पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) समेत दूसरी पेंशन स्कीम्स में कई बदलाव लाने की बात कही है। इसके तहत पेंशन स्कीम्स को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए ‘पॉइंट ऑफ प्रेजेंस’ (PoP) से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए PFRDA ने बीते 2 सितंबर को साल 2018 के PoP नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है।
इन बदलावों का मकसद PoP का नेटवर्क बढ़ाना है, ताकि खासकर उन इलाकों में भी पेंशन स्कीम्स की सुविधा पहुंच सके, जहां अभी इनकी पहुंच कम है। इसके साथ ही ग्राहकों को बेहतर सर्विस देने और उनकी समस्याओं का जल्द हल करने पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, अभी ये बदलाव सिर्फ प्रस्ताव हैं और इन्हें अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। PFRDA ने इन प्रस्तावों पर लोगों और इससे जुड़ें दूसरे पक्षों से सुझाव और राय मांगी है। सुझाव देने की आखिरी तारीख 2 अक्टूबर 2026 है।
प्रस्तावित नियमों के तहत PoP के जरिए लोगों को पेंशन स्कीम्स से जोड़ने के लिए फिजिकल और डिजिटल दो तरीके होंगे। डिजिटल मोड में लोगों को स्कीम्स से जोड़ने से लेकर पैसा जमा करने और सर्विस से जुड़ी रिक्वेस्ट पूरी करने तक का काम ऑनलाइन होगा। ग्राहक की जानकारी डिजिटल तरीके से दर्ज की जाएगी, पैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जमा होगा और दूसरी सर्विस रिक्वेस्ट भी PFRDA से मंजूर प्लेटफॉर्म पर ही पूरी की जाएंगी।
वहीं, अगर किसी PoP की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं है या वह फिजिकल और डिजिटल, दोनों तरीकों से काम करता है, तो उसे फिजिकल मोड में रखा जाएगा।
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PFRDA ने PoP के तौर पर रजिस्ट्रेशन के लिए संस्थाओं का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत फाइनेंशियल सेक्टर के रेगुलेटर के तहत आने वाली संस्थाओं के अलावा नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर की संस्थाओं और सहकारी समितियों को भी PoP बनने का मौका मिल सकता है।
डिजिटल मोड में काम करने वाले PoP के लिए एलिजिबिलिटी और बढ़ाने की बात कही गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, तय शर्तें पूरी करने पर LLP, सोसाइटी या एसोसिएशन और ट्रस्ट भी PoP के तौर पर रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, डिजिटल तरीके से ग्राहकों को जोड़ने वाले PoP को अलग डिजिटल कलेक्शन अकाउंट रखना होगा। हर पेंशन स्कीम के लिए अलग अकाउंट होगा और डिजिटल माध्यम से आने वाला पैसा इसी खाते में जमा किया जाएगा। वहीं, फिजिकल मोड में काम करने वाले PoP के लिए हर पेंशन स्कीम के अलग कलेक्शन अकाउंट की मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का प्रस्ताव है।
PFRDA ने ‘पेंशन एजेंट’ का नाम बदलकर ‘NPS मित्र’ करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत PoP से समझौते के आधार पर NPS या PFRDA की ओर से रेगुलेट और चलाई जा रही दूसरी पेंशन स्कीम्स को लोगों तक पहुंचाने में मदद करने वाले लोगों को ‘NPS मित्र’ कहा जाएगा।
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, बैंकों के बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट और कॉरपोरेट बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट भी ‘NPS मित्र’ बन सकेंगे। इनके अलावा इंश्योरेंस एजेंट, AMFI में रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर और PFRDA की मंजूरी से काम करने वाले दूसरे लोग भी इस दायरे में शामिल हो सकते हैं।
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, ‘NPS मित्र’ के काम में किसी तरह की गलती या चूक होने पर उसकी जिम्मेदारी PoP की होगी। इसमें KYC के साथ एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और आतंकवाद के लिए फंडिंग रोकने से जुड़े CFT नियमों का पालन भी शामिल है।
PoP को अपने ‘NPS मित्र’ के काम की निगरानी करनी होगी और यह भी देखना होगा कि वे तय नियमों के मुताबिक काम कर रहे हैं। इसके अलावा PoP को ‘NPS मित्र’ को पेंशन स्कीम्स से जुड़ी जरूरी ट्रेनिंग भी देनी होगी। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि ‘NPS मित्र’ को सिर्फ पेंशन स्कीम्स के काम के लिए लगाया जा सकेगा।
प्रस्तावित नियमों के तहत PoP और ‘NPS मित्र’ को ग्राहकों को पेंशन स्कीम्स से जुड़ी सही और नई जानकारी देनी होगी। खाता खोलने से पहले ग्राहक को जानकारी समझने के लिए पर्याप्त समय भी देना होगा, ताकि वह सोच-समझकर फैसला ले सके।
इसके अलावा पेंशन स्कीम्स से जुड़ी जानकारी वेबसाइट पर रखनी होगी। अगर किसी स्कीम में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उसकी जानकारी भी तय समय के भीतर अपडेट करनी होगी। जरूरत के मुताबिक ग्राहकों को तय अंतराल पर भी जानकारी दी जा सकेगी।
प्रस्तावित ‘कोड ऑफ कंटक्ट’ में PoP और ‘NPS मित्र’ के लिए ग्राहकों के साथ ईमानदारी और निष्पक्ष तरीके से व्यवहार करने की बात कही गई है। उन्हें अपनी योग्यता, क्षमता या उपलब्धियों को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर दावे करने की अनुमति नहीं होगी।
ऐसी कोई भी भ्रामक या गलत जानकारी देने पर रोक होगी, जिससे ग्राहक सही फैसला लेने की स्थिति में न रहे। इसके अलावा PoP और ‘NPS मित्र’ PFRDA की ओर से तय फीस के अलावा ग्राहक से कोई दूसरी फीस नहीं ले सकेंगे।
प्रस्तावित नियमों में ग्राहकों को धोखाधड़ी और लापरवाही से होने वाले नुकसान से बचाने की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की बात कही गई है। अगर PoP या उसके ‘NPS मित्र’ की धोखाधड़ी या लापरवाही के कारण लोगों को नुकसान होता है और यह साबित हो जाता है, तो PoP को उसकी भरपाई की व्यवस्था करनी होगी।
इसके अलावा, PoP अपने कर्मचारियों, ‘NPS मित्र’ या अपनी ओर से काम करने वाले दूसरे लोगों की किसी गलती या चूक के लिए भी जिम्मेदार रहेगा।
प्रस्तावित नियमों में NPS और दूसरी पेंशन स्कीम्स से जुड़े ग्राहकों के रिकॉर्ड, डेटा और दूसरी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने का नियम भी रखा गया है।
PoP और ‘NPS मित्र’ को ग्राहक की जानकारी को गोपनीय रखना होगा। PFRDA की मंजूरी के बिना इस जानकारी को किसी के साथ शेयर या किसी के सामने पेश नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, कानून के तहत जरूरी प्रक्रिया के जरिए जानकारी मांगी जाती है, तो यह नियम लागू नहीं होगा।
PFRDA ने 2 सितंबर 2026 को जो ड्राफ्ट जारी किया है, वह अभी अंतिम नियम नहीं है। प्रस्ताव पर लोगों से मिलने वाले सुझावों के बाद इसमें बदलाव किया जा सकता है। PFRDA ने इन प्रस्तावों पर राय और सुझाव देने के लिए 2 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है।