF, लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रैटेजी पर फोकस; किन निवेशकों के लिए हैं बेहतर?Angel One से MCX तक क्यों दौड़ रहे हैं ये शेयर? निवेशकों में खरीदारी की होड़रेलवे के कर्मचारी दें ध्यान! सरकार ने पेंशन प्रोसेसिंग नियमों में किया बदलाव, PPO के लिए नई गाइडलाइन जारी

1 अप्रैल से बदल जाएगा UPI पेमेंट का सिस्टम, अब सिर्फ OTP से नहीं चलेगा काम; ये तरीके अपनाने होंगे

Advertisement

1 अप्रैल से RBI डिजिटल पेमेंट के नियम बदल रहा है। अब पेमेंट के लिए OTP के साथ बायोमेट्रिक या पिन जरूरी होगा, जो RBI की साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने की कोशिश है

Last Updated- March 31, 2026 | 4:04 PM IST
UPI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कल से यानी 1 अप्रैल 2026 से भारत में डिजिटल पेमेंट करने का तरीका थोड़ा बदलने वाला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने साइबर फ्रॉड बढ़ने को देखते हुए नई सख्ती की है। अब UPI, कार्ड और वॉलेट से होने वाले हर ट्रांजेक्शन में दो-तरफा वेरिफिकेशन यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूरी हो जाएगा। सिर्फ OTP डालकर काम नहीं चलेगा।

इस बदलाव से पेमेंट थोड़ा समय ले सकता है। हालांकि, RBI का कहना है कि इसके पीछे उसका मकसद लोगों के पैसे को ज्यादा सुरक्षित रखना और बिना इजाजत के ट्रांजेक्शन को रोकना है।

अब OTP अकेला काफी नहीं

पहले ज्यादातर ऑनलाइन पेमेंट सिर्फ OTP के भरोसे ही पूरे हो जाते थे। लेकिन फिशिंग और SIM स्वैप जैसे फ्रॉड ने दिखा दिया कि ये तरीका पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अब नए नियमों में OTP अकेले काम नहीं करेगा, बल्कि यह सिर्फ एक स्टेप रहेगा। हर पेमेंट को पूरा करने के लिए कम से कम दो अलग-अलग तरीकों से वेरिफिकेशन करना जरूरी होगा।

Also Read: Explainer: 1 अप्रैल से बदलेगी आपकी सैलरी व टैक्स की दुनिया — नए वेज कोड और इनकम टैक्स एक्ट की पूरी ABCD

वेरिफिकेशन के लिए PIN या पासवर्ड, फिंगरप्रिंट या फेस ID जैसे बायोमेट्रिक, या फिर सुरक्षित टोकन इस्तेमाल हो सकते हैं। यानी अब हर ट्रांजेक्शन दो लेयर की जांच से गुजरेगा। अगर आप अपने भरोसेमंद (trusted) डिवाइस से पेमेंट कर रहे हैं तो प्रक्रिया थोड़ी आसान रह सकती है, लेकिन नई डिवाइस या ज्यादा रकम वाले पेमेंट पर अतिरिक्त जांच हो सकती है। RBI ने रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन पर भी जोर दिया है, यानी ट्रांजेक्शन के जोखिम के हिसाब से सुरक्षा का स्तर तय किया जाएगा।

बैंक और प्लेटफॉर्म पर ज्यादा जिम्मेदारी

नए नियम सिर्फ यूजर्स तक नहीं रुकते। बैंक और पेमेंट कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्हें सुरक्षा स्टैंडर्ड फॉलो करने पड़ेंगे। अगर सिस्टम की गलती से फ्रॉड होता है तो बैंक को यूजर को मुआवजा देना पड़ सकता है। विवाद सुलझाने की प्रक्रिया भी तेज होनी चाहिए।

इसके अलावा इंटरनेशनल पेमेंट पर भी यही नियम लागू होंगे। क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन और विदेशी कार्ड पेमेंट के लिए पूर्ण रूप से अक्टूबर 2026 तक लागू करना है।

RBI ने का कहना है उसने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि भारत में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं। UPI और कार्ड ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल रोजमर्रा हो गया है, लेकिन साथ ही फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। नई व्यवस्था से साइबर घोटालों को कम करने, लोगों का भरोसा बढ़ाने और पूरे सिस्टम को मजबूत बनाने की कोशिश है।

Advertisement
First Published - March 31, 2026 | 4:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement