भारत ने अपनी बड़ी आबादी को कोविड-19 का टीका लगाए जाने से जुड़ी योजना के बारे में सूक्ष्म स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। शीतगृहों की संख्या से लेकर इस काम में लगने वाले कर्मचारियों के अनुमान और भर्ती योजना तक के बारे में केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। राज्यों को टीका लगाने के बारे में प्रशिक्षण देने और टीकों के भंडारण के लिए जरूरी होने पर शीतगृह उपकरणों की खरीद का काम शुरू करने को भी कहा है। राज्यों को शीतगृह उपकरणों का जायजा लेकर मरम्मत के बारे में अंदाजा लगाने, टीके के रखरखाव एवं टीकाकरण संबंधी गतिविधियों के बारे में प्रशिक्षण देने, मोबाइल ऐप आधारित निगरानी प्रणाली तैयार करने, नए शीतगृह उपकरणों को लगाए जाने वाली जगह की पहचान करने, अग्रिम मोर्चे पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों और 60 साल से अधिक उम्र वाले एवं पहले से बीमार लोगों का ब्योरा अद्यतन करने को भी कहा गया है। इन जानकारियों एवं तैयारियों से केंद्र को टीके के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। सरकार ने यह तय किया है कि किसी भी व्यक्ति को कोविड-19 टीका देने के पहले निर्धारित टीकाकरण केंद्रों पर उसकी ऐंटीबॉडी जांच की जाएगी।
केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम अपने शीतगृह उपकरणों की बढ़ी हुई जरूरतों का अंदाजा लगाने की प्रक्रिया में हैं। अपनी मौजूदा क्षमता के बारे में हमें मालूम है लेकिन इसमें बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ेगी। इस बढ़ी हुई जरूरत एवं उसके लिए वित्तीय समर्थन पर गौर किया जा रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पहले से ही टीकाकरण के प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद हैं लेकिन बड़े पैमाने पर कोविड-19 टीका लगाने के लिए अधिक लोगों की जरूरत होगी। इस अधिकारी ने कहा, ‘हम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रखने के लिए डिजिटल कंटेंट तैयार कर रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न केवल प्रशिक्षण देने बल्कि टीका लगने के बाद नजर आने वाले प्रतिकूल प्रभावों को दर्ज किए जाने में भी किया जाएगा।’ राज्यों के पास पहले से बीमार लोगों के आंकड़े मौजूद हैं जो स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्रों पर किए जाने वाले स्वास्थ्य परीक्षणों से मिले हैं। यह आंकड़ा पहले से ही डिजिटल रूप में है और राज्य उसे अद्यतन कर सकते हैं।
टीके के प्रबंधन से जुड़े सभी लोगों- मसलन, टीकाकरण कार्यक्रम प्रबंधक और टीके के रखरखाव एवं शीत भंडारण का काम संभालने वाले सभी लोगों को एक मानकीकृत व्यवस्था के मुताबिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन प्रशिक्षित लोगों की सूची प्रतिरक्षण प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली (आईटीएमआईएस) पर भी डाली जाएगी।
सरकार की कोशिश है कि कोविड-19 टीका से संबंधित समूची प्रक्रिया को जहां तक संभव हो डिजिटल बनाया जाए ताकि वास्तविक समय निगरानी रख पाना अधिक आसान हो। दिल्ली स्थित एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय नियमित तौर पर प्रतिरक्षण गतिविधियां चला रहा है और टीके एवं शीत भंडारण पर नजर रखने के लिए ई-वीआईएन जैसी व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। उन्होंने कहा, ‘शीत भंडारण वाली सभी इकाइयों में तापमान पर नजर रखने वाला फीचर मौजूद है। इससे पता चलता रहता है कि टीका कितने तापमान पर रखा गया है। यह ट्रैकर सीधे केंद्रीय सर्वर पर तापमान को दर्ज कर देता है। जब कभी तापमान अचानक बहुत कम या अधिक होता है तो सर्वर अलर्ट कर देता है।’ भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए कोविड-19 का टीकाकरण कार्यक्रम वृहद स्तर पर चलाना होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए कुछ सलाहकार टीकाकरण कार्यक्रम का एक रोडमैप तैयार करने में लग गए हैं। उनका मानना है कि मौजूदा शीत भंडारण इकाइयों से केवल 20 फीसदी आबादी तक ही टीका पहुंच सकता है। यही कारण है कि सरकार सभी लोगों को एक साथ टीका लगाने की नहीं सोच रही है। सरकार चरणबद्ध तरीके से टीके का वितरण करने की तैयारी में है।
टीका निर्माता कंपनियों का भी मानना है कि ऐसी स्थिति में भारत शीत भंडारण के लिए ‘हब ऐंड स्पोक’ मॉडल अपना सकता है। हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल ई अगले साल करीब 1.5 अरब कोविड टीका खुराक बनाने में जुटी हुई है। इसकी प्रबंध निदेशक महिमा दातला कहती हैं, ‘अधिकांश टीकों को 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखने की जरूरत होगी। लेकिन भारत में -20 डिग्री सेल्सियस वाले शीतगृह हैं क्योंकि पोलियो टीके को इसी तापमान पर रखना होता है।’ हालांकि शीतगृहों के मामले में कुछ राज्य थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं जबकि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में इसका ढांचा बेहतर करने की जरूरत होगी। वहीं तमिलनाडु अपने ढांचे को लेकर खासा आश्वस्त नजर आ रहा है। राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे सुदूर इलाकों में पहले से ही टीकाकरण कार्यक्रम सफलता से चला रहे हैं। जहां तक कोविड टीके का सवाल है तो राज्य के जन स्वास्थ्य निदेशक ने स्वास्थ्य सेवा उप निदेशकों को निर्देश दिया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं उपकेंद्र स्तर तक की योजना तैयार कर ली जाए। इस बारे में केंद्र के साथ लगातार चर्चा जारी है।