पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने सभी संबंधित पक्षों से संपर्क साधने के अपने प्रयासों को आज भी जारी रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने टेलीफोन किया और बातचीत में दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना चाहिए। मोदी ने कहा कि भारत जल्द से जल्द तनाव कम करने और शांति की बहाली का समर्थन करता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतेह अली से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री ने राज्य सभा में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट की गंभीर स्थिति भारत के लिए भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाज फंसे हुए हैं। मोदी ने कहा कि अगर इस युद्ध के कारण पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहीं तो उसके गंभीर परिणाम होंगे और ऐसे में आत्मनिर्भर बनना ही एकमात्र विकल्प होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया युद्ध के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि उन्होंने 2020-21 में कोविड-19 महामारी से निपटने के दौरान जिस तरह टीम इंडिया की भावना के साथ काम किया था, उसी तरह इस संकट से निपटने के लिए भी केंद्र के साथ मिलकर काम करें।
मोदी ने याद दिलाया कि विशेषज्ञों के अधिकार प्राप्त समूहों ने कोविड-19 के दौरान चुनौतियों से निपटने में मदद की थी।
मोदी ने कहा कि सात अधिकार प्राप्त समूह युद्ध के नतीजों से निपटेंगे और ईंधन, उर्वरक, गैस, आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति पर रणनीतियां तैयार करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में कई देशों के कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाज भारत पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि एक अंतर-मंत्रालय समूह का भी गठन किया गया है जो आयात एवं निर्यात के मोर्चे पर दिखने वाली चुनौतियों का आकलन करने के लिए नियमित तौर पर बैठक करते हुए जरूरी समाधान पर काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध की स्थिति पल-पल बदल रही है। उन्होंने कहा, ‘मैं अपने साथी नागरिकों से भी कहना चाहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए। इस बात की बेहद आशंका है कि इस युद्ध का प्रतिकूल प्रभाव लंबे समय तक बना रहेगा।’
मोदी ने राज्य सरकारों आग्रह किया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभ गरीबों, श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों तक समय पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को जहां भी रोजगार मिला है, वहां उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए सक्रियता से कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारों को विशेष व्यवस्था करने के लिए कहा।
सरकार ने गुरुवार शाम को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है ताकि पश्चिम एशिया की स्थिति, उसके प्रभाव और देश की तैयारियों के बारे में जानकारी अन्य राजनीतिक दलों को दी जा सके।
सोमवार शाम को दो भारतीय एलपीजी जहाज- पाइन गैस और जग वसंत- ने सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट पार किया, लेकिन पश्चिम फारस की खाड़ी क्षेत्र में लगभग 540 भारतीय नाविकों के साथ 20 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी फंसे हुए हैं।
ट्रंप के साथ टेलीफोन पर बातचीत में मोदी ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द तनाव कम करने और शांति की बहाली का समर्थन करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की समय-सीमा 5 दिन बढ़ाने के एक दिन बाद यह फोन आया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने का महत्त्व भी शामिल है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार शाम को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था एवं ऊर्जा सुरक्षा पर पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव पर चर्चा की। जयशंकर ने सोमवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की। विदेश मंत्री ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष से भी बात की। श्रीलंका ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति में मदद के लिए भारत से सहायता मांगी है।
प्रधानमंत्री ने जिन 7 अधिकारप्राप्त समूहों की घोषणा की उनमें प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा शीर्ष अफसरशाह शामिल हैं। वे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रभावों का आकलन करेंगे। ये सात समूह रक्षा, विदेश मामले एवं सार्वजनिक व्यवस्था सहित रणनीतिक मुद्दों के अलावा अर्थव्यवस्था, वित्त एवं आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित मुद्दों पर नजर रखेंगे जिनमें निर्यात एवं आयात सहित ऊर्जा सुरक्षा, तेल, एलपीजी आदि शामिल हैं। ये समूह उर्वरक एवं अन्य कृषि इनपुट की उपलब्धता, आवश्यक वस्तुओं के दाम एवं आपूर्ति, नागरिक उड्डयन, शिपिंग एवं रेलवे से संबंधित परिवहन व लॉजिस्टिक्स और सूचना संचार एवं आम लोगों के साथ संपर्क की भी निगरानी करेंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि ये अधिकार प्राप्त समूह स्थिति के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने और घरेलू अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को बेहतर करने के भी उपाय करेंगे। इन समूहों द्वारा मुद्दों की पहचान की जाएगी और उनसे निपटने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इन समूहों के कार्यों का दायरा काफी व्यापक होगा जिनमें जोखिम के आकलन से लेन ऊर्जा आपूर्ति एवं मूल्य निर्धारण का आकलन, आपूर्ति में व्यवधानों को कम करने, कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम करने और यह सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं कि देश का रणनीतिक भंडार पर्याप्त रहे। इन समूहों को व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स, जिसमें शिपिंग मार्ग, बंदरगाह, विमानन कॉरिडोर और महत्त्वपूर्ण आयात एवं निर्यात शामिल हैं, के संभावित व्यवधानों की जांच करने के लिए भी कहा गया है। आयात पर निर्भरता कम करने और लचीलेपन को बेहतर करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान करने के अलावा लॉजिस्टिक्स एवं कुशल वितरण प्रणाली सुनिश्चित करने पर भी इन समूहों की नजर रहेगी।
देश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं मूल्य में स्थिरता पर नजर रखने के अलावा किसी भी व्यवधान के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए अल्पकालिक, मध्यावधि एवं दीर्घकालिक रणनीतियां तैयार करना भी इन समूहों का काम होगा। इसके अलावा सार्वजनिक व्यवस्था और महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में लचीलेपन से संबंधित तैयारी भी एक प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
इन अधिकार प्राप्त समूहों को किसी भी अधिकारी और किसी भी क्षेत्र के विशेषज्ञों को परामर्श के लिए आमंत्रित करने का अधिकार दिया गया जिनसे वे बात कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि इन समूहों को समयबद्ध तरीके से सिफारिशें प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।