राज्य इस बात को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं कि केंद्र ने मौजूदा अनुबंधों के तहत टीके खरीदने में खुद को वरीयता दी है, जबकि उन्हें टीका विनिर्माताओं के साथ आगे अनुबंध करने में ऊंची कीमत चुकानी होगी।
केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट््यूट (एसआईआई) द्वारा बनाए जा रहे एस्ट्राजेनेका के टीके कोविशील्ड और भारत बायोटेक के टीके कोवैक्सीन के लिए 150 रुपये प्रति खुराक कीमत चुकाई है। लेकिन एसआईआई ने राज्य सरकारों के साथ भविष्य के अनुबंधों के लिए 400 रुपये प्रति खुराक कीमत तय की है। इसका मतलब है कि राज्यों को केंद्र की तुलना में 166 फीदी अधिक दाम चुकाने होंगे। भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के अलावा सभी राज्यों ने इस नीति की आलोचना की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मांग की कि किसी भी टीके की एक निश्चित कीमत होनी चाहिए। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट किया, ‘भाजपा हमेशा एक देश, एक पार्टी, एक नेता का राग अलापती रहती है, लेकिन वे लोगों की जिंदगी बचाने के लिए टीकों की एक कीमत नहीं रख सकते। हरेक भारतीय को मुफ्त टीका मिलना जरूरी है, भले ही वह किसी भी उम्र, जाति, नस्ल और जगह का हो। सरकार को कोविड टीकों की एक कीमत तय करनी चाहिए, भले ही उनकी कीमत केंद्र चुकाए या राज्य।’
बनर्जी ने अलग-अलग कीमतों पर सवाल उठाते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इस पत्र में कहा गया है, ‘राज्य गरीब और युवा के लिए के लिए टीके खरीदेंगे, इसलिए आपकी नीति गरीब विरोधी और युवा विरोधी है। कीमतों में ऐसा अजीब अंतर भारत के इतिहास में कभी सुनने को नहीं मिला। इतनी ऊंची कीमतों को तो छोडि़ए, देश में कभी किसी राज्य को जन टीकाकरण अभियान के लिए टीके खरीदने को कहा गया।’
तेलंगाना के वरिष्ठ मंत्री और मुख्यमंत्री केसी राव के बेटे केटी रामा राव ने भी ऐसी ही विचार व्यक्त किए। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘हम एक देश-एक कर (जीएसटी) को लेकर सहमत हुए। लेकिन अब हमें एक देश-टीकों की दो अलग-अलग कीमतेंं देखने को मिल रही हैं। क्या केंद्र सरकार अतिरिक्त लागत को पीएम-केयर्स के जरिये वहन नहीं कर सकती और देशभर में तेज से टीकाकरण में मदद दे सकती है?’
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने भी कहा कि टीका आपूर्ति में बार-बार कमी पैदा हो रही है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास रोजाना 6-7 लाख खुराक लगाने की क्षमता है, लेकिन दो लाख से भी कम को टीके लगा पा रहे हैं। उत्पादन क्षमता को देखते हुए आने वाले दिनों में भी आपूर्ति में सुधार की गुंजाइश नहीं है।’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तीन विनिर्माताओं एसआईआई, भारत बायोटेक और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ करार करेगी। कम से कम छह राज्य- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम कह चुके हैं कि उनकी सरकारें सभी को मुक्त में टीका लगाएंगी।