निफ्टी 50 इस छोटे सप्ताह में आधा फीसदी की गिरावट के साथ 22,713 पर बंद हुआ। यह इसकी लगातार छठी साप्ताहिक गिरावट थी जो अक्टूबर 2025 के बाद से सबसे लंबी गिरावट है। पिछले छह सप्ताहों में सूचकांक में लगभग 11 फीसदी की गिरावट आई है, जो तेल कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों का कमजोर भरोसा बताता है।
अगर आने वाला सप्ताह भी गिरावट के साथ बंद होता है, तो गिरावट का यह सिलसिला मार्च 2020 के बाद से सबसे लंबा बन जाएगा। मार्च 2020 के समय कोविड के झटके के दौरान फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के आखिर तक सूचकांक में 33 फीसदी की बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन उसके अगले ही सप्ताह बाजार में 12 प्रतिशत से ज्यादा की जोरदार वापसी देखने को मिली। इस बार भी वैसी ही बहाली तब आएगी जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव पूरी तरह थम जाएगा।
वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के बीच सभी प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में बाजार दबदबे में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला। ज्यादातर सेक्टरों ने वित्त वर्ष 2025 में बेहतर प्रदर्शन किया था मगर वित्त वर्ष 2026 में उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई, जबकि जो सेक्टर पहले पीछे चल रहे थे, उन्होंने वापसी की। इससे बदलते रुझानों का पता चलता है। वित्त वर्ष 2025 में लगातार बढ़त वाले रक्षात्मक और दर-संवेदी सेक्टर जैसे वित्त, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स वित्त वर्ष 2026 में पिछड़ गए।
इसके विपरीत, ऑटोमोबाइल और कुछ चक्रीयता आधारित सेक्टरों ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। रियल एस्टेट क्षेत्र अपवाद रहा। यह क्षेत्र दोनों ही वित्त वर्षों में दबाव में रहा। ऊंची ब्याज दरों का मांग पर बुरा असर पड़ा है। ऊंची ब्याज दरों की वजह से खरीदने की क्षमता प्रभावित हुई और साथ ही नौकरी जाने की चिंताएं भी गहरा गईं। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में शेयरों की कीमतों में जबरदस्त उछाल के बाद उनके मूल्यांकन काफी ज्यादा बढ़ गए हैं जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है और रियल एस्टेट के शेयर निवेशकों की पसंद से हट गए हैं।
ऐसा लगता है कि बाजार नियामक सेबी भी आरबीआई के नक्शे कदम पर चल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि नियामक ने एक ऐसा व्हाट्सऐप चैनल शुरू करने की योजना बनाई है जिसका मकसद निवेशकों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। नियामक का मकसद निवेशकों के साथ बेहतर जुड़ाव के लिए एक इंटरेक्टिव प्लेटफॉर्म और एक सूचना केंद्र, दोनों का निर्माण करना है।
साथ ही सेबी बाजार इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थानों की भागीदारी में अपने संपर्क प्रसासों को भी मजबूत बना रहा है जिसमें निवेशक जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है और धोखाधड़ी पर लगाम के लिए तकनीकी तरीकों को लाया जा रहा है। अभी पिछले सप्ताह ही चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने भी बड़ी टेक कंपनियों से अपील की थी कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाले ‘फिनफ्लुएंसर्स’ की समस्या से निपटने के लिए और ज्यादा मिलकर काम करें।