प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
देशभर में फिल्म और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के सब्सक्राइबर आधार को बनाए रखने पर जोर देने के साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों की डबिंग अधिकार हासिल करने की दर में अगले साल 10 प्रतिशत तक वृद्धि होने की उम्मीद है। दक्षिण की फिल्में उत्कृष्ट कहानी व प्रतिभा के बल पर अपने मुख्य बाजारों से इतर दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। इसलिए इसके प्रति रुझान बढ़ रहा है।
एक फिल्म निर्माता ने कहा कि एसएस राजामौलि की आरआरआर, ऋषभ शेट्टी की कांतारा, एक्शन-थ्रिलर फिल्म श्रृंखला केजीएफ, अल्लू अर्जुन की पुष्पा: द राइज और पुष्पा 2: द रूल जैसी प्रमुख दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए हिंदी-डब राइट्स उनकी मूल रूप से रिलीज की गई भाषाओं के जितने ही ऊंचे हैं। निर्माता उम्मीद जता रहे हैं कि मशहूर अभिनेताओं की देश भर में रिलीज होने वाली दक्षिण की प्रमुख फिल्मों के अलावा पुष्पा 2: द रूल की पिछले साल रिलीज के बाद सामान्य डबिंग राइट्स तर्कसंगत हो जाएंगे, जो काफी बढ़ गए थे।
पहले, दक्षिण की फिल्मों के डबिंग राइट्स को ‘लाइब्रेरी फिलर’ या चैनलों को चौबीसों घंटे चलाने के लिए हासिल की गई सस्ती सामग्री माना जाता था। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दो से तीन वर्षों के दौरान दक्षिण की फिल्मों ने हिंदी भाषी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली और ये अब मुख्यधारा की सामग्री बन गई हैं। उद्योग विशेषज्ञ के अनुसार, परिणामस्वरूप साउथ फिल्मों के लिए डबिंग राइट्स में 2026 में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
डेलॉइट इंडिया में मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के लीडर और पार्टनर चंद्रशेखर मंथा ने कहा कि उद्योग के अनुमान बताते हैं कि डब किए गए स्ट्रीमिंग और सैटेलाइट राइट्स की बिक्री से राजस्व पिछले सात वर्षों में दोगुने से अधिक हो गया है। दक्षिण के सितारों की बढ़ती लोकप्रियता ने उत्पादन रणनीतियों को भी नया आकार दिया है, जिससे स्टूडियो दक्षिण और बॉलीवुड दोनों से अग्रणी प्रतिभाओं को मिलाकर स्लेट डिजाइन करने के लिए प्रेरित हुए हैं, ताकि वास्तव में देश भर के दर्शकों के बीच पहुंच बनाई जा सके। ऑरमैक्स बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स के अनुसार, डब की गई फिल्मों ने 2024 में कुल हिंदी बॉक्स ऑफिस का 32 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किया। इससे कुल 1,453 करोड़ रुपये का सकल राजस्व प्राप्त हुआ। इसमें से 886 करोड़ रुपये का योगदान अकेले पुष्पा 2: द रूल ने दिया था।