वयस्कों के लिए टीबी का टीका जल्द

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 3:42 PM IST

टीबी (तपेदिक) के खिलाफ भारत की लड़ाई में जल्द ही इसके शस्त्रागार में एक और हथियार शामिल होने के आसार हैं, जो वयस्कों के लिए टीबी का टीका है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जल्द ही भारत में वयस्कों के लिए एक रिकॉम्बिनैंट बीसीजी टीका उपलब्ध हो सकता है।

इस संबंध जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा ‘कार्य प्रगति पर है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) एक रिकॉम्बिनैंट बीसीजी टीके पर काम कर रही है। वयस्कों पर तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण चल रहा है।’ 

उन्होंने कहा कि वयस्कों के लिए रिकॉम्बिनैंट बीसीजी टीका एक साल या इसके आसपास उपलब्ध हो सकता है। एसआईआई ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की। यह वर्ष 2025 तक भारत के टीबी उन्मूलन अभियान की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण हो सकता है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी अनुभाग के अतिरिक्त उप महानिदेशक रघुराम राव ने कहा ‘करीब 30 प्रतिशत आबादी के शरीर में पहले से ही टीबी का बैक्टीरिया है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों में बैक्टीरिया बढ़ना शुरू कर देता है। अगर पोषण संतुलन बनाए रखा जाए, तो जिंदगी में टीबी रोग की चपेट में आने की आशंका केवल 10 प्रतिशत होती है।’वर्तमान में एक वर्ष से कम आयु वाले शिशुओं को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। राव कहते हैं कि यह बच्चों को बचपन में टीबी के गंभीर रूपों से बचाता है। हालांकि वयस्कों के पास कोई टीका सुरक्षा नहीं है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा की वेबसाइट के अनुसार 16 वर्ष से अधिक आयु वाले किसी भी व्यक्ति बीसीजी का टीका शायद ही कभी दिया जाता है क्योंकि इस बात के काफी कम प्रमाण मिलते हैं कि यह टीका वयस्कों में काफी अच्छा काम करता है। हालांकि यह 16 से 35 वर्ष की आयु वाले ऐसे वयस्कों को दिया जाता है, जिनमें उनके काम की प्रकृति के कारण टीबी का खतरा होता है, जैसे कि कुछ स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पशु चिकित्सा कर्मचारी और बूचड़खाने के कर्मचारी।

रिकॉम्बिनैंट बीसीजी टीके उन्नत प्रौद्योगिकी के जरिये निर्मित किए जाते हैं। एसआईआई ने पहले ही भारत के दवा विनियामक से दक्षिण अफ्रीकी परीक्षणों के आंकड़ों के आधार पर छह साल तक के बच्चों के लिए टीबी की रोकथाम के वास्ते रिकॉम्बिनैंट बीसीजी टीके (वीपीएम1002) की अनुमति मांग ली है। एसआईआई ने शिशुओं पर दक्षिण अफ्रीका के परीक्षणों से प्राप्त डेटा अप्रैल में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को सलाह देने वाली विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) के समक्ष पेश किए थे। 2,000 वयस्क प्रतिभागियों में टीबी की रोकथाम के उद्देश्य से चरण दो/तीन का परीक्षण जारी है।

बैठक के विवरण के अनुसार एसईसी ने तब कहा था कि एसआईआई के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए उसे प्रस्तावित सुझाव और छह वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के समूह में सुरक्षा और प्रतिरक्षा संबंधी डेटा पेश करना चाहिए। अगर भारत छह साल तक के बच्चों के लिए आरबीसीजी की सुरक्षा के दायरे में विस्तार करने का फैसला करता है, तो इससे भी इस सुरक्षा दायरे में काफी इजाफा होगा। इसके अलावा चूंकि चल रहे वयस्क परीक्षण (2,000 से अधिक के प्रतिभागियों पर) के डेटा आने वाले हैं, इसलिए आरबीसीजी टीके के समान सुरक्षा दायरे का विस्तार वयस्कों के लिए भी किया जा सकता है।

इसके अलावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा 12,000 प्रतिभागियों में आरबीसीजी टीके का तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण किया जा रहा है। आईसीएमआर ने अभी तक इस क्लीनिकल परीक्षण का डेटा पेश नहीं किया है। वेलूर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) में क्लीनिकल वायरोलॉजी ऐंड माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख तथा वरिष्ठ विषाणु विज्ञानी जैकब जॉन ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि आम तौर पर ऐसा नहीं होता कि टीबी संक्रमण होने पर उस व्यक्ति को फिर टीबी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए यह देखना होगा कि इस तरह की बीमारी से बचाव में कोई टीका कितना प्रभावी हो सकता है। हालांकि अगर किसी टीके को इस तरह से तैयार किया गया है कि वह प्राकृतिक संक्रमण के खिलाफ अधिक सुरक्षा प्रदान करता है, तो यह कारगर हो सकता है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ कोई भी वयस्क टीका स्वागत योग्य कदम है।

इंडिया टीबी रिपोर्ट 2022 में कहा गया है कि भारत में वर्ष 2021 के दौरान टीबी के मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत का तीव्र इजाफा दर्ज किया गया है।

First Published : September 11, 2022 | 10:10 PM IST