facebookmetapixel
Advertisement
लाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौती

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में गिरावट से NSE ने गंवाया दुनिया का शीर्ष स्थान, खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान

Advertisement

NSE ने बी3 से डेरिवेटिव एक्सचेंज का पहला स्थान गंवाया, खुदरा निवेशकों की सुरक्षा के लिए नए नियमों और सुधारों पर जोर दिया।

Last Updated- July 30, 2025 | 10:03 PM IST
NSE
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने साल 2025 के पहले सात महीने में अनुबंधों की संख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज का दर्जा गंवा दिया और अब ब्राजील के बी 3 के हाथ यह तमगा आ गया है। एक्सचेंज के सीईओ आशिषकुमार चौहान ने बुधवार को तिमाही नतीजे को लेकर विश्लेषकों से बातचीत के दौरान ये बातें कही।

चौहान ने बी3 की बढ़त का श्रेय एनएसई की तुलना में उसके छोटे आकार के अनुबंधों को दिया और कहा कि अनुबंध के आकार की ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने में अहम भूमिका होती है। जुलाई में एनएसई पर रोजाना औसतन 11.27 करोड़ अनुबंधों का कारोबार हुआ।

व्यक्तिगत निवेशकों के बढ़ते नुकसान और घरेलू बाजार में वैश्विक ट्रेडिंग फर्मों के मोटे मुनाफे को लेकर बढ़ती चिंता के बीच एक्सचेंज ने दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज के दर्जा गंवाने को ज्यादा महत्त्व नहीं दिया। 

चौहान ने कहा, भारत सौदों के कारोबार के मामले में दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव बाज़ारों में से एक बना हुआ है। इससे हमारे बाजार की जीवंतता और सुलभता का पता चलता है। उन्होंने कहा, भारत में अनुबंधों का औसत आकार अपेक्षाकृत छोटा है। ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी हद तक इन्हीं अनुबंधों के कारण है। मूल्य के लिहाज से एनएसई का ऑप्शन प्रीमियम कारोबार अमेरिकी शेयरों के ऑप्शन कारोबार के पांचवें हिस्से से भी कम है।

सटोरिया गतिविधियों पर चिंता दूर करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल में सूचकांक के एफऐंडओ अनुबंधों के लिए न्यूनतम अनुबंध आकार को बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया है, जिससे लॉट का साइज बड़ा हो गया है। अतिरिक्त नियामकीय उपाय- जैसे एक्सपायरी के दिनों में कैलेंडर स्प्रेड लाभ खत्म करना और साप्ताहिक एक्सपायरी को सीमित करना- भी शुरू किए गए हैं। अब तक छह में से पांच सुधार लागू किए जा चुके हैं।

ये हस्तक्षेप उन आंकड़ों के बाद किए गए हैं, जो बताते हैं कि 90 फीसदी से अधिक खुदरा कारोबारी एफऐंडओ ट्रेडिंग में नुकसान उठाते हैं। इसका असर साफ दिखता है और डेरिवेटिव का ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने सर्वोच्च स्तर से करीब 30 फीसदी घट गया है। इसके अलावा, हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेड में भी कुछ नरमी की बात कही जा रही है। कुछ ट्रेडर जेन स्ट्रीट जैसी नियामकीय जांच के बीच प्रतीक्षा करो और देखो का दृष्टिकोण अपना रहे हैं।

एनएसई प्रबंधन ने निवेशकों की स्पष्ट पात्रता और प्रोडक्ट सस्टेनिबिलिटी मानदंडों की भी वकालत की ताकि अत्यधिक नुकसान से खुदरा प्रतिभागियों को बचाने में मदद मिले। उसने निवेशकों को ​शिक्षित करने के प्रयासों पर भी जोर दिया। 

एनएसई के एक अधिकारी ने कहा, निवेशकों की पात्रता और सस्टनैबिलिटी नियम लाने से जहां खुदरा निवेशकों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी, वहीं निवेशकों की ​शिक्षा में भी इजाफा होगा। प्रबंधन ने कहा कि वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता और टैरिफ बाजार के सेंटिमेंट के सतर्क रुख में योगदान कर रहे हैं।

एक्सचेंज ने वीआईएक्स फ्यूचर पेश करने के इरादे की घोषणा की और इस तरह वोलेटिलिटी से जुड़े सौदों की तरफ भी कदम बढ़ा दिए। चीफ बिजनेस अफसर श्रीराम कृष्णन ने कमोडिटी और पावर डेरिवेटिव में ज्यादा अनुबंधों की एनएसई की योजना पर कहा, वीआईएक्स फ्यूचर्स शुरू करने के संबंध में हमें फीडबैक मिला है। इस पर हम सही समय पर विचार कर सकते हैं। इस महीने एनएसई ने पावर डेरिवेटिव सेगमेंट में बिजली वायदा शुरू किया है। एक्सचेंज ने को-लोकेशन इन्फ्रा के विस्तार पर भी चर्चा की।

एनएसई का एकीकृत शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 14 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,924 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस अवधि में एक्सचेंज का परिचालन राजस्व घटकर 4,032.24 करोड़ रुपये रह गया जो पिछले साल इसी अवधि में 4,509.7 करोड़ रुपये था। एक्सचेंज के अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि को-लोकेशन और डार्क फाइबर से संबंधित दो निपटान आवेदन सेबी के पास विचाराधीन हैं।

NSE प्लेटफॉर्म पर निवेशकों के 23 करोड़ खाते

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) ने बुधवार को कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर निवेशकों के ट्रेडिंग खातों की संख्या 23 करोड़ के पार चली गई है। आखिरी 1 करोड़ खातों का जुड़ाव महज तीन महीने में हुआ है। इस बीच, एनएसई का कहना है कि पंजीकृत यूनिक निवेशकों की संख्या 28 जुलाई तक 11.8 करोड़ हो गई। एक निवेशक के पास एक से ज्यादा ब्रोकरों के खाते हो सकते हैं, ऐशे में उनकी ट्रेडिंग खातों की संख्या कई हो सकती है।

इसमें महाराष्ट्र का स्थान अग्रणी रहा, जहां निवेशकों के करीब 4 करोड़ खाते (17 फीसदी) हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (2.5 करोड़ यानी 11 फीसदी), गुजरात 2 करोड़ (9 फीसदी) खातों के साथ दूसरे स्थान है। पश्चिम बंगाल और राजस्थान में खातों की संख्या 1.3 करोड़ है यानी कुल का 6 फीसदी। इन  पांचों राज्यों में कुल निवेशक खातों का करीब आधा है और 10 अग्रणी राज्यों के पास राष्ट्रीय स्तर पर रहे खातों का करीब तीन चौथाई है। 

Advertisement
First Published - July 30, 2025 | 10:03 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement