भारतीय रेल में इस्तेमाल हो रहे अत्यंत पुराने संचार संबंधी बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए स्वदेशी टक्कररोधी और आपातकालीन संचार व्यवस्था तैयार की जा रही है, वहीं बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के अधिकारियों से कहा है कि इसके लिए सीधे पांचवीं पीढ़ी (5जी) नेटवर्क के इस्तेमाल की संभावनाओं की तलाश करें।
यह ऐसे समय में हो रहा है, जब रेलवे अपने परिचालन में बमुश्किल 4जी का इस्तेमाल कर रहा है। वैष्णव केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक मंत्री भी हैं। इस योजना पर काम कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस समय भारतीय रेलवे 4जी पर मिशन क्रिटिकल वायस (एमवीसी) और कवच के संचालन को लेकर अवधारणा और उसकी जांच पर काम कर रहा है।
5जी तकनीक में उद्योग की हाल की गतिविधियों को देखते हुए रेलवे ने एमवीसी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए 5जी तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं की तलाश शुरू की है। विभिन्न हिस्सेदारों और भारत के दूर संचार उद्योग के साथ इस सिलसिले में बातचीत चल रही है।’ कवच पहल स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) व्यवस्था है।
एमसीवी व्यवस्था बहुत कठिन स्थिति के दौरान लोकोमोटिव पायलटों औऱ अन्य प्रमुख व्यक्तियों के बीच बातचीत करने के लिए बुनियादी ढांचा है। ऐसी स्थिति में अप्रभावी या देरी से हुए संचार से सुरक्षा को जोखिम हो सकता है, या ट्रेने रुक सकती हैं, जिससे रेल परिचालन में देरी या दुर्घटना हो सकती है।
इस तकनीक को विकसित करने और लागू करने का शुरुआती लक्ष्य 2026 के लिए था। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि 5जी संबंधी बुनियादी ढांचा वैश्विक रूप से तेजी से विकसित होने और भारत के दूरसंचार उद्योग में तेजी से काम होने और हाल की स्पेक्ट्रम नीलामी के बाद इस समयसीमा पर फिर से विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मूल समयसीमा की वजह से तकनीक संबंधी अंतर आ सकता है। उन्होंने कहा, ‘ऐसे में मंत्री ने 4जी से धीरे धीरे 5जी में जाने के बजाय सीधे 5जी तकनीक अपनाने की संभानाओं पर विचार करने को कहा है।’
रेलवे 5जी की व्यवहार्यता को लेकर चिंता से जूझ रहा है, क्योंकि निजी ऑपरेटर इस साल के आखिर तक बड़े पैमाने पर इस तकनीक को अपना लेंगे। एक अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा 4जी तकनीक अपनाने के लिए हाल में कई तरह के प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।