ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं को कोविड के बाद म्युचुअल फंडों की पहुंच में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा फायदा मिला था। लेकिन वित्त वर्ष 2026 में उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में उनकी हिस्सेदारी में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के अनुसार ऐक्टिव इक्विटी फंडों का हिस्सा मार्च 2025 के 44.8 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 43.4 प्रतिशत रह गया। इस साल हाइब्रिड योजनाओं और पैसिव फंडों का हिस्सा बढ़ा, जबकि डेट फंडों में गिरावट का सिलसिला बरकरार रहा।
वित्त वर्ष 2020 के बाद से सक्रिय इक्विटी की तेजी में यह ठहराव शेयर बाजारों के सुस्त प्रदर्शन और कीमती धातुओं के भाव में भारी उछाल के बीच आया। वित्त वर्ष 2026 में शानदार निवेश दर्ज करने वाले गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) ने उद्योग की एयूएम में पैसिव फंडों की हिस्सेदारी को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 19 प्रतिशत से ज्यादा करने में मदद की। पैसिव एयूएम में इस बढ़ोतरी को मार्क-टू-मार्केट (एमटीएम) से हुए मुनाफे से भी मदद मिली।
इक्विटी योजनाओं के लिए वित्त वर्ष 2026 के दौरान एयूएम में 8.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी मुख्य रूप से एसआईपी के जरिए आए निवेश से हुई। एकमुश्त निवेश कमजोर रहा और एमटीएम से होने वाला फायदा भी सीमित था। एसआईपी से आई पूंजी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में लगाया जाता है। एसआईपी निवेश वित्त वर्ष 2025 के लगभग 2.9 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।