स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज कहा कि भारत के पास मौतों की गणना के लिए मजबूत प्रणाली मौजूद है। इसके साथ ही मंत्रालय ने कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या को बहुत कम कर बताए जाने संबंधी हालिया अध्ययन का खंडन कर दिया।
सरकारी वक्तव्य में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के उम्र संबंधी संक्रमण से होने वाली मौत दरों का उपयोग देश में अधिक मौतों की गणना के लिए किया गया है जो इन अध्ययनों में सीरो-पॉजिटिविटी पर आधारित है। इसमें कहा गया है, ‘मौतों का बहिर्वेशन (एक्सट्रपोलेशन) इस दु:शासिक धारणा पर किया गया है कि किसी भी संक्रमित व्यक्ति के मौत की संभावना सभी देशों में एक समान है।’
भारत ने 22 जुलाई तक कोविड से मरने वालो का आंकड़ा 4,18,987 बताया है जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।
मंत्रालय ने कहा, ‘भारत में मजबूत और कानून आधारित मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को देखते हुए भले ही संक्रामक रोग और उसके प्रबंधन के सिद्घांतों के मुताबिक कुछ मामलों का पता नहीं चल पाता है लेकिन मौतों का पता नहीं चल पाना मुश्किल है।’
मंत्रालय ने यह भी कहा कि नागरिक पंजीकरण प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि देश में सभी जन्म और मृत्यु का पंजीकरण किया जाए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ऐसे अध्ययनों ने विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कारकों जैसे नस्ल, जातीयता, आबादी का जीनोम संबंधी गठन, अन्य बीमारियों के लिए पिछले जोखिम स्तरों और उस आबादी में विकसित संबद्घ प्रतिरक्षा के बीच परस्पर क्रिया को खारिज कर दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के वक्तव्य में कहा गया है, ‘रिपोर्टों में माना गया कि अत्यधिक मौत के सभी आंकड़े कोविड से होने वाली मौतों के हैं जो कि तथ्य पर आधारित नहीं है और पूरी तरह से भ्रामक है।
अत्यधिक मृत्यु एक शब्द है जिसका उपयोग मृत्यु दर के आंकड़े से संबंधित सभी कारण को बताने के लिए किया जाता है और इन मौतों को कोविड-19 से होने वाली मौत करार देना पूरी तरह से भ्रामक है।’
वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट की हालिया रिपोर्ट आई है जिसके सह लेखक भारत के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन है। रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि भारत में कोविड के दौरान होने वाली अत्यधिक मौत का आंकड़ा 34 लाख से 49 लाख के बीच हो सकती है। इसमें मौत के लिए कोविड-19 को कारण नहीं बताया गया।
जून के आरंभ में द इकनॉमिस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट में भी कहा गया, ‘द इकनॉमिस्ट के साथ साथ कुछ स्वतंत्र महामारीविदों का अनुमान है कि भारत में कोविड-19 से होने वाली मौतों के आधिकारिक आंकड़ों जो कि फिलहाल 3,55,000 से थोड़ा अधिक है, के मुकाबले अत्यधिक मौत की संख्या शायद पांच से सात गुना अधिक है।’
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने संसद में इन आरोपों का भी खंडन किया है और कहा कि सरकार केवल राज्यों की ओर से भेजे गए आंकड़ों को संग्रहित और प्रकाशित करती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सभी कोविड-19 मौतों को सही तरीके से दर्ज करने के लिए भारत आईसीएमआर के दिशानिर्देशों का पालन करता है जो कि डब्ल्यूएचओ से अनुशंसित आईसीडी-10 पर आधारित है।