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सोना, चांदी और शेयर: मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट ने बताया- निवेश का नया फॉर्मूला

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पैसिव निवेश, SIP, सोना-चांदी और मिड-स्मॉलकैप पर मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट की आसान सलाह

Last Updated- December 12, 2025 | 1:08 PM IST
Passive Investment

Passive Investment: भारत में अब लोग धीरे-धीरे पैसिव निवेश को पसंद करने लगे हैं। मोतीलाल ओसवाल कंपनी के अधिकारी प्रतीक ओसवाल कहते हैं कि आने वाले समय में पैसिव फंड आम लोगों के निवेश का बड़ा हिस्सा बन जाएंगे। लोगों को ऐसे निवेश पसंद आ रहे हैं जिनमें खर्च कम हो, सब कुछ साफ हो और नियम पहले से तय हों। शेयर, फैक्टर फंड और सोना जैसे विकल्प बढ़ने से पैसिव फंड अब लोगों के निवेश पोर्टफोलियो की मजबूत नींव बनते जा रहे हैं।

2026 में भी Active और Passive Investment दोनों की भूमिका रहेगी अहम

प्रतीक ओसवाल कहते हैं कि पैसिव और एक्टिव दोनों तरह के फंड जरूरी हैं, लेकिन पैसिव फंड में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। पैसिव फंड में निवेश करने वाले को साफ पता होता है कि उसका पैसा कहां और कैसे लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि 2026 में बड़े बाजार वाले इंडेक्स फंड, फैक्टर फंड और अलग-अलग एसेट में निवेश करने वाले फंड्स में ज्यादा पैसा आ सकता है।

पैसिव फंड्स में SIP के जरिए लंबी अवधि का निवेश बढ़ा

उन्होंने कहा कि अब लोग पैसिव फंड में थोड़े समय के फायदे के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक पैसा बनाने के लिए निवेश कर रहे हैं। खासकर SIP के जरिए पैसिव फंड में पैसा लगाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोगों का भरोसा ऐसे निवेश पर बढ़ा है, जिनमें नियम पहले से तय होते हैं, और यही वजह है कि आगे भी पैसिव निवेश बढ़ता रहेगा।

यह भी पढ़ें: 150 नई स्कीमें! आखिर क्यों पैसिव फंड्स पर इतने आक्रामक हो गए म्युचुअल फंड हाउस?

सोना-चांदी का सही मिश्रण पोर्टफोलियो को मजबूत बनाता है

प्रतीक ओसवाल कहते हैं कि निवेश पोर्टफोलियो में सोना और चांदी दोनों रखना फायदेमंद होता है। उनका कहना है कि जब दुनिया में हालात ठीक नहीं होते, तब सोना सुरक्षा देता है। वहीं चांदी की मांग फैक्ट्रियों और उद्योगों में होती है, जिससे आगे चलकर अच्छा फायदा हो सकता है। इसी कारण वे निवेश में 70 फीसदी सोना और 30 फीसदी चांदी रखने की सलाह देते हैं, ताकि जोखिम और कमाई का संतुलन बना रहे।

मिड और स्मॉलकैप में लंबी अवधि के मौके बेहतर

उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों के शेयर आगे भी ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखाएंगे, लेकिन उनमें कमाई बहुत तेज नहीं बढ़ सकती। इसके मुकाबले मिड और छोटी कंपनियों में लंबे समय के लिए ज्यादा अच्छे मौके हैं। उनका कहना है कि आज मिड और छोटी कंपनियां पहले से ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद हो गई हैं, क्योंकि उनका कामकाज सुधरा है और उनमें बड़े निवेशक भी पैसा लगा रहे हैं। इसलिए निवेशकों को धीरे-धीरे इन कंपनियों में निवेश बढ़ाना चाहिए।

नए निवेशकों के लिए सरल रणनीति की सलाह

2026 में जो लोग निवेश शुरू करेंगे, उनके लिए प्रतीक ओसवाल की सलाह है कि वे अलग-अलग जगह पैसा लगाकर शुरुआत करें। उनका कहना है कि निफ्टी 500 जैसे इंडेक्स फंड नए निवेशकों के लिए अच्छे होते हैं, क्योंकि इनमें पूरे बाजार का फायदा मिलता है। इसके साथ थोड़ा पैसा फैक्टर आधारित फंड्स में भी लगाया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि SIP के जरिए नियमित निवेश करें और बाजार के छोटे उतार-चढ़ाव से डरें नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पैसिव निवेश रिटायरमेंट और लंबे समय तक पैसा बनाने में बहुत काम आएगा।

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First Published - December 12, 2025 | 1:08 PM IST

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