facebookmetapixel
Advertisement
ओपनएआई का AI एजेंट टेस्टिंग में बेकाबू, हैकिंग घटना ने साइबर सुरक्षा पर बढ़ाई चिंताAI स्किल्स को IT कंपनियों में सबसे ज्यादा तवज्जो, कैंपस भर्ती और वेतन रणनीति में बड़ा बदलावRBI Economy Report: विदेशी निवेश में लौटा भरोसा, मजबूत मांग से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहाराट्रंप के जेनेरिक दवा शुल्क प्रस्ताव से भारतीय फार्मा पर दबाव, उत्पादन अमेरिका ले जाना आसान नहींMutual Fund लाइसेंस की कतार बढ़ी, तीन नए आवेदक; SEBI की मंजूरी का इंतजार कर रहीं 9 कंपनियांकमजोर डॉलर से सोने में जोरदार तेजी, दो हफ्ते के हाई पर पहुंचा भाव 3 अगस्त से बदलेगा शेयर बाजार का क्लोजिंग सिस्टम, Closing Auction के लिए एक्सचेंज तैयारQ1 नतीजों के बाद Bandhan Bank पर दबाव, शेयर 17% टूटे; कमजोर RoA गाइडेंस से निवेशकों को झटकापश्चिम एशिया संकट गहराया, कच्चा तेल 2% की बढ़त के साथ छह हफ्ते के हाई पर दो महीने के निचले स्तर के करीब रुपया, डॉलर के मुकाबले 96.57 के स्तर पर फिसला

IPO बाजार का धमाका! उतार-चढ़ाव के बावजूद 1.8 लाख करोड़ जुटाए, लगातार दूसरे साल रिकॉर्ड बनाकर सबको चौंकाया

Advertisement

सेकेंडरी बाजार की कमजोरी के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में IPO बाजार ने रिकॉर्ड 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाकर मजबूत प्रदर्शन किया।

Last Updated- April 01, 2026 | 8:04 AM IST
IPO
Representative image

सेकंडरी बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत के प्राथमिक बाजार ने वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड उच्च स्तर को छुआ। बीते वित्त वर्ष 2026 के दौरान मुख्य श्रेणी के आईपीओ के माध्यम से 112 कंपनियों ने 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो वित्त वर्ष 2025 में 78 आईपीओ
से जुटाए गए 1.62 लाख करोड़ रुपये के पिछले रिकॉर्ड से अधिक हैं।

यह पहली बार है जब आईपीओ से धन जुटाना लगातार दो वर्षों तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा है। यह पुराने रुझान से भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस रुझान के हिसाब से एक मजबूत वर्ष के बाद आम तौर पर गतिविधियां थम जाती हैं। यह उपलब्धि पिछली तिमाही में गतिविधियों में भारी गिरावट के बावजूद हासिल हुई। पिछली तिमाही में केवल 18,772 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि निफ्टी में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई।

भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली ने बाजार में निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। लेकिन घरेलू संस्थागत निवेश में मजबूती ने बाजार की गिरावट को कम करने में मदद की, हालांकि साल के अंत तक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।

वित्त वर्ष 2026 के दौरान घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों ने वैश्विक सूचकांकों के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया। निफ्टी 50 में 5.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में 7.1 प्रतिशत की गिरावट आई। यह वित्त वर्ष 2020 के बाद उनका सबसे खराब प्रदर्शन था। बाजार की कमजोर धारणा के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड धन जुटाने से घरेलू पूंजी बाजारों की बढ़ती मजबूती और विदेशी पूंजी पर निर्भरता में कमी जाहिर होती है।

फिर भी लिस्टिंग के दौरान कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों का उत्साह फीका कर दिया और चयन पर अधिक जोर देने की रणनीति को बढ़ावा दिया। एक साल पहले के 30 प्रतिशत की तुलना में औसत लिस्टिंग लाभ घटकर 8 प्रतिशत रह गया। इसमें भी केवल 31 प्रतिशत आईपीओ ने शुरुआत के समय 10 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया।

हालांकि कई कंपनियों ने अपनी आईपीओ योजनाओं को आगे बढ़ा दिया है लेकिन निवेशकों की भागीदारी कम हो गई है। प्राइम डेटाबेस के अनुसार 10 गुना से अधिक आवेदन वाले आईपीओ की संख्या वित्त वर्ष 2025 में 72 प्रतिशत थी जो घटकर केवल 56 फीसदी रह गई। रिटेल भागीदारी भी कमजोर हुई है, जिसमें औसत आवेदन एक साल पहले के 21.3 लाख से घटकर 13 लाख रह गए।

हालांकि आईपीओ की संख्या मजबूत बनी हुई है, लेकिन सेकंडरी बाजार में बिकवाली को देखते हुए अल्पावधि में गतिविधियां सुस्त रहने की उम्मीद है। प्राइम डेटाबेस के अनुसार 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही 144 कंपनियों को सेबी से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 1.37 लाख करोड़ रुपये के 63 आईपीओ प्रस्ताव मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इक्विरस कैपिटल में प्रबंध निदेशक और निवेश बैंकिंग प्रमुख, भावेश शाह ने कहा, ‘घरेलू आईपीओ बाजार दशकों में देखे गए सबसे मजबूत बैकलॉग में से एक के साथ वित्त वर्ष 2027 में प्रवेश कर रहा है। नया वित्त वर्ष मात्रा से अधिक गुणवत्ता, आकार और मूल्य अनुशासन के बारे में
ज्यादा होगा।’

प्राइम डेटाबेस के प्रणव हल्दिया ने कहा कि कंपनियां अस्थिर या प्रतिकूल बाजार हालात में आईपीओ लाने के बजाय उन्हें स्थगित करने को तैयार हैं। इससे उनके ‘प्रतीक्षा करो और देखो’ दृष्टिकोण का संकेत मिलता है।

Advertisement
First Published - April 1, 2026 | 8:04 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement