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1 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट के नियम बदलेंगे, जानें अब आपका पैसा कैसे रहेगा और भी सुरक्षित

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RBI डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए 1 अप्रैल से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करने जा रही है, ताकि फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी को जड़ से खत्म किया जा सके

Last Updated- March 23, 2026 | 8:12 PM IST
Digital payments
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में डिजिटल पेमेंट अब और कड़ी सिक्योरिटी के दायरे में आने वाला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल 2026 से हर तरह के डिजिटल ट्रांजेक्शन में टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूरी होगा। चाहे कार्ड से पेमेंट हो, UPI हो या फिर वॉलेट, सबमें यह नियम लागू होगा।

यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

नए नियम के मुताबिक, हर पेमेंट के लिए कम से कम दो अलग-अलग तरीकों से वेरिफिकेशन होना चाहिए। ये तरीके तीन कैटेगरी में आते हैं:

  • कुछ जो आपको पता हो, जैसे पासवर्ड, पिन या कोई पासफ्रेज।
  • कुछ जो आपके पास हो, जैसे कार्ड, मोबाइल डिवाइस या OTP।
  • कुछ जो आप खुद हों, यानी फिंगरप्रिंट या चेहरा पहचानने वाली बायोमेट्रिक्स।

इनमें से कम से कम एक फैक्टर हर बार नया होना चाहिए, मतलब ट्रांजेक्शन के हिसाब से जनरेट होने वाला, जैसे OTP। अब तक ज्यादातर लोग OTP और पिन से काम चला रहे थे, तो शुरुआत में आम आदमी को ज्यादा बदलाव महसूस नहीं होगा। लेकिन अब ये नियम पूरे सिस्टम में एकसमान होंगे, और इसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।

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फ्रॉड बढ़ने की वजह से सख्ती

देश में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ गए हैं। फिशिंग, सिम स्वैप और बिना इजाजत अकाउंट एक्सेस करना अब आम हो गया है।

पहले लोग OTP पर काफी भरोसा करते थे, लेकिन अब यह उतना सुरक्षित नहीं माना जा रहा, क्योंकि ठग सोशल इंजीनियरिंग, मालवेयर या SMS इंटरसेप्ट करके OTP भी पा लेते हैं। इसी वजह से RBI अब पुराने तरीकों से आगे बढ़कर ज्यादा मजबूत और आधुनिक सिक्योरिटी सिस्टम लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।

संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर एक्स्ट्रा चेक

सिर्फ 2FA तक बात सीमित नहीं है, अगर कोई पेमेंट संदिग्ध लगे तो बैंक या पेमेंट कंपनी उसकी और जांच कर सकती है, जैसे पेमेंट कहां से हो रहा है, कौन सा डिवाइस है, खर्च का तरीका कैसा है और पहले के ट्रांजेक्शन कैसे रहे हैं। खासतौर पर बड़ी रकम या जोखिम वाले पेमेंट में यूजर से अतिरिक्त वेरिफिकेशन भी मांगा जा सकता है।

बैंकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

अगर कोई ट्रांजेक्शन इन नियमों का पालन किए बिना हो जाता है और उसमें धोखाधड़ी होती है, तो बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर पूरी तरह जिम्मेदार होंगे और ग्राहक का नुकसान भरना पड़ेगा। इससे कंपनियां सिक्योरिटी को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क रहेंगी।

विदेशी पेमेंट्स के लिए भी डेडलाइन

RBI ने कहा है कि क्रॉस-बॉर्डर और कार्ड-नॉट-प्रेजेंट ट्रांजेक्शन में भी यही 2FA नियम 1 अक्टूबर 2026 तक लागू करना होगा, ताकि विदेशों में होने वाले पेमेंट भी उतने ही सुरक्षित बन सकें।

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First Published - March 23, 2026 | 8:12 PM IST

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