facebookmetapixel
2025 में भारत के शीर्ष 20 स्टार्टअप ने फंडिंग में बनाई बढ़त, पर छोटे स्टार्टअप को करना पड़ा संघर्षReliance Q3FY26 results: आय अनुमान से बेहतर, मुनाफा उम्मीद से कम; जियो ने दिखाई मजबूतीभारत-जापान ने शुरू किया AI संवाद, दोनों देशों के तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मिलेगी नई रफ्तारभारत अमेरिका से कर रहा बातचीत, चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंध से मिलेगी छूट: विदेश मंत्रालयIndia-EU FTA होगा अब तक का सबसे अहम समझौता, 27 जनवरी को वार्ता पूरी होने की उम्मीदStartup India के 10 साल: भारत का स्टार्टअप तंत्र अब भी खपत आधारित बना हुआ, आंकड़ों ने खोली सच्चाई‘स्टार्टअप इंडिया मिशन ने बदली भारत की तस्वीर’, प्रधानमंत्री मोदी बोले: यह एक बड़ी क्रांति हैसरकार की बड़ी कार्रवाई: 242 सट्टेबाजी और गेमिंग वेबसाइट ब्लॉकआंध्र प्रदेश बनेगा ग्रीन एनर्जी का ‘सऊदी अरब’, काकीनाडा में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा अमोनिया कॉम्प्लेक्सBMC Election: भाजपा के सामने सब पस्त, तीन दशक बाद शिवसेना का गढ़ ढहा

रिजर्व बैंक की पॉलिसी तय करेगी बैंक के शेयरों का रुख

Last Updated- December 06, 2022 | 12:02 AM IST

मंगलवार को रिजर्व बैंक साल 2008-09 के लिए अपनी मॉनेटरी और क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान करेगा और इस हफ्ते बैंक स्टॉक्स का रुख यही पॉलिसी तय करेगी।


बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक अहम दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। एक एनालिस्ट के मुताबिक दस दिन पहले ही बैंक ने पॉलिसी के ऐलान से पहले ही सीआरआर में इजाफे का ऐलान कर दिया था ऐसे में पॉलिसी में बैंक के रेपो रेट बढ़ाए जाने की संभावना कम ही दिखती है।


रिजर्व बैंक ने 18 अप्रैल को महंगाई की बढ़ती दर पर काबू पाने की गरज से सीआरआर की दरों में आधा फीसदी का इजाफा कर इसे आठ फीसदी कर दिया था। अब चूंकि महंगाई की दर में स्थिरता दिख रही है, लिहाजा रिजर्व बैंक रेपो रेट में इजाफा कर मांग में और कमी नहीं लाना चाहेगी।


कोटक सेक्योरिटीज के बैंकिंग एनालिस्ट सदय सिन्हा के मुताबिक पॉलिसी भाषा में जरूर कडी रहेगी लेकिन लागू करने के लिहाज से यानी ऑपरेशंस के नजर से बहुत कड़े कदम लिए जाने की संभावना कम दिखती है। रेपो रेट फिलहाल 7.75 फीसदी है, रेपो रेट वह दर होती है जिस दर पर बैंक अपनी शार्ट टर्म जरूरतें पूरी करने के लिए रिजर्व बैंक से पैसा लेते हैं।


भारत की महंगाई दर 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में 7.14 फीसदी से चढ़कर 7.33 फीसदी  हो गई है और यह रिजर्व बैंक के 4.5-5 फीसदी के लक्ष्य से काफी ज्यादा है।


महंगाई की दरों में यह इजाफा खासकर कच्चे लोहे और अन्य खनिजों की कीमतें बढ़ने की वजह से हो रहा है। एनालिस्टों का मानना है कि महंगाई की यह ऊंची दर सप्लाई साइड की दिक्कतों की वजह से है और इसके लिए सरकार ने पहले ही फिस्कल कदम उठा लिए हैं लिहाजा रिजर्व बैंक अपने रेट में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं करेगा।

First Published - April 28, 2008 | 2:05 PM IST

संबंधित पोस्ट