देश के विभिन्न हिस्सों में मार्च और अप्रैल महीने से ही भीषण गर्मी पड़ रही है जिससे लोगों की जिंदगी पर असर पड़ता दिख रहा है और फसल की पैदावार कम हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मी से जुड़ी इन्हीं चुनौतियों से निपटने और मॉनसून से जुड़ी तैयारी की समीक्षा के लिए आयोजित एक अहम बैठक की अध्यक्षता गुरुवार को की जिसमें उन्होंने भीषण गर्मी या आग लगने की घटनाओं से होने वाली मौतों को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में कहा कि इस बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देश भर में मार्च से मई 2022 के दौरान तापमान उच्च बने रहने के बारे में जानकारी दी। पीएमओ के बयान के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमें भीषण गर्मी या आग की घटनाओं से लोगों की मौत को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाने होंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की किसी भी घटना पर कार्रवाई में कम से कम समय लगना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि बढ़ते तापमान को देखते हुए अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा ऑडिट नियमित तौर पर किए जाने की जरूरत है।
मोदी ने देशभर में विविधता पूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र में जंगलों में आग लगने के जोखिम को कम करने के लिए काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने संभावित आग की घटना का समय पर पता लगाने, आग की घटनाओं से निपटने और इसके बाद भरपाई के लिए वन कर्मियों और संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि आगामी मॉनसून के मद्देनजर पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए बंदोबस्त सुनिश्चित किए जाएं ताकि पानी दूषित नहीं हो तथा जलजनित बीमारियां नहीं फैलें। पीएमओ ने बताया कि बैठक में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की तैयारियों को लेकर सभी राज्यों को बाढ़ तैयारियों की योजना बनाने की सलाह भी दी गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि भीषण गर्मी और आगामी मॉनसून के मद्देनजर किसी भी घटना के लिए सभी प्रणालियों की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की जरूरत पर भी बैठक में चर्चा हुई।
बैठक में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, प्रधानमंत्री के सलाहकारों, कैबिनेट सचिव, गृह, स्वास्थ्य एवं जलशक्ति मंत्रालयों के सचिवों, एनडीएमए के सदस्य, एनडीएमए और आईएमडी के महानिदेशकों और एनडीआरएफ के महानिदेशक ने भी भाग लिया। यूरोपीय देशों की तीन दिवसीय यात्रा से लौटने के कुछ ही घंटे बाद प्रधानमंत्री इस बैठक में शामिल हुए।
देश के कई हिस्सों में पारा तेजी के साथ बढ़ रहा है और कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में बुधवार को हुई ओलावृष्टि और बारिश के चलते हालांकि लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत भी मिली।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक के दौरान गर्मी से निपटने और मॉनसून से जुड़ी तैयारी के संबंध में एक प्रेजेंटेशन भी दिया गया।
आईएमडी का रुख
पिछले हफ्ते भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अपने ताजा अपडेट में कहा है कि उत्तर पश्चिमी और मध्य भारत को 122 सालों में अप्रैल में सबसे ज्यादा गर्मी का सामना करना पड़ रहा है और अधिकतम औसत तापमान 35.9 और 37.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। विभाग ने यह अनुमान लगाया है कि गुजरात, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा को मई में सामान्य से अधिक तापमान का अनुभव करना पड़ेगा।
एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि देश के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से और पश्चिमी मध्य हिस्से, गुजरात, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मई महीने में भी सामान्य से अधिक तापमान बरकरार रह सकता है। पूरे देश भर में अप्रैल 2022 में तापमान पिछले 122 सालों में चौथी बार सबसे ज्यादा रहा। महापात्र ने कहा कि गर्मी का कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और इससे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है और इससे पैदावार भी कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश के दक्षिण पठारी क्षेत्र को छोड़कर मई महीने में रात के समय भी काफी गर्मी रहेगी।
आईएमडी के मुताबिक इस साल मार्च और अप्रैल महीने में तापमान असामान्य रूप से बढ़ा क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ नहीं देखने को मिला जिससे कुछ बारिश हो सकती है और तापमान कम होता है। उत्तर पश्चिमी भारत में इस साल मार्च और अप्रैल महीने में बारिश में 84 फीसदी तक की कमी आई जबकि मध्य भारत में 54 फीसदी तक की कमी रही देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्से में 40 फीसदी अधिकता और दक्षिण भारत में 38.5 फीसदी अधिकता देखने को मिली।