एशिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का डिजिटल वेंचर JIO प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का IPO अब सरकारी नियमों में बदलाव की देरी की वजह से तय समय से पीछे खिसक सकता है। कंपनी को सरकार की तरफ से औपचारिक ऐलान का इंतजार है, ताकि वो बैंकरों को काम पर लगा सके और IPO का ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर सके। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के सूत्रों के मुताबिक, अब अप्रैल से पहले ये काम पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन सब कुछ सरकार की नोटिफिकेशन पर टिका हुआ है।
बता दें कि JIO भारत का सबसे बड़ा वायरलेस ऑपरेटर है और ये IPO रिलायंस की किसी बड़ी यूनिट का करीब 20 साल बाद पहला बड़ा लिस्टिंग होगा। ये भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है, जो निवेशकों को पिछले दस साल की एक बड़ी ग्रोथ स्टोरी में हिस्सा लेने का मौका देगा।
मुकेश अंबानी ने अगस्त में कहा था कि JIO को 2026 की पहली छमाही में स्टॉक मार्केट में लिस्ट करने का प्लान है। ये बात उन्होंने 2019 में भी कही थी, तब पांच साल का टाइमलाइन दिया गया था। निवेश बैंकरों ने कंपनी की वैल्यू 170 अरब डॉलर तक बताई है। अगर ऊपरी वैल्यू पर बात बने, तो न्यूनतम हिस्सेदारी बेचकर भी करीब 4.3 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं। ये रकम JIO को भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार कर देगी। याद रहे, 2020 में मेटा प्लेटफॉर्म्स और अल्फाबेट जैसी कंपनियों ने JIO में 10 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया था।
अभी चर्चाएं चल रही हैं और IPO का समय, साइज सब बदल सकता है। रिलायंस ने इस पर तुरंत कुछ नहीं कहा, जबकि वित्त मंत्रालय के लोगों से संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला।
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SEBI ने सितंबर में नियमों में बदलाव को मंजूरी दी थी। अब 5 ट्रिलियन रुपये यानी करीब 55 अरब डॉलर से ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियों को IPO में सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचनी होगी, पहले ये 5 फीसदी था। ये बदलाव JIO और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया जैसी बड़ी लिस्टिंग्स के लिए रास्ता साफ कर सकता है। लेकिन अभी सरकार की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। क्या वजह है देरी की, ये साफ नहीं है और ऐसा नहीं लगता कि ये सिर्फ JIO को निशाना बना रही है। अगला कदम वित्त मंत्रालय का है, जो इन बदलावों को शामिल करके ऑफिशियल गजट में छापेगा।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, KS लीगल एंड एसोसिएट्स की मैनेजिंग पार्टनर सोनम चंदवानी कहती हैं कि ये प्रक्रिया कुछ महीनों तक चल सकती है, सरकार की चर्चाओं पर निर्भर करता है। जबकि सरवाांक एसोसिएट्स की फाउंडर अंकिता सिंह का कहना है कि रेगुलेटर ने तो रास्ता बना दिया, लेकिन इंडस्ट्री को गजट नोटिफिकेशन का इंतजार है। उन्हें लगता है कि 2026 की पहली छमाही में ये आ जाएगा।
उधर, NSE भी अपना IPO प्लान कर रहा है, जिसमें 2.5 अरब डॉलर तक जुटाने की तैयारी है। पिछले महीने उसने बैंकों से पिच मंगाई थी। JIO और NSE के ये दो IPO भारतीय बाजार को बड़ा बूस्ट दे सकते हैं। 2026 की शुरुआत में लिस्टिंग्स कम रही हैं, जबकि पिछले दो सालों में रिकॉर्ड फंड जुटाया गया था।
गौरतलब है कि JIO अंबानी के साम्राज्य का एक चमकदार हिस्सा है, जो डिजिटल दुनिया में भारत की बड़ी कहानी बयां करता है। लेकिन सरकारी प्रक्रिया की रफ्तार पर सब कुछ टिका है।