सॉफ्टबैंक के निवेश वाले होटल प्लेटफॉर्म ओयो ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए अक्टूबर 2021 में बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराए गए मसौदा पत्र (डीआरएचपी) में संशोधन के लिए आवेदन किया है। उसने आईपीओ की समय-सीमा के बारे में कुछ नहीं कहा है मगर सूत्रों का कहना है कि 2023 के आरंभ में आईपीओ लाने की उसकी योजना है। मगर योजना काफी हद तक बाजार के हाल पर निर्भर करेगी।
कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की, जिनमें वित्त वर्ष 2021-22 और वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही के नतीजे शामिल हैं। वित्तीय नतीजों से पता चलता है कि ओयो के राजस्व में सुधार हो रहा है। यात्रा कारोबार में सुधार होने से कंपनी का राजस्व बढ़ा है। साथ ही कंपनी घाटे पर काबू पाने में भी कामयाब रही है।
कंपनी ने कहा है कि वित वर्ष 2022 में उसका राजस्व साल भर पहले के मुकाबले 18 फीसदी बढ़कर 4,905 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2021 में कंपनी ने 4,157.3 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था। वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में कंपनी का राजस्व 1,504.5 करोड़ रुपये रहा। 2021-22 में ओयो का घाटा करीब आधा यानी 1,892.2 करोड़ रुपये ही रह गया। उससे एक साल पहले कंपनी को 3,382.5 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में कंपनी का घाटा 353.4 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी अपना एबिटा नुकसान भी कम करने में सफल रही। वित्त वर्ष 2020 के मुकाबले वित्त वर्ष 2021 में ओयो का एबिटा नुकसान 49 फीसदी कम हुआ। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का एबिटा 10.57 करोड़ रुपये बढ़ा है। हालांकि एबिटा के आंकड़ों में फेरबदल की बात कहकर कंपनी को ट्विटर पर जमकर लताड़ा गया है मगर ओयो के मुख्य वित्त अधिकारी अभिषेक गुप्ता ने एक ट्वीट में कहा, ‘एबिटा एकदम साफ दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में 10.57 करोड़ रुपये है, जो 7.26 करोड़ रुपये के समायोजित एबिटा से अधिक है।’
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन को सकल बुकिंग मूल्य (जीबीवी) में सुधार होने से रफ्तार मिली। तिमाही के दौरान प्रति होटल मासिक सकल बुकिंग मूल्य 47 फीसदी बढ़कर 3.25 लाख रुपये हो गया जो वित्त वर्ष 2022 में 2.21 लाख रुपये रहा था।
कंपनी ने कहा है कि घरेलू बाजार में यात्रा एवं आवाजाही पर प्रतिबंध खत्म होने से यात्रा मांग में सुधार हुआ है। वेकेशन होम कारोबार की मासिक सकल बुकिंग पहली तिमाही में बढ़कर 39,000 रुपये प्रति होम हो गई। जहां तक परिचालन लागत का सवाल है तो विपणन खर्च बढ़ने के बावजूद वित्त वर्ष 2022 में कुल लागत 6,984 करोड़ रुपये पर रही, जो वित्त वर्ष 2021 में 6,937 करोड़ रुपये थी।
ओयो ने पिछले साल अक्टूबर में अपने आईपीओ के लिए मसौदा जमा कराया था। कंपनी 7,000 करोड़ रुपये तक ताजा इक्विटी शेयर जारी करने और 1,430 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री करने का प्रस्ताव दिया है।