इलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल जनवरी के बाद पहली बार वैश्विक इक्विटी फंडों का ज्यादा निवेश निकला है जबकि आया कम है। इसकी वजह भू-राजनीतिक तनाव है जिसने निवेशकों के मनोबल पर असर डाला। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया में लड़ाई का 5वां हफ्ता शुरू हो गया है और इस कारण सभी बाजारों से बड़े पैमाने पर निवेश की निकासी हो रही है।
उभरते बाजारों यानी ईएम से रकम की निकासी जारी रही, हालांकि बिकवाली की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई। पिछले हफ्ते ग्लोबल उभरते बाजार (जीईएम) के फंडों से 73 करोड़ डॉलर बाहर निकले जबकि उससे पिछले हफ्ते यह आंकड़ा 2.7 अरब डॉलर था। इस तरह पिछले तीन हफ्तों में कुल मिलाकर 3.7 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी है।
उभरते बाजारों में भारत सबसे ज्यादा प्रभावित बाजार के तौर पर उभरा है। पिछले हफ्ते देश से 97 करोड़ डॉलर और पिछले तीन हफ्तों में 3.7 अरब डॉलर की निकासी देखी गई, जो घरेलू इक्विटी पर लगातार दबाव का संकेत है। शुक्रवार को बेंचमार्क निफ़्टी 2.1 फीसदी गिर गया। इसमें यह लगातार 5वीं साप्ताहिक गिरावट और अगस्त 2025 के बाद की गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला है।
भारत केंद्रित फंडों में भी लगातार निवेश निकासी हुई है। विगत दो हफ्तों में 2.4 अरब डॉलर की निकासी के बाद पिछले वाले सप्ताह 81.4 करोड़ डॉलर की निकासी हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि जहाँ लॉन्ग ओनली निवेश पहले से ही कमजोर था, वहीं अब एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) अतिरिक्त बिकवाली का मुख्य ज़रिया बन गए हैं, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका में रहने वाले निवेशक हैं।
इसके विपरीत, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य एशियाई बाजारों से अपेक्षाकृत कम पूंजी की निकासी हुई जबकि चीन में 1.4 अरब डॉलर का पूंजी निवेश आया।
इस बीच, अमेरिकी इक्विटी फंडों से 27 अरब डॉलर निकले। इस निकासी ने पिछले हफ्ते आया 50 अरब डॉलर का निवेश पलट दिया। निवेश आने का कारण भूराजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद थी। ज्यादा बिकवाली घरेलू निवेशकों ने की, जिन्होंने एक हफ्ते पहले 50 अरब डॉलर का निवेश करने के बाद अब 24 अरब डॉलर निकाल लिए। विदेशी निवेशकों ने लगातार तीसरे हफ्ते अपना निवेश घटाना जारी रखा और 3.5 अरब डॉलर की निकासी की।
जोखिम से दूर रहने की भावना जिंसों तक पहुंच गई है। इनमें पारंपरिक सुरक्षित निवेश ठिकाने भी शामिल हैं। गोल्ड फंडों से 7 अरब डॉलर की निकासी हुई, जो अक्टूबर 2025 के बाद से सबसे ज्यादा है। इससे पता चलता है कि रक्षात्मक आवंटन के बजाय यह मजबूरी में निकाला गया निवेश था। कमोडिटी इक्विटी फंडों से 4.7 अरब डॉलर की रिकॉर्ड निकासी दर्ज की गई।
हालांकि, सिल्वर फंडों ने इस रुझान को उलट दिया। कीमतों में भारी गिरावट के बाद इनमें 48 करोड़ डॉलर की मामूली निवेश आया। इलारा ने बताया कि निवेश का मौजूदा पैटर्न 2021 के मध्य जैसा ही है।