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वैश्विक भूख सूचकांक की क्या है असलियत

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Last Updated- December 11, 2022 | 1:37 PM IST

वैश्विक भूख सूचकांक के नवीनतम जारी आंकड़े में भारत 127 देशों की सूची में 107 वें स्थान पर आ गया है। साल 2021 में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर था। वैश्विक भूख सूचकांक में भारत को 29.1 स्कोर के साथ गंभीर स्तर की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि यह साल 2000 के 38.8 अंक के खतरनाक स्तर में सुधार को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बाल पोषण का प्रदर्शन काफी चिंताजनक है। लेकिन भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वैश्विक भूख सूचकांक भ्रामक है और इसमें भारत की छवि को खराब करने का प्रयास किया गया है।
 वैश्विक भूख सूचकांक  क्या है, इसे कैसे मापा जाता है और केन्द्र सरकार ने इसकी वार्षिक रिपोर्ट का विरोध क्यों किया है ?

वैश्विक भूख सूचकांक  वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूख को मापता  है। यह सूचकांक तीन क्षेत्रों के चार बिंदुओं को निर्देशित करता है। इसमें बाल मृत्यु दर के तहत पांच वर्ष से कम आयु का मृत्यु दर, खाद्य आपूर्ति के कारण कुपोषण, बच्चों में बौनापन की दर  और लंबाई-वजन अनुपात (लंबाई के हिसाब से कम वजन)  शामिल है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से लंबाई के हिसाब से वजन की माप की जाती है।
 वैश्विक भूख सूचकांक  मुख्य रूप से अमेरिका और अन्य देशों में स्थित बहुपक्षीय एजेंसियों और संगठनों से डेटा प्राप्त करता है ताकि भाग लेने वाले सभी देशों के लिए प्रत्येक बिंदुओं के तहत स्कोर की गणना की जा सकें। इन संगठनों में खाद्य और कृषि संगठन और यूनिसेफ शामिल हैं।

 तीन बिंदुओं के तहत 4 क्षेत्रों में प्रत्येक को 1988 के बाद से उस संकेतक के लिए दुनिया भर में देखे गए उच्चतम स्तर के देशों के मूल्यों के आधार पर एक मानकीकृत स्कोर दिया जाता है। उदाहरण के लिए इस अवधि में अगर कुपोषण के लिए उच्चतम मूल्य 76.5 प्रतिशत है इसलिए मानकीकरण की सीमा 80 प्रतिशत निर्धारित की गई है। अगर किसी देश का कुपोषण 40 प्रतिशत है तो उसका मानकीकृत कुपोषण स्कोर 50 होगा।

 मानकीकृत अंको को फिर प्रत्येक देश के लिए वैश्विक भूख सूचकांक   स्कोर की गणना के लिए इकट्ठा किया जाता है। कुपोषण और बाल मृत्यु दर प्रत्येक वैश्विक भूख सूचकांक   स्कोर में एक तिहाई का योगदान देता है जबकि लंबाई-वजन अनुपात का प्रत्येक स्कोर में छठा भाग रहता है।

वैश्विक भूख सूचकांक  स्कोर को 100 पॉइंट स्केल पर चिह्नित किया जाता है, जहां 0 सबसे अच्छा स्कोर (कोई भूख नहीं) है और 100 सबसे खराब है। मापदंड रैंकिंग पैमाने के संदर्भ में 9.9 के बराबर या उससे नीचे के स्कोर को कम के रूप में वर्गीकृत किया गया है, 10.0 से 19.9 को मध्यम के रूप में वर्गीकृत किया गया है, 20.0 से 34.9 गंभीर है, 35.0 से 49.9 खतरनाक है और, 50.0 या उससे अधिक है बेहद खतरनाक है। वैश्विक भूख सूचकांक   ने 2015 में अपनी कार्यप्रणाली में संशोधन किया था जिसके कारण अधिकांश देशों के वैश्विक भूख सूचकांक   स्कोर में ऊपर की ओर बदलाव आया है।

भारत का स्थान और आपत्ति

सार्क देशों में भारत दूसरे स्थान पर है, जिसमें पाकिस्तान 99वें, बांग्लादेश 84वें, नेपाल 81वें और यहां तक कि संकटग्रस्त श्रीलंका 64वें स्थान पर है। केवल अफगानिस्तान 109वें स्थान पर है। मालदीव और भूटान को स्थान नहीं दिया गया। सार्क देशों में भारत का खराब स्कोर के मामले में दूसरे स्थान पर है। भारत से बेहतर स्थिति पाकिस्तान 99वें, बांग्लादेश 84वें, नेपाल 81वें और यहां तक कि संकटग्रस्त श्रीलंका 64वें की है। सिर्फ अफगानिस्तान 109 वें स्थान पर है। मालदीव और भूटान को कोई स्थान नहीं मिला है।
 भारत में चाइल्ड वेस्टिंग(लंबाई-वजन अनुपात) 19.3 प्रतिशत के साथ दुनिया में सबसे अधिक है। हालांकि चाइल्ड स्टंटिग में सुधार हुआ है। यह साल 2000 में 54.5 प्रतिशत के मुकाबले अब 35.5 प्रतिशत पर आ गया है लेकिन अभी भी यह बहुत अधिक है। इसी तरह 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर भी 2006 के 7.1 और 2012 के 5.2 के मुकाबले 2022 में 3.3 पर आ गया है।

 भारत सरकार ने वैश्विक भूख सूचकांक    के पिछले दो आंकड़ो को मुख्य रूप से दो प्रमुख उद्देश्यों में बनाकर रखा है। महिला और बाल विकास मंत्रालय  ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सूचकांक की गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले चार संकेतकों में से तीन बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं और पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। 

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First Published - October 17, 2022 | 10:06 PM IST

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