सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) द्वारा प्रबंधित परिसंपत्तियां जनवरी 2026 में देखे गए रिकॉर्ड स्तरों पर वापस आ गई हैं। इन दोनों कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी के कारण बुधवार को प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में करीब 6 फीसदी की उछाल देखने को मिली। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की वेबसाइट पर फंड हाउसों द्वारा जारी किए गए एयूएम आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि बुधवार को गोल्ड ईटीएफ का एयूएम करीब 6 फीसदी बढ़कर 1.9 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि सिल्वर ईटीएफ का एयूएम करीब 7 फीसदी बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये के आसपास रहा।
13 मई तक सोने और चांदी के ईटीएफ का कुल एयूएम लगभग 2.9 लाख करोड़ रुपये था, जो इस महीने अब तक लगभग 12 फीसदी बढ़ा है। यह एयूएम जनवरी 2026 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है, जब यह करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। बुधवार को एयूएम में हुई बढ़ोतरी (जो काफी हद तक सोने और चांदी के ईटीएफ की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के अनुरूप थी) यह बताती है कि ईटीएफ काउंटरों में ट्रेडिंग गतिविधि बढ़ने के बावजूद इस श्रेणी में शुद्ध निवेश या निकासी काफी कम रही।
इस श्रेणी में सबसे बड़े निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ में बुधवार को एनएसई पर लगभग 1,362 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जबकि इसका एक महीने का रोजाना औसत लगभग 350 करोड़ रुपये है। निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ के मामले में लगभग 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की यूनिट का लेन-देन हुआ।
आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज़ी, कमोडिटी ईटीएफ निवेशकों के लिए राहत की बात है। इनमें से कई निवेशकों ने 2025 के आखिरी कुछ महीनों और जनवरी 2026 में पहली बार इन योजनाओं में निवेश किया था, जब इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतें अपने चरम पर थीं।