तरल रेमडेसिविर की आपूर्ति जल्द होगी शुरू

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 11:01 PM IST

अस्पताल में भर्ती कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रमुख दवा रेमडेसिविर की कमी की समस्या अब दूर हो सकती है क्योंकि दवा का तरल रूप जल्द ही बाजार में पेश किया जा सकता है। इस दवा के निर्माताओं का कहना है कि इस दवा की प्रवर्तक कंपनी गिलियड ने एक तरल फॉम्र्यूलेशन की पेशकश की है जो बाजार में उपलब्ध होगा। इस तरल रूप से दवा का निर्माण आसानी और तेजी से हो सकता है। फि लहाल दवा पाउडर के रूप में उपलब्ध है और इसे एक सॉल्यूशन में बदला जा सकता है। इसके बाद इसे मरीजों को दिया जाता है। कई दवा निर्माताओं ने इस बात की पुष्टि की है शरीर में डाले जाने लायक तरल रूप से विनिर्माण प्रक्रिया छोटी हो जाएगी और इससे आपूर्ति में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
एक विनिर्माता ने कहा, ‘रेमडेसिविर बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल है और दवा बनाने में कम से कम 21 दिन का समय लगता है। एक बैच के शुरू होने से पहले ही सक्रिय सामग्री के लिए आपूर्ति शृंखला का इंतजाम करना होता है। यानी एक बैच को बाजार में उतारने से पहले न्यूनतम एक महीने का वक्त लगता है।’
उन्होंने कहा, ‘गिलियड रेमडेसिविर का एक तरल रूप लेकर आई है जिसकी वजह से मूल रूप से लाइफिलाइजेशन की प्रक्रिया को पूरा करने की जरूरत नहीं होगी और इससे दवा निर्माण की प्रक्रिया थोड़ी छोटी होगी। इसके अलावा, भारत में लाइफिलाइजेशन की सीमित क्षमता है।’ लाइफिलाइजेशन फ्रीज करके सुखाने की प्रक्रिया के रूप में आमतौर पर जाना जाता है। इसमें कम तापमान पर पानी को निकालने की प्रक्रिया शामिल होती है जिसमें उत्पाद को जमाना भी शामिल है और दबाव कम करके फिर ठोस से वाष्प बनाने की प्रक्रिया के साथ ही बर्फ  हटाया जाता है।
भारत में रेमडेसिवर निर्माताओं में से अहमदाबाद की कैडिला हेल्थकेयर (जाइडस कैडिला)की अपनी घरेलू लाइफिलाइजेशन क्षमता है। कंपनी के एक सूत्र ने बताया कि वह पहले से ही हर महीने दवा की करीब 5 लाख खुराक बना रही है। एक मरीज को आम तौर पर छह खुराक की जरूरत होती है। एक निर्माता ने कहा कि तरल रूप में रेमडेसिविर के वितरण के लिए कोल्ड चेन की जरूरत होगी।
सिप्ला ने पहले ही रेमडेसिविर की अपनी निर्माण क्षमता दोगुना कर दी है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने कई साइटों का लाभ उठाकर उत्पादन में वृद्धि की है। आपूर्ति सही रफ्तार से चल रही है। हमने हर महीने दोगुना तक अपनी आपूर्ति बढ़ाई है और इससे हमें बढ़ी हुई मांग वाले क्षेत्रों के लिए जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। टोसिलिजुमैब या एक्टेमरा को सिप्ला रोश के साथ एक लाइसेंस समझौते के तहत बेचती है।’ कंपनी ने कहा कि पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह सक्रिय रूप से रोश के साथ सहयोग कर रही है। हैदराबाद में मौजूद हेटेरो ने कहा कि वह पहले ही रेमडेसिविर की 12 लाख खुराक दे चुकी है जिसने दो लाख मरीजों की देखभाल की। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि उत्पाद का निर्माण किया जा रहा है और जरूरी मांग पूरी की जाएगी।

First Published : October 7, 2020 | 11:00 PM IST