पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने से कच्चे तेल का बाजार दबाव में आ गया है। अमेरिका ने ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है और ईरानी जहाजों पर प्रतिबंध भी फिर से लागू कर दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने साफ कहा है कि जब तक उसकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस रास्ते को कारोबारी जहाजों के लिए असुरक्षित बताया है। इन घटनाओं के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का कहना है कि अगर अगले कुछ हफ्तों में होर्मुज के रास्ते सामान्य नहीं हुए तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। एजेंसी के मुताबिक जापान और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित एशियाई देशों के साथ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे आयात पर निर्भर देशों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी तरफ यूक्रेन के लगातार हमलों की वजह से रूस की रिफाइनरियों में कच्चे तेल का प्रोसेसिंग 2005 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके बाद रूस ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल के निर्यात पर रोक लगा दी है। इससे वैश्विक बाजार में डीजल की उपलब्धता और कम हो गई है। अब कई देश अमेरिका, भारत और पश्चिम एशिया से डीजल खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन तेजी से बढ़े हैं।
चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि मौजूदा संकट ऐसे समय आया है जब दुनिया में पहले से ही तेल का भंडार काफी कम है। ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है तो कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में पहले के मुकाबले ज्यादा तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि वर्ष 2026 में करीब 90 करोड़ बैरल की अतिरिक्त मांग बनी रहेगी, जिसमें होर्मुज संकट और पहले हुए अस्थायी युद्धविराम का असर पहले से शामिल है।
ब्रोकरेज का मानना है कि डीजल की कमी और ऊंचे रिफाइनिंग मार्जिन का सबसे ज्यादा फायदा डीजल उत्पादन पर ज्यादा निर्भर कंपनियों को मिल सकता है। इस वजह से एमआरपीएल (MRPL) और चेन्नई पेट्रोलियम (CPCL) की कमाई बेहतर रहने की संभावना है।
चॉइस ब्रोकिंग ने कहा कि जून के दूसरे पखवाड़े में होर्मुज से तेल की आवाजाही उनकी पहले की उम्मीद से बेहतर रही है। पहले अनुमान था कि सामान्य स्थिति लौटने में करीब तीन महीने लग सकते हैं, लेकिन अब बहाली उससे पहले भी हो सकती है। इसी आधार पर ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि अगर मौजूदा नाकेबंदी तीन से चार हफ्ते से ज्यादा समय तक जारी रहती है तो तेल की कीमतें इस अनुमान से ऊपर जा सकती हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)