अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं तो आने वाले दिनों में आपको अपनी स्कीम के नाम और कैटेगरी में बदलाव दिखाई दे सकता है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS की निवेश स्कीमों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इसका मकसद अलग-अलग स्कीमों के जोखिम, निवेश और रिटर्न की तुलना आसान बनाना है।
PFRDA ने 28 अगस्त को दो सर्कुलर जारी किए हैं। इसके तहत पेंशन फंड्स को मौजूदा Multiple Scheme Framework (MSF) स्कीमों के नाम बदलने के लिए 30 दिन दिए गए हैं। वहीं, एक ही कैटेगरी में दो से ज्यादा स्कीमें होने पर उन्हें मर्ज या रिस्ट्रक्चर करने के लिए 45 दिन मिलेंगे।
नए नियमों में इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश की हिस्सेदारी के आधार पर स्कीमों को पांच कैटेगरी में बांटा गया है।
कैटेगरी A: 80-100% इक्विटी निवेश, बहुत ज्यादा जोखिम
कैटेगरी B: 60-80% इक्विटी निवेश, ज्यादा जोखिम
कैटेगरी C: 35-60% इक्विटी निवेश, मध्यम जोखिम
कैटेगरी D: 10-35% इक्विटी निवेश, कम इक्विटी वाली स्कीम
कैटेगरी E: 0-10% इक्विटी निवेश, मुख्य रूप से डेट में निवेश
एक स्कीम को इनमें से किसी एक कैटेगरी में ही रखना होगा। यानी कोई स्कीम ऐसी नहीं हो सकती जिसका इक्विटी निवेश दो अलग-अलग कैटेगरी की सीमा में आता हो। इससे निवेशक आसानी से समझ सकेंगे कि जिस NPS स्कीम में वे पैसा लगा रहे हैं, उसमें शेयर बाजार का कितना जोखिम है।
PFRDA ने स्कीमों के नाम रखने का तरीका भी तय कर दिया है। नाम में पेंशन फंड का छोटा नाम, NPS, उसकी कैटेगरी और स्कीम का नाम शामिल होगा। Tier II की स्कीमों के नाम में आखिर में ‘Tier 2’ भी लिखा जाएगा। पेंशन फंड्स को 28 अगस्त से 30 दिनों के भीतर मौजूदा स्कीमों के नाम नए नियम के मुताबिक बदलने होंगे। इसलिए आने वाले हफ्तों में NPS या CRA प्लेटफॉर्म पर आपकी स्कीम का नाम बदला हुआ दिखाई दे सकता है।
एक पेंशन फंड हर Tier की एक कैटेगरी में अधिकतम दो MSF स्कीमें रख सकेगा। अगर अभी किसी फंड की एक कैटेगरी में दो से ज्यादा स्कीमें हैं तो अतिरिक्त स्कीमों को 45 दिनों के भीतर मर्ज या रिस्ट्रक्चर करना होगा। ऐसे में कुछ निवेशकों की मौजूदा स्कीम दूसरी स्कीम में मर्ज हो सकती है। पेंशन फंड को इसकी जानकारी निवेशकों को देनी होगी।
नए नियमों के बाद NPS स्कीम चुनते समय निवेशकों को स्कीम का नाम, लॉन्च की तारीख, पुराना रिटर्न, बेंचमार्क और उसका रिटर्न, फीस, रिस्कोमीटर और एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जैसी जानकारी दिखाई जाएगी। इससे अलग-अलग पेंशन फंड की स्कीमों के रिटर्न और जोखिम की तुलना करना आसान होगा।
अगर कोई MSF स्कीम बंद होती है तो निवेशक को अपना पैसा दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। अगर निवेशक कोई विकल्प नहीं चुनता है तो Tier I का पैसा उसी पेंशन फंड की Life Cycle 50 – Moderate (10E/55Y) Scheme में चला जाएगा।
मौजूदा NPS निवेशकों को इन बदलावों से घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ स्कीम का नाम बदलने का मतलब यह नहीं है कि निवेशक को अपना निवेश बदलना होगा। हालांकि, स्कीम मर्ज या बंद होने की सूचना मिलने पर उसे ध्यान से देखना जरूरी होगा। नए कैटेगरी वाले नियम सरकारी सेक्टर से जुड़े NPS खातों पर लागू नहीं होंगे।