बीएसई के सर्कुलर में खासकर बीएसई ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्घ प्रतिभूतियों के लिए नया निगरानी ढांचा ‘एड-ऑन प्राइस बैंड फ्रेमवर्क’ पेश किया गया है, जिससे बाजारों, विशेषकर मिड-कैप, और स्मॉल-कैप के लिए धारणा प्रभावित हुई है। सर्कुलर में कहा गया है कि चयनित शेयर अतिरिक्त कीमत सीमाओं, जैसे साप्ताहिक, मासिक और तिमाही कीमत सीमाओं के दायरे में आएंगे। केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी ने निकिता वशिष्ठ के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि कमजोर कंपनियों के शेयरों में गिरावट बनी रह सकती है, लेकिन अपेक्षाकृत बड़ी और मजबूत कंपनियों में फिर से निवेशक आकर्षित होंगे। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
नए निगरानी ढांचे से संबंधित बीएसई सर्कुलर पर आपका क्या नजरिया है? इससे निवेश समुदाय में चिंता पहले ही बढ़ गई है।
निवेशकों को इस सब के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए। बीएसई ने मिड- कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों से संबंधित नियम सख्त बनाए थे, क्योंकि कारोबारी की बढ़ती गतिविधि की वजह से बाजार में इनमें तेजी आ रही थी। मेरा मानना है कि वास्तविक निवेशक के बजाय कारोबारियों की ओर से ज्यादा गतिविधि हो रही है और यह निश्चित था कि कुछ बदलाव होना था। यह वही था, जो बीएसई ने किया है। उसने ऐसी ट्रेडिंग गतिविधि पर सख्ती बढ़ाई है।
इसलिए, क्या इन उपायों का कारोबार और कुल कारोबारी गतिविधि या ज्यादा प्रभाव पड़ा है?
मेरा मानना है कि इन बदलावों का बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ऐसी स्थिति में, गिरावट ज्यादा हो रही है, क्योंकि ज्यादा संख्या में कारोबारी इन शेयरों में बड़ी खरीदारी करते हैं। इसलिए उन्होंने बीएसई द्वारा नए विनियमन की पृष्ठïभूमि में बिकवाली की है। मिड-कैप और स्मॉल-कैप से हमेशा ऐसे जोखिम जुड़े होते हैं, क्योंकि बड़ी तादाद में ये शेयर निवेशकों को निकलने का अवसर देने के लिए पर्याप्त तरलता से जुड़े हो सकते हैं, नहीं भी हो सकते हैं।
यदि बीएसई इस सर्कुलर को वापस लेता है तो क्या गिरावट जारी रहेगी? मूल्यांकन मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंटों के लिए चिंता का मुख्य विषय हैं?
जहां तक आगामी राह का सवाल है, तो कमजोर कंपनियों के शेयरों में गिरावट बनी रह सकती है, लेकिन बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयरों में निवेशक दिलचस्पी फिर से लौटेगी।
वृहद परिदृश्य से, क्या दीर्घावधि निवेशकों को अभी बने रहना चाहिए या यह समय मुनाफावसूली करने या बाजारों से दूर रहने का है?
बाजारों से परहेज करना अच्छा आइडिया नहीं है। आपको निवेश से जुड़े रहना चाहिए और अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों के चयन पर ध्यान देना चाहए और कमजोर से निकलना होगा।