facebookmetapixel
Advertisement
टाटा संस से क्यों विदा हो रहे एन. चंद्रशेखरन? पढ़ें बोर्ड को लिखा उनका पूरा पत्रTCS से टाटा संस की कमान तक: कैसा रहा समूह में एन. चंद्रशेखरन के 4 दशक का सफरChild Debit Card: बच्चों के लिए डेबिट कार्ड की सुविधा क्या है? जानिए इन पांच बैंकों में माइनर अकाउंट का पूरा प्रोसेसटाटा संस में बड़ा बदलाव: एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, फरवरी तक रहेंगे चेयरमैनबाजार खुलते ही 10% टूटा गोदरेज ग्रुप का ये स्टॉक, ब्रोकरेज हैं बुलिश, 59% तक रिटर्न संभवचंद्रशेखरन के हटने की खबरों का टाटा समूह के शेयरों पर दिखेगा असर! क्या कहते हैं जानकारटाटा संस में बड़ा बदलाव संभव! AGM से पहले चेयरमैन पद छोड़ सकते हैं एन चंद्रशेखरनGold silver price today: निवेश मांग व केंद्रीय बैंकों की खरीद से सोना ₹1,182 तेज, चांदी ₹2,314 चढ़ीStock Market Update: सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24300 के नीचे; TCS, टाइटन, टाटा स्टील टॉप लूजरStocks to Watch: टाटा मोटर्स, IRCTC, BEML समेत इन स्टॉक्स पर रखें नजर; खबरों के दम पर दिखेगा एक्शन

बड़ा IPO, बड़ी कमाई की गारंटी नहीं! निवेश से पहले जानिए वैल्यूएशन का गणित

Advertisement

NSE और जियो के मेगा IPO पर टिकी बाजार की नजर, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि निवेशकों के लिए सही प्राइसिंग ही सफलता की असली कुंजी है।

Last Updated- June 23, 2026 | 11:23 AM IST
IPO
प्रतीकात्मक फोटो

बड़ी और चर्चित कंपनियों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) हमेशा निवेशकों को तुरंत मुनाफा नहीं दिलाते। आंकड़े बताते हैं कि कई हाई-प्रोफाइल लिस्टिंग्स निवेशकों को शुरुआती दौर में आकर्षक रिटर्न देने में सफल नहीं रही हैं। एनॉलिस्ट मानते हैं कि किसी IPO को सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग गेन के लिहाज से सफल बनाने के लिए उसका मूल्यांकन (प्राइसिंग) निवेशकों के लिए आकर्षक होना चाहिए, ताकि उन्हें निवेश पर लाभ कमाने का अवसर मिल सके।

वन 97 कम्युनिकेशंस (पेटीएम की मूल कंपनी; इश्यू साइज: 18,300 करोड़ रुपये), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC; इश्यू साइज: 20,557.23 करोड़ रुपये) और हुंडई मोटर इंडिया (इश्यू साइज: 27,858.75 करोड़ रुपये) जैसी बड़ी कंपनियां विशाल आकार के IPO लेकर बाजार में आई थीं। हालांकि, इन कंपनियों के लिस्टिंग प्राइस और कुछ मामलों में मौजूदा बाजार मूल्य, खासकर पेटीएम के मामले में, अलग तस्वीर पेश करते हैं।

इनमें एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (इश्यू साइज: 11,604.73 करोड़ रुपये) का शेयर अपने 1,140 रुपये के इश्यू प्राइस से करीब 41 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा है। वहीं टाटा कैपिटल (इश्यू साइज: 15,511.87 करोड़ रुपये) का शेयर अपने 326 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस से लगभग 6 प्रतिशत ऊपर है।

स्वतंत्र मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बालिगा का कहना है, “निवेशकों के लिए IPO ऐसा अवसर होना चाहिए जहां उन्हें रिटर्न कमाने का मौका मिले। अगर ऐसा होता है तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और रिलायंस जियो इन्फोकॉम जैसी प्रस्तावित बड़े ऑफर्स को 3-4 गुना तक सब्सक्रिप्शन मिल सकता है। प्राइसिंग ऐसी होनी चाहिए कि निवेशकों के लिए भी कुछ बचा रहे। अगर ऐसा नहीं होता है तो IPO को सफल होना मुश्किल हो जाता है। पेटीएम ओवरप्राइसिंग का अच्छा उदाहरण है। हमने देखा कि लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा।”

Jio, NSE बाजार में दमदार दस्तक को तैयार

इस बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के नियंत्रण वाली देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (JPL) ने पिछले सप्ताह अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी लिस्टिंग के जरिए करीब 37,700 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

इससे पहले जून में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी करीब 30,000 करोड़ रुपये के अनुमानित IPO के लिए सेबी के पास DRHP दाखिल किया था। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर और रिसर्च हेड जी. चोकालिंगम का कहना है कि खुदरा निवेशकों को किसी IPO में निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन, लिस्टेड प्रतिस्पर्धियों की तुलना और संबंधित सेक्टर की संभावनाओं का आकलन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि IPO की कीमत ऐसी होनी चाहिए कि निवेशकों को भी लाभ का अवसर मिले। अगर इश्यू का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा या पूरी तरह से परफेक्ट प्राइसिंग पर किया जाता है, तो निवेशकों को वह आकर्षक नहीं लगेगा।

प्राइमरी मार्केट में फिर लौट सकती है रौनक

बालिगा का मानना है कि NSE और रिलायंस जियो जैसे बड़े इश्यू जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों के बावजूद प्राइमरी मार्केट में नई जान फूंक सकते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता जल्द या बाद में हो जाएगा, जो सेकंडरी मार्केट्स के लिए सकारात्मक संकेत होगा।

उन्होंने कहा कि इससे प्राइमरी मार्केट को भी समर्थन मिलेगा। अब सबसे अहम फैक्टर मानसून रहेगा। अगर मानसून उम्मीद से बेहतर रहता है तो बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।

FY26 में 112 कंपनियों ने जुटाए ₹1.79 लाख करोड़

PRIME डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 112 भारतीय कंपनियों ने मेनबोर्ड IPO के जरिए 1,78,963 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष में 78 IPO के जरिए जुटाए गए 1,62,387 करोड़ रुपये की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। चोकालिंगम भी मानते हैं कि NSE और रिलायंस जियो दोनों के IPO को निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिल सकता है और ये प्राथमिक बाजार की धारणा को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं, बशर्ते द्वितीयक बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहे।

उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां कंज्यूमर आधारित सेक्टर्स (स्टॉक एक्सचेंज और टेलीकॉम) में काम करती हैं और इनके बेहतर प्रदर्शन की संभावना है। हालांकि, काफी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि इन IPO की कीमत किस स्तर पर तय की जाती है।

Advertisement
First Published - June 23, 2026 | 11:23 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement