दवा निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) ने अफ्रीकी देश गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत से जुड़े विवादों के घेरे में आई दिल्ली की दवा विनिर्माता कंपनी मेडन फार्मास्यूटिकल्स की सदस्यता निलंबित कर दी है। सूत्रों ने बताया कि विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) कंपनी का आयात-निर्यात कोड (आईईसी) भी वापस ले सकता है। इस बीच गाम्बिया की औषधि नियंत्रक एजेंसी ने मेडन फार्मा की ‘जहरीली और घटिया’ दवाएं वापस मंगाने और कंपनी के सभी उत्पादों को अलग रखने के लिए एक अधिसूचना जारी की है।
फार्मेक्सिल के महानिदेशक रवि उदय भास्कर ने कहा कि फार्मेक्सिल की सदस्यता निलंबित होने का मतलब है कि मेडन फार्मास्यूटिकल्स अब सरकार की बाजार में पहुंच से जुड़ी किसी भी पहल के तहत कोई प्रोत्साहन पाने की हकदार नहीं होगी। उन्होंने कहा कि विदेश में स्वास्थ्य नियामक के पास अपने उत्पाद का पंजीकरण कराने वाली कंपनी को दो करोड़ रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है और फार्मास्युटिकल ड्रग ट्रैक ऐंड ट्रेस सिस्टम को लागू करने के लिए एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले स्तर के उद्यम) को 25 लाख रुपये का एकमुश्त अनुदान भी दिया जाता है।
फार्मेक्सिल ने उन आयातकों के बारे में जानकारी मांगी थी जिन्हें वे दवाएं (खांसी की दवा जिससे बच्चों की मौत हुई है) भेजी गईं थीं। इसने 7 अक्टूबर की समय-सीमा निर्धारित की थी, जिसके बाद जानकारी न मिलने के कारण कंपनी का पंजीकरण और सदस्यता प्रमाण पत्र (आरसीएमसी) निलंबित हो जाएगा। भास्कर ने कहा कि आगे निर्यात संवर्धन परिषद डीजीएफटी को आईईसी वापस लेने की सिफारिश भी कर सकती है जो इस कंपनी के सभी निर्यात को रोक सकती है।
विभिन्न विभागों के कई सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि भारत वास्तव में इसे बेहद गंभीरता से देख रहा है और अगर कंपनी की गलती साबित हो जाती है तब कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिसमें इसके निर्यात लाइसेंस को रद्द करना या प्रवर्तकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने संकेत दिया कि भविष्य की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले वे नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
मेडन फार्मा का कहना है कि सरकारी अधिकारियों ने पिछले सप्ताह संयंत्र का दौरा किया था। मेडन फार्मा के निदेशक विवेक गोयल ने एक बयान में कहा कि वह मौत के बारे में मीडिया रिपोर्ट सुनकर स्तब्ध’ हैं और उन्हें 5 अक्टूबर को गाम्बिया में अपने एजेंट से इसकी आधिकारिक जानकारी मिली। कंपनी ने गाम्बिया की औषधि नियंत्रक एजेंसी की एक अधिसूचना पोस्ट की है जिसमें मेडन फार्मा की घटिया और दूषित दवाओं को वापस लेने और सभी दवाओं को अलग रखने का काम पूरा करने के लिए कहा गया है।
मेडन फार्मा का कहना कि उनके पास आईएसओ 9001: 2000 और डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाण पत्र है और कंपनी की वेबसाइट पर कहा गया है, ‘किसी भी कीमत पर गुणवत्ता से समझौता न करें।’ कंपनी का फैक्टरी परिसर फिलहाल काम नहीं कर रहा है। कंपनी की वेबसाइट पर दावा किया गया है, ‘हमारे संयंत्रों में बनी दवाएं, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के बराबर हैं और विनिर्माण के हरेक चरण में जीएमपी मानदंडों का पालन किया जाता है। साफ-सुथरे, अत्यधिक नियंत्रित तथा पूरी तरह से वातानुकूलित माहौल में दवाएं तैयार की जाती हैं।’
गोयल ने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सरकारी अधिकारियों ने 1 अक्टूबर, 3 अक्टूबर, 6 अक्टूबर और 7 अक्टूबर को उनके संयंत्रों का दौरा किया और सीडीएससीओ ने कंपनी निदेशकों की मौजूदगी में सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ नमूने वापस ले लिए गए। डब्ल्यूएचओ ने 29 सितंबर को डीसीजीआई को गाम्बिया में हुई मौतों और मेडन फार्मा के इस घटनाक्रम से संदिग्ध रूप से जुड़े होने की सूचना दी थी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, ‘सीडीएससीओ ने इस मामले को तत्काल हरियाणा राज्य नियामक प्राधिकरण के सामने उठाया है जिसके अधिकार क्षेत्र में सोनीपत में मेडेन फार्मास्यूटिकल की दवा विनिर्माण इकाई मौजूद है।’