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LIC के मार्जिन में तगड़ा सुधार, शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ा; ब्रोकर्स ने दी ‘BUY’ रेटिंग

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ज्यादा मार्जिन वाली नॉन-पार पॉलिसियों पर फोकस बढ़ाने से LIC का चौथी तिमाही का प्रदर्शन शानदार रहा। नतीजतन, ब्रोकरेज फर्मों ने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है

Last Updated- May 23, 2026 | 9:10 AM IST
LIC
फोटो क्रेडिट: Shutterstock

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पिछले कुछ वर्षों से अपनी पॉलिसी रणनीति को धीरे-धीरे ज्यादा सम-एश्योर्ड वाली, नॉन-पार्टिसिपेटिंग (नॉन-पार) पॉलिसियों की ओर ले जा रही है। विश्लेषकों ने कहा कि इस बदलाव का असर मार्च तिमाही में दिखा। लिहाजा, बीमा कंपनी को नए बिजनेस के मूल्य (वीएनबी) मार्जिन में जबरदस्त सुधार दर्ज करने में मदद मिली। इसके बाद  ब्रोकरेज फर्मों ने कमाई के अनुमान और कीमत लक्ष्य बढ़ा दिए। शुक्रवार को एलआईसी का शेयर बीएसई पर 4.7 प्रतिशत तक की इंट्राडे तेजी के बाद आ​खिर में 1.58 प्रतिशत बढ़कर 813.35 रुपये पर बंद हुआ।  

एमके ग्लोबल के अनुसार एलआईसी का चौथी तिमाही का बीएनबी मार्जिन 25.7 प्रतिशत रहा, जो उसके अनुमान 20.5 प्रतिशत से काफी बेहतर है। ब्रोकरेज फर्म ने वीएनबी मार्जिन अनुमानों को 200-240 आधार अंक तक बढ़ा दिया है, जिससे वित्त वर्ष 2027 और 2028 के दौरान वीएनबी अनुमानों में 15-16 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। 

जेएम फाइनैंशियल ने वित्त वर्ष 2026 में मार्जिन में 360 आधार अंक की बढ़ोतरी का मुख्य श्रेय अनुकूल पॉलिसी मिश्रण को दिया है, जिसकी कुछ हद तक भरपाई परिचालन अनुमानों में हुए बदलावों से हो गई।

प्रबंधन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नॉन-पार सेगमेंट एलआईसी का सबसे अधिक लाभदायक व्यवसाय बना रहा और उसने वित्त वर्ष 2026 में कुल वीएनबी में 53 प्रतिशत का योगदान दिया। जेएम फाइनैंशियल का अनुमान है कि व्यक्तिगत नॉन-पार बिजनेस के लिए मार्जिन 49 प्रतिशत, पार बिजनेस के लिए 12 प्रतिशत और ग्रुप बिजनेस के लिए 11 प्रतिशत रहेगा।  

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने कहा कि एलआईसी को अपने बड़े एजेंसी नेटवर्क से लगातार फायदा मिल रहा है और साथ ही वह नए सरेंडर नियमों के अनुरूप अपनी योजनाओं में भी बदलाव कर रही है। इक्विटी बाजारों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट के बीच चौथी तिमाही में एलआईसी की ईवी में 6.2 प्रतिशत की कमी आई। ईवी 7.89 लाख करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर सिर्फ 1.6 प्रतिशत ज्यादा थी और सितंबर 2024 के स्तर से नीचे रही।

एमके ने कहा कि ईवी पर नकारात्मक आर्थिक बदलावों और परसिस्टेंसी व खर्चों से जुड़ी परिचालन धारणाओं में बदलावों का असर पड़ा। जेएम फाइनैं​शियल को उम्मीद है कि एलआईसी एम्बेडेड वैल्यू पर 11–12 प्रतिशत का परिचालन प्रतिफल देगी। उसने अनुमान लगाया कि वित्त वर्ष 2026-वित्त वर्ष 2028 के दौरान ईवी 14 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़ेगी।

जेएम फाइनैं​शियल ने अपनी ‘खरीदें’ रेटिंग बरकरार रखी और कीमत लक्ष्य को 888 से बढ़ाकर 960 रुपये कर दिया है।

एमके ग्लोबल ने एपीई के अनुमानों को 4-5 प्रतिशत बढ़ाया और मार्च 2027 के लिए अपने कीमत लक्ष्य को 1,000 से बढ़ाकर 1,100 रुपये कर दिया, जबकि खरीदें रेटिंग को बरकरार रखा।

एचडीएफसी सिक्यो. ने ‘जोड़ें’ रेटिंग बरकरार रखी है और अपने कीमत लक्ष्य को संशोधित कर 1,110 रुपये कर दिया है।

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First Published - May 23, 2026 | 9:10 AM IST

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