बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है, लेकिन इसका असर मिड-कैप (mid-cap funds) और स्मॉल-कैप फंड्स (small-cap funds) में निवेशकों के उत्साह पर नहीं दिख रहा है। AMFI के आंकड़ों पर आधारित ICRA एनालिटिक्स की स्टडी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में इन दोनों कैटेगरी में करीब 2 करोड़ नए फोलियो जुड़े हैं। रिसर्च के अनुसार, SIP के जरिए अनुशासित निवेश, भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर भरोसा और बेहतर रिटर्न की उम्मीद ने रिटेल निवेशकों को इन फंड्स की ओर आकर्षित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2024 में मिड-कैप म्युचुअल फंड्स के फोलियो 1.53 करोड़ थे, जो जून 2026 तक बढ़कर 2.55 करोड़ हो गए। इसी अवधि में स्मॉल-कैप फंड्स के फोलियो 2.03 करोड़ से बढ़कर 2.87 करोड़ पहुंच गए। अब ये दोनों कैटेगरी मिलकर सभी ओपन-एंडेड इक्विटी फंड फोलियो का 32 फीसदी से ज्यादा हिस्सा बनाती हैं, जो रिटेल निवेशकों के बीच इनकी बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है।
ICRA एनालिटिक्स के अनुसार, मिड और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि की बड़ी वजह सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए अनुशासित निवेश और भारत की लंबी अवधि की विकास की कहानी पर उनका भरोसा हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, नियमित SIP निवेश ने निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे उन्हें ‘रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग’ का फायदा मिला है और साथ ही शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव व वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताओं का असर भी कम हुआ है।
निवेशकों की दिलचस्पी की एक और वजह यह सोच है कि आज की कई मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां भविष्य में लार्ज-कैप कंपनियां बन सकती हैं। इसलिए, बाजार में समय-समय पर आने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों को इन कंपनियों से लंबी अवधि में बेहतर मुनाफे की उम्मीद है।
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इन दोनों कैटेगरी में निवेश का फ्लो भी लगातार मजबूत बना हुआ है। पिछले एक साल के दौरान मिड-कैप फंड्स में हर महीने औसतन 4,777 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) आया, जबकि स्मॉल-कैप फंड्स में औसतन 4,776 करोड़ रुपये का मंथली निवेश हुआ। इससे पता चलता है कि बाजार के अलग-अलग दौर में भी निवेशकों की भागीदारी लगातार बनी हुई है।
इन फंड्स के बेहतर प्रदर्शन ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। 30 जून, 2026 तक, मिड-कैप फंड्स ने पिछले तीन साल में 18.76 फीसदी और पांच साल में 16.33 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया। वहीं, स्मॉल-कैप फंड्स का तीन साल का रिटर्न 17.68 फीसदी और पांच साल का 17.06 फीसदी रहा। इसके मुकाबले, लार्ज-कैप फंड्स ने तीन साल में 10.65 फीसदी और पांच साल में 10.22 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया।
ICRA एनालिटिक्स में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केट डेटा के हेड अश्विनी कुमार ने कहा, “ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है। यह भारत की लंबी अवधि की विकास की संभावनाओं पर निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।”
उनके मुताबिक, SIP के बढ़ते चलन ने निवेशकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया है। इससे अनुशासित निवेश को बढ़ावा मिला है और निवेशक बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। साथ ही, कई निवेशक अब भी मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों को भविष्य की बड़ी ग्रोथ कंपनियों में निवेश का अवसर मान रहे हैं।
निवेशकों का बढ़ता भरोसा ‘एसेट्स अंडर मैनेजमेंट’ (AUM) में भी दिखता है। मिड-कैप फंड्स का AUM जून 2025 में 4.32 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर जून 2026 में 5.06 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि इसी दौरान स्मॉल-कैप फंड का AUM 3.55 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.30 लाख करोड़ रुपये हो गया।
ICRA एनालिटिक्स ने कहा कि AUM में इस बढ़ोतरी में बाजार में तेजी (मार्केट अप्रिसिएशन) का भी योगदान रहा, लेकिन लगातार आ रहा नया निवेश (फ्रेश इन्वेस्टमेंट) इसकी सबसे बड़ी वजह रहा।
हालांकि, रिसर्च हाउस ने निवेशकों को वैल्यूएशन से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर कंपनियों की आय (अर्निंग्स) बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं बढ़ी, तो ऊंचे वैल्यूएशन की वजह से बाजार में करेक्शन आ सकता है, उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और भविष्य में रिटर्न अपेक्षाकृत कम रह सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर निवेशकों को मिलने वाला रिटर्न वैल्यूएशन में और बढ़ोतरी के बजाय कंपनियों की आय में लगातार होने वाली वृद्धि पर ज्यादा निर्भर करेगा।
एक्सपर्ट्स की राय है कि मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में निवेश बढ़ाने का फैसला केवल हालिया शानदार रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए। निवेश हमेशा आपकी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश अवधि और कुल एसेट एलोकेशन के आधार पर होना चाहिए।
मनीफ्रंट के एमडी और सीईओ मोहित गांग का कहना है कि जिन निवेशकों का नजरिया कम से कम 5-7 साल का है, वे मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि, सिर्फ हाल के बेहतर प्रदर्शन के आधार पर इन फंड्स में एक्सपोजर बढ़ाना सही रणनीति नहीं होगी।
उनके मुताबिक, लार्ज कैप फंड्स की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले होते हैं और बाजार में गिरावट के दौरान इनमें नुकसान भी ज्यादा हो सकता है।
वहीं, द वेल्थ कंपनी म्युचुअल फंड की CIO-इक्विटी, अपर्णा शंकर ने कहा, “मिडकैप और स्मॉलकैप फंड लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन का अच्छा माध्यम बन सकते हैं। लेकिन इनमें निवेश का फैसला हमेशा निवेशक की रिस्क प्रोफाइल, निवेश अवधि और एसेट एलोकेशन को ध्यान में रखकर करना चाहिए।”
उनका सुझाव है कि 5-7 साल या उससे ज्यादा की निवेश अवधि वाले निवेशक एकमुश्त निवेश करने के बजाय SIP या चरणबद्ध (स्टैगर्ड) तरीके से निवेश बढ़ाएं। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और उभरती कंपनियों की लॉन्ग टर्म ग्रोथ का फायदा उठाने का बेहतर अवसर मिलता है।