आईटी कंपनियों के लिए नया वित्त वर्ष भी ज्यादा राहत लेकर आता नहीं दिख रहा है। दुनियाभर में कंपनियां अभी भी खर्च सोच-समझकर कर रही हैं। नए प्रोजेक्ट्स पर फैसले लेने में देरी हो रही है और हर निवेश का फायदा पहले से ज्यादा परखा जा रहा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने भी आईटी कंपनियों के कारोबार का तरीका बदलना शुरू कर दिया है। ऐसे माहौल में इस तिमाही में भी आईटी सेक्टर की ग्रोथ धीमी रहने की आशंका है।
ब्रोकरेज फर्म Emkay की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में ज्यादातर आईटी कंपनियों की कमाई और ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, कुछ चुनिंदा मिडकैप आईटी कंपनियां बाकी सेक्टर के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
Emkay का कहना है कि बड़ी कंपनियों के ग्राहक अभी भी गैर-जरूरी प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने से बच रहे हैं। कई कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने में ज्यादा समय ले रही हैं। साथ ही हर प्रोजेक्ट में निवेश से पहले यह देखा जा रहा है कि उससे कितना फायदा होगा। यही वजह है कि आईटी कंपनियों की ग्रोथ की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, AI का असर भी तेजी से दिखने लगा है। अब कंपनियां चाहती हैं कि कम खर्च में ज्यादा काम हो। इससे आईटी सर्विस कंपनियों पर कीमतें कम रखने और ज्यादा वैल्यू देने का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा कई कंपनियां एक से ज्यादा वेंडर रखने के बजाय कम कंपनियों के साथ काम करना चाहती हैं।
Emkay का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों में Infosys और Tech Mahindra इस तिमाही में बाकी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। Infosys को हाल में किए गए अधिग्रहण का फायदा मिलने की उम्मीद है, जबकि Tech Mahindra की ग्रोथ भी अपेक्षाकृत बेहतर रह सकती है। वहीं TCS, HCLTech और Wipro जैसी कंपनियों में ग्रोथ सीमित रहने का अनुमान है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, मिडकैप आईटी कंपनियों में Hexaware, Persistent Systems, Mphasis, eClerx, Firstsource Solutions और Coforge बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इनमें Coforge की ग्रोथ सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है, क्योंकि कंपनी को हाल में हुए अधिग्रहण का फायदा मिलेगा।
पिछले छह महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 5% कमजोर हुआ है। इसका फायदा आईटी कंपनियों को मिल सकता है क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा डॉलर में आता है। रुपये में बदलने पर उनकी आय बढ़ सकती है और इससे मुनाफे को भी सहारा मिलेगा। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ रुपये की कमजोरी से तस्वीर पूरी तरह नहीं बदलेगी, क्योंकि मांग में सुस्ती और प्रोजेक्ट्स में देरी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में Nifty IT Index ने बाजार के मुकाबले करीब 16% और पिछले छह महीनों में करीब 22% कमजोर प्रदर्शन किया है। इसकी वजह आईटी सेक्टर की धीमी ग्रोथ, AI की वजह से बदलता बिजनेस मॉडल और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। इन्हीं कारणों से Emkay ने बड़ी आईटी कंपनियों के वैल्यूएशन मल्टीपल में करीब 10% की कटौती की है। हालांकि किसी भी कंपनी की रेटिंग में बदलाव नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर से अभी भी अच्छी मांग बनी हुई है, हालांकि यहां भी थोड़ी नरमी दिख रही है। दूसरी तरफ ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी दबाव में हैं। वहीं रिटेल, हेल्थकेयर, हाईटेक और कम्युनिकेशन जैसे सेक्टरों में मांग मिली-जुली बनी हुई है।
Emkay का कहना है कि इस तिमाही में कंपनियों के मार्जिन अलग-अलग रह सकते हैं। कहीं वेतन बढ़ोतरी का असर होगा तो कहीं रुपये की कमजोरी और बड़े प्रोजेक्ट्स से फायदा मिलेगा। भर्ती के मोर्चे पर भी ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। कंपनियां फिलहाल बड़े पैमाने पर नई भर्ती करने के बजाय AI और नई तकनीक से जुड़ी स्किल वाले कर्मचारियों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय आईटी इंडस्ट्री इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कंपनियां अब सिर्फ पारंपरिक आईटी सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। उनका फोकस AI, क्लाउड, डेटा और इंजीनियरिंग जैसी नई तकनीकों पर बढ़ रहा है। फिलहाल AI से कमाई में बड़ी छलांग नहीं लग रही, लेकिन इससे काम तेजी से हो रहा है। यही वजह है कि ग्राहक कीमतें कम करने की मांग कर रहे हैं और आईटी कंपनियों के पुराने बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब आईटी कंपनियां सिर्फ नई तकनीक हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि नए बाजारों में पहुंच बनाने, बड़े ग्राहक जोड़ने और AI जैसी नई क्षमताएं मजबूत करने के लिए भी अधिग्रहण कर रही हैं। हाल के महीनों में कई कंपनियों ने इस दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। Emkay का मानना है कि आने वाले समय में आईटी सेक्टर में यह रुझान और तेज हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)