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क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार: निफ्टी में 10% गिरावट का खतरा, ICICI सिक्योरिटीज की चेतावनी

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खाड़ी तनाव के बीच महंगे तेल से बाजार पर दबाव; ब्रोकरेज का अनुमान-निफ्टी 22,660 तक फिसल सकता है

Last Updated- March 09, 2026 | 2:32 PM IST
NSE Nifty Outlook

Nifty Outlook: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं तो निफ्टी 50 इंडेक्स में करीब 10% तक की गिरावट आ सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि आम तौर पर जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर से ऊपर जाती है, तो शेयर बाजार पर दबाव बढ़ने लगता है और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक अभी तेल की कीमतों में जो तेजी दिख रही है, वह खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता की वजह से है।

Nifty 22,660 तक गिर सकता है

ब्रोकरेज के अनुसार अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो निफ्टी अपने संघर्ष से पहले के स्तर 25,178 से लगभग 10% गिरकर करीब 22,660 तक आ सकता है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में भारी उछाल देखा गया। इंट्राडे कारोबार में यह करीब 25% बढ़कर 116.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह तेजी उस समय आई जब ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होरमुज बंद होने से कई तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन घटा दिया। हालांकि दोपहर तक तेल की कीमत कुछ कम होकर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई थी।

यह भी पढ़ें: क्या बाजार में शुरू हो रहा है बेयर फेज? निफ्टी 19,000 तक गिरने की आशंका

तेल उत्पादक देशों ने घटाया उत्पादन

रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल उत्पादक देशों ने एहतियात के तौर पर तेल उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। कुवैत, जो ओपेक का पांचवां सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, उसने अपने उत्पादन और रिफाइनरी आउटपुट में कटौती की घोषणा की है। वहीं इराक, जो ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, उसने अपने तीन प्रमुख तेल क्षेत्रों से उत्पादन लगभग 70% घटाकर करीब 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने भी कहा है कि भंडारण की जगह सीमित होने की वजह से वह समुद्र में तेल उत्पादन को सावधानी के साथ नियंत्रित कर रहा है।

तेल महंगा होने से बाजार पर दबाव क्यों

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर शेयर बाजार पर कई तरह से पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है, कंपनियों की लागत बढ़ती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80–85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 50% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होरमुज के रास्ते आती है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है और आर्थिक वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है।

अर्थव्यवस्था पर भी असर

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल तेल आयात बिल करीब 122 अरब डॉलर था, जो देश की जीडीपी का लगभग 3.1% है। अगर कच्चे तेल की कीमत 10% बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल करीब 12 अरब डॉलर और बढ़ सकता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ने और भुगतान संतुलन पर दबाव आने की आशंका रहती है।

यह पढ़ें: IOC, BPCL, HPCL: कच्चे तेल के 100 डॉलर पार पहुंचने से OMC कंपनियों पर दबाव, UBS ने घटाई रेटिंग

ब्रोकरेज का कहना है कि तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों का असर महंगाई पर पड़ सकता है। इससे लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो सकती है और कंपनियों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

किन सेक्टरों पर ज्यादा दबाव

ब्रोकरेज का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा समय तक ऊंची रहती हैं तो कई सेक्टरों पर दबाव बढ़ सकता है। इनमें ऑटोमोबाइल, एविएशन, तेल विपणन कंपनियां, सिटी गैस कंपनियां, बिल्डिंग मटेरियल और उपभोक्ता से जुड़े सेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों में कारोबार करने वाली निर्यात आधारित कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर बढ़ जाता है, लेकिन ऐसे समय में निवेश के मौके भी बन सकते हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं, जिससे निफ्टी पर दबाव आया था। लेकिन उसके बाद 2023 में शेयर बाजार में बड़ी तेजी देखने को मिली थी।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

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First Published - March 9, 2026 | 2:32 PM IST

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