Small, Mid, LargeCap Funds: एक्टिव लार्जकैप फंड्स की पिछले दो सालों से जारी बेहतर प्रदर्शन की रफ्तार अब कमजोर पड़ती दिख रही है। 4 दिसंबर तक स्थिति यह है कि डायरेक्ट प्लान्स में शामिल हर तीन में से केवल एक फंड ही BSE 100 टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) से बेहतर रिटर्न दे पाया है। रेगुलर प्लान्स की हालत इससे भी कमजोर है, जहां सिर्फ दो स्कीम ही अपने बेंचमार्क से बेहतर साबित हो पाई हैं।
2024 और 2023 में एक्टिव फंड मैनेजर्स ने अच्छा प्रदर्शन किया था। 2024 में 86 प्रतिशत और 2023 में 73 प्रतिशत डायरेक्ट प्लान्स ने इंडेक्स को मात दी थी। हालांकि 2022 में यह अनुपात बहुत कम, सिर्फ 14 प्रतिशत रहा था। इन अच्छे सालों के बाद 2025 में अचानक दिख रही गिरावट संकेत देती है कि बाजार की दिशा और परिस्थितियां बदल गई हैं और फंड मैनेजर्स के लिए बेहतर रिटर्न निकालना अब कठिन हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदर्शन में आई गिरावट का एक बड़ा कारण बाजार की चाल में बदलाव है। पिछले कुछ सालों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी थी, जिससे लार्जकैप फंड्स को फायदा हुआ क्योंकि वे अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा इन दोनों श्रेणियों में रख सकते हैं। लेकिन 2025 में यह ट्रेंड पलट गया है। इस साल जहां निफ्टी 50 करीब 9.3 प्रतिशत ऊपर है, वहीं निफ्टी मिडकैप 100 सिर्फ 4.3 प्रतिशत बढ़ा है और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आठ प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। इस उलटफेर से लार्जकैप फंड्स की कुल रिटर्न क्षमता पर दबाव पड़ा है।
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मार्केट की चाल के अलावा, पोर्टफोलियो में समय पर बदलाव न करना भी कुछ स्कीम की कमजोरी का कारण माना जा रहा है। रुपी विद रुशभ इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर रुशभ देसाई के अनुसार कई फंड्स आउटपरफॉर्म करने वाले स्टॉक्स में पर्याप्त निवेश नहीं बढ़ा पाए, जबकि कुछ का पोर्टफोलियो समय के हिसाब से बदला नहीं गया। इसके साथ ही निवेश शैली का भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। 2023 और 2024 में “मोमेंटम” यानी जो स्टॉक तेजी में हों उन्हें खरीदने की रणनीति अच्छी चली थी। लेकिन 2025 में यह तरीका काम नहीं आया। हर एक्टिव फंड किसी न किसी स्टाइल- जैसे वैल्यू, ग्रोथ या मोमेंटम का पालन करता है। इस साल जिन फंड्स की स्टाइल मार्केट के हिसाब से ठीक नहीं बैठी, उनका प्रदर्शन कमजोर हो गया।
प्लान अहेड वेल्थ एडवाइज़र्स के फाउंडर & CEO विशाल धवन का कहना है कि लार्जकैप फंड्स को सबसे मुश्किल माना जाता है, क्योंकि इनमें निवेश करने के लिए कंपनियों की संख्या कम होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इन फंड्स में खर्च ज्यादा होता है और फंड मैनेजर को जोखिम कम रखने और कुछ पैसा कैश के रूप में बचाकर रखने की जरूरत होती है। इससे कुल रिटर्न घट जाता है।
बड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी पहले से ही सबको मिल जाती है, इसलिए ऐसा मौका कम मिलता है जब उनकी कीमत गलत हो और फंड मैनेजर फायदा उठा सके। इसके अलावा, नियम और बेंचमार्क की वजह से फंड मैनेजर बहुत अलग या हटकर निवेश नहीं कर पाते। इन्हीं कारणों से लार्जकैप फंड्स के लिए हर साल इंडेक्स से बेहतर रिटर्न देना बहुत मुश्किल हो जाता है।