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बैंक या फाइनैंस कंपनी ने खो दिया आपकी संपत्ति का डॉक्यूमेंट? जानें कौन-कौन से कदम तुरंत उठाना जरूरी

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के अनुसार, ऋणदाताओं को किसी भी ग्रहणाधिकार को हटाना होगा और ऋण खत्म होने के 30 दिनों के भीतर मूल संपत्ति दस्तावेज वापस करने होंगे

Last Updated- December 07, 2025 | 9:03 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कोयंबत्तूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाल में एक हाउसिंग फाइनैंस कंपनी को होम लोन लेते समय जमा किए गए मूल संपत्ति दस्तावेजों को खोने के लिए एक उधारकर्ता को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। अगर कोई ऋणदाता उधारकर्ता के संपत्ति दस्तावेज खो दे तो उसे तत्काल कुछ कदम उठाने चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान

होम लोन के लिए आवेदन करते समय उधारकर्ताओं को स्वामित्व दस्तावेज जमा करने होते हैं। इसमें एग्रीमेंट टु सेल, टाइटल डीड, पजेशन लेटर, बिल्डर या सोसायटी से एनओसी, मंजूी बि​ल्डिंग प्लान, एनकमब्रांस सर्टिफिकेट और कर भुगतान की रसीदें शामिल हैं। इन्हें जमानत के तौर पर रखा जाता है। संपत्ति दस्तावेज कई कारणों से खो जाते हैं। एंड्रोमेडा सेल्स ऐंड डिस्ट्रीब्यूशन के सह-मुख्य कार्याधिकारी राउल कपूर ने कहा, ‘वे गलत जगह पर रखे जा सकते हैं, अनुचित भंडारण के कारण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं अथवा आग लगने या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण खो सकते हैं।’

लोन लेने वालों को अपने दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां अवश्य रखनी चाहिए। बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, ‘ऋणदाता से जमा किए गए प्रत्येक दस्तावेज की सूची वाला लिखित पावती प्राप्त करें।’

ऋणदाता पर लग सकता है जुर्माना

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के अनुसार, ऋणदाताओं को किसी भी ग्रहणाधिकार को हटाना होगा और ऋण खत्म होने के 30 दिनों के भीतर मूल संपत्ति दस्तावेज वापस करने होंगे। शेट्टी ने कहा, ‘यदि ऋणदाता ऐसा करने में विफल रहता है तो उन्हें कारण बताना होगा। वे देरी के लिए प्रति दिन 5,000 रुपये के जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी हैं।’

दस्तावेज खो जाने की स्थिति में ऋणदाता को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने में उधारकर्ता की सहायता करनी चाहिए। शेट्टी ने कहा, ‘बैंक को उन दस्तावेजों को दोबारा हासिल करने या दोबारा बनाने में शामिल सभी लागत का वहन करना होगा। उन्हें अपनी बाध्यता को पूरा करने के लिए 30 दिन और मिलते हैं। यदि वे उस अवधि के बाद भी दस्तावेज या प्रमाणित प्रतियां देने में विफल रहते हैं तो उन्हें समस्या का समाधान होने तक प्रति दिन 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा।’

क्या करना चाहिए?

संपति दस्तावेज खो जाने पर बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी के पास लिखित शिकायत दर्ज करें और पावती प्राप्त करें। बैंक से एक लिखित पुष्टि प्रदान करने के लिए कहें जिसमें कहा गया हो कि दस्तावेज वास्तव में खो चुका है। किंग स्टब ऐंड कसीवा, एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज की पार्टनर निवेदिता भारद्वाज ने कहा, ‘यह लिखित रिकॉर्ड उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 या आरबीआई दिशानिर्देशों के तहत किसी भी भविष्य की कानूनी कार्रवाई या शिकायत के लिए महत्त्वपूर्ण है।’

दस्तावेज दोबारा हासिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कुछ अतिरिक्त दस्तावेज हासिल करने होंगे। भारद्वाज ने कहा, ‘बैंक के लेटरहेड पर दस्तावेज के खोने का प्रमाण पत्र, ऋण बंद होने या कोई बकाया न होने का प्रमाण पत्र (अगर ऋण चुका दिया गया है), खोए हुए दस्तावेजों की सूची, बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट (यदि उपलब्ध हो) और क्षतिपूर्ति सहायता के साथ एक औपचारिक सहायता पत्र प्राप्त करें।’

बैंक को एफआईआर दर्ज करने और किसी लोकप्रिय समाचार पत्र में नोटिस प्रकाशित करने के लिए कहें। इंडियालॉ एलएलपी के वरिष्ठ पार्टनर श्रीशैल किट्टड़ ने कहा, ‘संपत्ति के मालिक को नुकसान की पुष्टि करते हुए नोटरी से एक हलफनामा तैयार कराना होगा, एफआईआर एवं समाचार पत्र में प्रका​शित नोटिस की प्रति संलग्न करनी होगी और स्वामित्व दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियों के लिए उप-पंजीयक कार्यालय (जहां संपत्ति स्थित है) में आवेदन करना होगा। ये प्रतियां सत्यापन और मामूली शुल्क के भुगतान के बाद जारी की जाती हैं।’

मामले को कब उठाएं

लिखित शिकायत दर्ज करने के बाद बैंक को जवाब देने के लिए 30 दिन का समय दें। एक्विलॉ के पार्टनर अमित कुमार नाग ने कहा, ‘अगर मुद्दा नहीं सुलझता है तो शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) पोर्टल या ऑफलाइन माध्यम के जरिये आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत करें। साथ ही ऋण बंद होने और पहले के संचार का प्रमाण भी दें। इसके बाद लोकपाल बैंक को दस्तावेज वापस करने और उचित लगने पर मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है।’

उपभोक्ता शिकायत दर्ज करना एक अन्य विकल्प है। भारद्वाज ने कहा, ‘अगर कोई बैंक आपके संपत्ति दस्तावेज को खो देने के बाद सहयोग करने से इनकार करे या आवश्यक दस्तावेज जारी करने में देरी करे अथवा आपको कठिनाई या वित्तीय नुकसान पहुंचाकर अपने कर्तव्य का पालन करने में विफल रहे तो उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करें।’

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First Published - December 7, 2025 | 8:45 PM IST

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