नोमूरा ने निफ्टी 50 का मार्च 2027 का अपना लक्ष्य बढ़ाकर 25,900 कर दिया है। इसके पीछे उसने मजबूत कॉरपोरेट आय और बाजार के आकर्षक मूल्यांकन का हवाला दिया है। यह इसके बावजूद है जब पश्चिम एशिया संघर्ष और तेल की बढ़ी कीमतों के जोखिम बरकरार हैं। उसने इससे पहले दिसंबर 2026 तक निफ्टी का लक्ष्य 24,900 तय किया था। अब नया लक्ष्य मौजूदा निफ्टी स्तर (लगभग 23,287) से 11 प्रतिशत अधिक है।
नोमूरा इंडिया के इक्विटी रणनीतिकार सायन मुखर्जी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में 256 कंपनियों का कुल कर बाद लाभ (पीएटी) सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा, जो आम अनुमानों से 12 प्रतिशत ज्यादा है। ऊर्जा क्षेत्र, जिसमें तेल और गैस, बिजली, कोयला और बिजली उपकरण कंपनियां शामिल हैं, ने आय वृद्धि में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान दिया। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
नोमूरा के अनुसार मजबूत आय को कर कटौती और अनुकूल मौद्रिक नीति के माहौल के बाद आर्थिक गतिविधियों में तेजी से सहारा मिला। फाइनैंस और कमोडिटीज को छोड़ दें तो बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। लेकिन एबिटा में 6 प्रतिशत की वृद्धि से मार्जिन पर कुछ दबाव का संकेत मिला। मजबूत तिमाही प्रदर्शन के बावजूद नोमूरा ने आय की आदे की संभावनाओं को ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताया, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष और कमोडिटी की बढ़ती कीमतें अब कॉरपोरेट मुनाफे पर असर डालने लगी हैं।
मुखर्जी ने कहा, ‘फरवरी 2026 के आखिर में पश्चिम एशिया युद्ध की शुरू होने के बाद से वित्त वर्ष 2027/28 के लिए कुल आय अनुमान को 4 प्रतिशत/1 प्रतिशत तक कम किया गया है।’
उन्होंने कहा कि आम राय के अनुसार वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान आय की सालाना वृद्धि दर 11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो मोटे तौर पर जीडीपी वृद्धि के अनुरूप है। इसका मतलब है कि आय-जीडीपी अनुपात में और विस्तार की गुंजाइश सीमित है। ब्रोकरेज ने आगाह किया कि अगर तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो और डाउनग्रेड की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।