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बाजार में 2 फीसदी की गिरावट

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:17 AM IST

भारतीय बाजारों मेंं शुक्रवार को दो फीसदी की गिरावट दर्ज हुई और इस तरह से उसने पिछले चार कारोबारी सत्रों में दर्ज हुई बढ़त का आधा गंवा दिया क्योंंकि निवेशकों ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों और विभिन्न राज्यों की तरफ से लगाई गई पाबंदी की पृष्ठभूमि में आर्थिक परिदृश्य का दोबारा आकलन किया।
बेंचमार्क सेंसेक्स 983 अंक यानी 1.98 फीसदी की गिरावट के साथ 48,782 अंक पर बंद हुआ, जो तीन हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट है। निफ्टी 264 अंक यानी 1.7 फीसदी फिसलकर 14,631 अंक पर बंद हुआ।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुक्रवार को 3,465 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, वहींं देसी निवेशकों ने 1,419 करोड़ रुपये की खरीदारी के जरिए सहारा दिया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 3,86,452 नए मामले दर्ज किए गए। इस महामारी से मौत का आंकड़ा पिछले 24 घंटे में 3,498 रहा। भारत के स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है क्योंकि अस्पतालों में बिस्तरों व ऑक्सीजन की
कमी बनी हुई है। साथ ही लोग मदद के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।
इस बीच, कई राज्यों में 18 से 45 साल के लोगोंं को टीकाकरण में शामिल किए जाने की योजना से पहले ही टीके खत्म हो रहे हैं। महामारी से लडऩे के लिए राज्य सरकारों ने या तो लॉकडाउन का विस्तार कर दिया है या फिर नई पाबंदी लगा दी है।
वेलेंटिस एडवाइजर्स के संस्थापक ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने कहा, कई राज्यों में लॉकडाउन के साथ अर्थव्यवस्था एक बार फिर धीमी गति से आगे बढऩा शुरू करेगी। सितंबर 2020 से हमने लगातार आय व अर्थव्यवस्था में सुधार देखा है। अब छह महीने में पहली बार हम इसमें डाउनग्रेडिंग देख रहे हैं। किसी ने भी दूसरी लहर के इतने गंभीर रहने की भविष्यवाणी की थी।
बैंंकिंग शेयरों ने बाजार में गिरावट की अगुआई की और एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और कोटक महिंद्रा बैंक ने सेंसेक्स के नुकसान में दो तिहाई का योगदान दिया। इक्विनॉमिक्स के संस्थापक  जी चोकालिंगम ने कहा, लॉकडाउन में विस्तार से फंसे कर्ज में और बढ़ोतरी हो सकती है। क्रेडिट की रफ्तार में बढ़ोतरी की उम्मीद थी। लेकिन ताजा पाबंदी से क्रेडिट की मांग में कमी देखने को मिलेगी।
विश्लेषकों ने कहा कि बाजार में आई गिरावट इसलिए ज्यादा स्पष्ट दिखी क्योंकि डेरिवेटिव की एक्सपायरी के बीच पिछले चार कारोबारी सत्रों में काफी तेजी देखने को मिली थी। इस हफ्ते शुक्रवार के कारोबारी सत्र से पहले सेंसेक्स 1,887 अंक यानी 4 फीसदी चढ़ा था। आईसीआईसीआई बैंक की मजबूत आय के कारण बाजार की बढ़त को मदद मिली थी।
ज्यादातर एशियाई बाजार शुक्रवार को कमजोर रहे क्योंंकि चीन ने अपनी कुछ तकनीकी फर्मों पर लगाम कसा है। अमेरिकी फ्यूचर मार्केट के भी वॉल स्ट्रीट पर नकारात्मक खुलने के संकेत मिले। इस महीने अमेरिकी सूचकांकों ने मजबूूत आर्थिक आंकड़ों के दम पर रिकॉर्ड ऊंचाई को छू लिया था।
इंडेक्स में सबसे ज्यादा भारांक वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर तेल की कीमतों में कमजोरी के बीच 1.4 फीसदी टूट गया। कच्चे तेल की कीमतें घटीं क्योंकि ट्रेडरों ने कोविड के बढ़ते मामलों के बीच मांग में कमी का अनुमान जताया।
बाजार में गिरने व चढऩे वालों का अनुपात नकारात्मक रहा। 1,630 शेयरों में गिरावट आई जबकि 1,320 शेयरों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। तीन को छोड़कर सेंसेक्स की सभी कंपनियों में गिरावट दर्ज हुई। सरकारी कंपनी ओएनजीसी व सेल में क्रमश: 4.3 फीसदी व 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

First Published : April 30, 2021 | 11:55 PM IST