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Demerger Explained: Vedanta का कर्ज खत्म होगा या बंट जाएगा? डिमर्जर का पूरा गणित

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Vedanta का डिमर्जर ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी के कर्ज को लेकर निवेशकों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है

Last Updated- May 05, 2026 | 2:18 PM IST
Vedanta

Vedanta Ltd का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा डिमर्जर अब कंपनी के भारी कर्ज की समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बांटने से बैलेंस शीट ज्यादा साफ होगी और हर बिजनेस को अपनी जरूरत के हिसाब से पूंजी इस्तेमाल करने की आजादी मिलेगी।

Mirae Asset Sharekhan की रिसर्च एनालिस्ट नेत्रा देशपांडे के मुताबिक, डिमर्जर से Vedanta का कर्ज अलग-अलग कंपनियों में बंट जाएगा और हर बिजनेस का कर्ज उसकी कमाई के हिसाब से तय होगा। इससे कुल मिलाकर कर्ज का दबाव कम दिखाई देगा और उसे संभालना आसान होगा।

5 अलग कंपनियों में बंटेगी Vedanta

Vedanta Ltd ने अपने डिमर्जर के लिए 1 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की थी। इस प्लान की घोषणा पहली बार सितंबर 2023 में की गई थी। डिमर्जर के बाद कंपनी पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंट जाएगी। इनमें Vedanta Aluminium, Vedanta Power, Vedanta Oil & Gas, Vedanta Iron & Steel और एक मूल Vedanta Ltd शामिल होगी।

जो भी निवेशक अभी Vedanta Ltd के शेयरहोल्डर हैं, उन्हें हर एक शेयर के बदले इन चार नई कंपनियों में एक-एक शेयर मिलेगा। यानी निवेशकों को कुल पांच कंपनियों में हिस्सेदारी मिल जाएगी।

मूल Vedanta Ltd के पास Hindustan Zinc, Zinc International, कॉपर और फेरो क्रोम जैसे अहम बिजनेस बने रहेंगे।

कर्ज को लेकर क्यों थी चिंता?

Vedanta का डिमर्जर ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी के कर्ज को लेकर निवेशकों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है। खास तौर पर प्रमोटर कंपनी Vedanta Resources Ltd यानी VRL पर ज्यादा कर्ज था।

पिछले कुछ सालों में VRL ने काफी कर्ज लिया था, जिससे उसके सामने कर्ज चुकाने और नए कर्ज लेने की चुनौती खड़ी हो गई थी। इस कर्ज को चुकाने के लिए VRL, Vedanta Ltd से डिविडेंड और ब्रांड फीस के जरिए पैसा लेता था। इसका मतलब यह हुआ कि लिस्टेड कंपनी Vedanta Ltd पर भी कर्ज का बोझ बढ़ता गया।

ICICI Securities के मुताबिक, VRL का बाहरी कर्ज FY22 में 9 अरब डॉलर से घटकर Q3FY26 तक 4.8 अरब डॉलर रह गया है। लेकिन इसी दौरान Vedanta Ltd का कर्ज काफी बढ़कर 20,600 करोड़ रुपये से 60,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यही वजह थी कि निवेशकों को लगने लगा था कि कंपनी के मुख्य बिजनेस से आने वाला पैसा समूह के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल हो रहा है।

डिमर्जर के बाद कैसे कम होगा कर्ज?

डिमर्जर के बाद Vedanta का कुल कर्ज अलग-अलग कंपनियों में बांट दिया जाएगा। इससे हर बिजनेस का कर्ज साफ दिखेगा और निवेशक बेहतर तरीके से जोखिम को समझ पाएंगे।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, FY26 के अंत तक Vedanta का कुल कर्ज करीब 53,400 करोड़ रुपये था। इसमें सबसे ज्यादा कर्ज Vedanta Aluminium पर रहेगा, जो करीब 32,700 करोड़ रुपये हो सकता है। इसके बाद Vedanta Power पर करीब 7,500 करोड़ रुपये और Vedanta Iron & Steel पर करीब 3,900 करोड़ रुपये का कर्ज होगा।

मूल Vedanta Ltd पर करीब 9,300 करोड़ रुपये का कर्ज रहेगा, जबकि Oil & Gas बिजनेस पूरी तरह कर्ज मुक्त रहेगा।

किस बिजनेस पर कितना दबाव रहेगा?

मोतीलाल ओसवाल ब्रोकरेज के मुताबिक, भले ही Aluminium बिजनेस पर सबसे ज्यादा कर्ज होगा, लेकिन उसकी कमाई मजबूत है, इसलिए वह इसे आसानी से संभाल सकता है। मूल Vedanta कंपनी का कर्ज कम रहेगा और उसका लीवरेज भी काफी कम होगा। Oil & Gas बिजनेस पूरी तरह बिना कर्ज के रहेगा, जबकि Iron & Steel बिजनेस पर भी बहुत कम दबाव रहेगा।

Mirae Asset Sharekhan की नेत्रा देशपांडे का कहना है कि कुल मिलाकर कंपनी का कर्ज अभी संभालने लायक दिखता है, क्योंकि पूरा लीवरेज करीब 0.91 गुना है। लेकिन असली चिंता Power बिजनेस में है, जहां कर्ज का स्तर करीब 4.7 गुना है, जो काफी ज्यादा माना जाता है और इसी पर सबसे ज्यादा नजर रखने की जरूरत है।

हालांकि थोड़ा पॉजिटिव भी है। अगर नए पावर परचेज एग्रीमेंट मिलते हैं और कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाती है, तो इस सेगमेंट की कमाई यानी EBITDA बेहतर हो सकती है। इससे आगे चलकर Vedanta अपने अलग-अलग बिजनेस को ज्यादा मजबूत और फोकस्ड तरीके से चला पाएगी।

आगे कंपनी की वित्तीय स्थिति कैसी रहेगी?

ICICI Securities का मानना है कि डिमर्जर के बाद Vedanta Ltd का कर्ज तेजी से कम हो सकता है। अनुमान है कि FY28 तक कंपनी का नेट कर्ज घटकर करीब 24,500 करोड़ रुपये रह जाएगा। इसके साथ ही कंपनी का लीवरेज रेशियो भी FY25 के 1.3 गुना से घटकर FY28 में 0.2 गुना तक आ सकता है। FY26 के अंत में यह करीब 0.95 गुना था। विश्लेषकों का कहना है कि अब VRL की कर्ज जरूरत भी कम हो गई है और उसे हर साल सिर्फ 1 से 1.2 अरब डॉलर की जरूरत होगी। इससे Vedanta Ltd पर डिविडेंड देने का दबाव भी कम हो सकता है।

डिमर्जर से निवेशकों को क्या फायदा होगा?

डिमर्जर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हर बिजनेस अलग-अलग कंपनी के रूप में काम करेगा। इससे निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा बिजनेस कितना मुनाफा कमा रहा है और उस पर कितना कर्ज है।

इसके अलावा अलग-अलग कंपनियां अपने सेक्टर के हिसाब से निवेश जुटा सकेंगी और अलग तरह के निवेशकों को आकर्षित कर पाएंगी। इसे ‘वैल्यू अनलॉक’ कहा जाता है, यानी कंपनी के अलग-अलग हिस्सों की असली कीमत सामने आना।

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First Published - May 5, 2026 | 2:18 PM IST

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