Categories: बाजार

नए मानकों से बढ़ेगी डब्बा ट्रेडिंग

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 2:31 AM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए मार्जिन मानक इक्विटी में डब्बा ट्रेडिंग को प्रोत्साहित कर सकते हैं। यह एक ऐसा बाजार है जिसमें कारोबार एक्सचेंजों द्वारा निर्धारित कीमत पर होता है, लेकिन इसका निपटान नकदी बाजार में होता है।
बाजार कारोबारियों का कहना है कि वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) अनुबंध आकारों में वृद्घि और ऊंचे मार्जिन की जरूरत ने निवेशकों को पिछले साल इस प्लेटफॉर्म की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया, और अग्रिम मार्जिन के लिए जरूरत ज्यादा तादाद में निवेशकों को इस सेगमेंट की ओर आकर्षित कर सकती है।
एक वरिष्ठ ब्रोकिंग अधिकारी ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, ‘डब्बा ट्रेडिंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। टर्मिनल जारी किए जा रहे हैं, मोबाइल ऐप बनाए गए हैं और मांग पूरी करने के लिए लोग को नियुक्त किया जा रहा है। कई अधिकृत लोग इस प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर सकते हैं।’
स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी चूड़ीवाला सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक आलोक चूड़ीवाला ने कहा, ‘हम औपचारिक बाजारों तक निवेशकों की पहुंच जितनी कठिन बनाते जाएंगे, उतना ही वे डब्बा ट्रेडिंग जैसे विकल्पों की ओर आकर्षित होंगे।’सेबी के ताजा नियम में कहा गया है कि शेयरों तक पहुंच के लिए ब्रोकरों को पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) देने के बजाय, निवेशकों को अब अपने शेयर ब्रोकर के पक्ष में डिपोजिटरी के पास सीधे तौर पर गिरवी रखने में मदद मिलेगी।
प्रभुदास लीलाधर के मुख्य कार्याधिकारी (रिटेल) संदीप राइचुरा ने कहा, ‘अग्रिम तौर पर मार्जिन चुकाने की जरूरत लोगों को स्वतंत्र तौर पर कारोबार से रोकेगी। यह कई लोगों के लिए डब्बा ट्रेडिंग करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं हो सकता है।’
विश्लेषकों का कहना है कि डब्बा ट्रेडिंग मुख्य तौर पर काले धन को वैध में तब्दील करने या ऐसे बाजार में पैसा लगाने के लिए है जिसमें व्यक्ति को अपने नाम का इस्तेमाल न करना पड़े। निवेशकों को ऐसे सौदों के लिए पैन नंबर देने की जरूरत नहीं होती है और न ही केवाईसी, या किसी तरह की जांच की जरूरत होती है। इसमें किसी तरह का एसटीटी, जिंस लेनदेन कर या आयकर चुकाने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि इसमें निपटान नकदी में और खासकर साप्ताहिक आधार पर होता है।

नई मार्जिन प्लेज प्रक्रिया हुई मजबूत
डिपॉजिटरीज और क्लियरिंग कंपनियों ने सोमवार को कहा कि 1 सितंबर से लागू नई मार्जिन गिरवी प्रक्रिया अब काफी हद तक मजबूत हो गई है।
सीडीएसएल और एनएसडीएल तथा क्लियरिंग कंपनियों – आईसीसीएल एवं एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, ‘मार्जिन प्लेज/रीप्लेज की बड़ी मात्रा 1 सितंबर 2020 से सतत रूप से चल रही है। नई मार्जिन प्लेज प्रक्रिया अब काफी हद तक मजबूत हो गई है।’ शेयरों प्लेजिंग/रीप्लेजिंग के संबंध में नया नियम 1 सितंबर से लागू है। इस संबंध में समय-सीमा बढ़ाने के लिए बाजार नियामक सेबी द्वारा शेयर ब्रोकरों के संगठन एम्फी का अनुरोध ठुकराए जाने के बाद इसे लागू कर दिया गया है। एजेंसियां

First Published : September 7, 2020 | 11:42 PM IST