अमेरिकी व्यापार शुल्क को लेकर नई चिंता और सूचकांक के बड़े शेयरों में गिरावट के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ने कारोबारी सत्र के दौरान नया रिकॉर्ड बनाया। लेकिन बाद में इसमें कुछ गिरावट आई और सत्र 78 अंक या 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ 26,250 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 322 अंक की गिरावट आई और यह 85,440 पर बंद हुआ। कुल बाजार पूंजीकरण 43,955 करोड़ रुपये घटकर 481 लाख करोड़ रुपये रह गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद कम न करने पर भारत के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की धमकी दोहराई जिससे भारत की टैरिफ संबंधी परेशानियां और बढ़ गईं।
पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी व्यापार शुल्क लगाया था। इसमें रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क शामिल है। अमेरिका ने भारत पर तेल खरीद के जरिए रूस के युद्ध में मदद करने का आरोप लगाया था। कंपनियों के घटते मुनाफे के अलावा व्यापार शुल्क को लेकर अनिश्चितता ने पिछले साल भारतीय शेयर बाजारों पर सबसे ज्यादा नकारात्मक असर डाला।
तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों इन्फोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक्नॉलजीज के शेयरों की कीमतों में गिरावट आई। आईटी कंपनियों को तीसरी तिमाही में भी अनिश्चित मांग का सामना करना पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार छह अग्रणी आईटी सेवा प्रदाताओं के राजस्व में तिमाही आधार पर 1 से 4 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है।
एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 2.4 फीसदी की गिरावट आई जिससे सेंसेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा और यह सेंसेक्स का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, घरेलू बाजारों ने 2026 के पहले सप्ताह की शुरुआत सतर्कता के साथ की। दुनिया भर में निवेशक अमेरिका के महत्त्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और फेड के अनुमानों का इंतजार कर रहे हैं जबकि बैंक ऑफ जापान ने अपने सख्त रुख को दोहराया है। आगे चलकर तीसरी तिमाही के नतीजे फोकस में रहेंगे और निकट भविष्य में बाजार रुझानों को दिशा देंगे, जिससे बाजार का मनोबल मध्यम रूप से सकारात्मक रहेगा।
बाजार में चढ़ने और गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और 1,672 शेयर चढ़े जबकि 2,602 में गिरावट आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 36 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे जबकि देसी संस्थानों ने 1,764 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अजित मिश्र ने कहा, हालिया तेजी के बाद बीच-बीच में हो रही मजबूती स्वस्थ प्रतीत होती है, जब तक कि बेंचमार्क अपने पिछले निचले स्तरों को बनाए रखने में सक्षम हों। निफ्टी के लिए समर्थन का तात्कालिक स्तर 26,000-26,200 के आसपास है। इसके निकट भविष्य में 26,500-26,700 दायरे की ओर बढ़ने की संभावना है। फिलहाल कारोबारियों को अनुकूल जोखिम-लाभ गणित को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सेक्टरों में गुणवत्ता वाले शेयरों में मौके तलाशने पर फोकस करना चाहिए।