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घरेलू बचत का रुख बदला: बैंक जमाओं के मुकाबले शेयरों और म्युचुअल फंडों में बढ़ रहा निवेश

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बैंक जमा में निवेशित हर 100 रुपये की बचत पर परिवारों ने वित्त वर्ष 2024-25 में म्युचुअल फंडों और शेयरों में 45.2 रुपये का निवेश किया

Last Updated- November 30, 2025 | 10:55 PM IST
Stock Market outlook
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बैंक जमाओं के सापेक्ष शेयर बाजारों और म्युचुअल फंडों में घरेलू बचत का निवेश पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया है। बैंक जमा में निवेशित हर 100 रुपये की बचत पर परिवारों ने वित्त वर्ष 2024-25 में म्युचुअल फंडों और शेयरों में 45.2 रुपये का निवेश किया। यह जानकारी बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के नवंबर बुलेटिन के आंकड़ों के विश्लेषण से मिलती है। इसका उल्लेख अगस्त के पहले के प्रकाशनों में भी किया गया था।

वित्त वर्ष 2024 में यह अनुपात 21.2 रुपये था। अक्टूबर 2025 तक म्युचुअल फंडों के प्रबंधन वाली कुल परिसंपत्तियां 79.9 लाख करोड़ रुपये थीं। ये 241.7 लाख करोड़ रुपये की कुल बैंकिंग जमा राशि का 33 फीसदी है। मार्च 2025 तक बैंक जमाओं में म्युचुअल फंडों की हिस्सेदारी लगभग 29 फीसदी थी।

जमाओं की कम ब्याज दरें, वित्तीय साक्षरता में वृद्धि और फिनटेक प्लेटफार्मों के माध्यम से निवेश में आसानी के कारण म्युचुअल फंडों और शेयर बाजार में ज्यादा रकम का निवेश हुआ है। इस बदलाव के पीछे यही कारण बताए जा रहे हैं।

पीएल कैपिटल के शोध निदेशक (संस्थागत इक्विटीज़) अमनीश अग्रवाल के अनुसार, पिछले एक साल में बाजारों के स्थिर रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों का इक्विटी बाजार में निवेश जारी रहने की संभावना है। खुदरा निवेशक अब अस्थिरता के पहले संकेत पर बाजार से पीछे नहीं हटते। इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान पर सैन्य कार्रवाई और टैरिफ़ को लेकर अनिश्चितता के कारण बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्युचुअल फंडों में जारी निवेश से यह बात पता चलती है। 

म्युचुअल फंडों और इक्विटी निवेश के अनुपात में सुधार बैंक जमाओं में निवेश में सालाना आधार पर गिरावट के कारण भी हुआ। वित्त वर्ष 24 में 14.23 लाख करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 25 में बैंक जमाओं में निवेश घटकर 11.86 लाख करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 24 में 2.39 लाख करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 25 में म्युचुअल फंडों को 4.66 लाख करोड़ रुपये मिले। वित्त वर्ष 24 में 0.29 लाख करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 25 में शेयर बाजार में निवेश (इक्विटी) 0.74 लाख करोड़ रुपये था। म्युचुअल फंडों और इक्विटी का मूल्य पिछले वित्त वर्ष की तुलना में दोगुना हो गया। यह काफी हद तक म्युचुअल फंडों की वजह से बढ़ा और वित्त वर्ष 24 में बड़े आधार पर करीब दोगुना हो गया। छोटे आधार पर इसी अवधि की तुलना में शेयर बाजार में (इक्विटी) प्रत्यक्ष निवेश 153 फीसदी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025 में वित्तीय परिसंपत्ति निवेश में म्युचुअल फंडों और इक्विटी का हिस्सा 15.1 फीसदी रहा जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 8.7 फीसदी था।

अगस्त 2025 के आरबीआई बुलेटिन में प्रकाशित मयंक गुप्ता, सत्यम कुमार, अभिनंदन बोराड़, सुब्रत कुमार सीट और प्रतिभा केडिया व अन्य के एक अध्ययन ‘इक्विटी म्युचुअल फंड्स : ट्रांसफॉर्मिंग इंडियाज सेविंग्स लैंडस्केप’ के अनुसार लंबे समय तक फिक्स्ड डिपॉजिट की लगातार कम दरों के कारण लोग अंततः उन परिसंपत्ति वर्गों की तलाश कर सकते हैं जहां ज्यादा रिटर्न मिलता है। लिहाजा इससे इक्विटी एमएफ में निवेश बढ़ता है।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की भारित औसत घरेलू सावधि जमा दरें रुपये के लिहाज से सितंबर 2025 में 23 महीनों में सबसे कम (6.82 फीसदी) रही। अभी नई सावधि जमाओं की दर 5.6 फीसदी है।

आरबीआई बुलेटिन अध्ययन में कहा गया है, भारत में म्युचुअल फंडों ने काफी लोकप्रियता हासिल की है, जिसका श्रेय आय के स्तर में वृद्धि, वित्तीय साक्षरता में इजाफा, युवाओं की बढ़ती आबादी, डिजिटल तंत्र और इंटरनेट कनेक्टिविटी में व्यापक वृद्धि के अलावा एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के नेतृत्व में विपणन पहल की सफलता को दिया जा सकता है, जिससे भरोसे बना है।

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First Published - November 30, 2025 | 10:55 PM IST

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