घरेलू रियल्टी फंडों ने पेश किए स्ट्रेस फंड

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 3:35 AM IST

अटकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं और नकदी के संकट से जूझ रहे डेवलपरों से अवसर का लाभ उठाने के लिए घरेलू फंड प्रबंधकों ने स्ट्रेस असेट फंड पेश किए हैं।
एसबीआई कैप वेंचर्स के स्पेशल विंडो फॉर कंप्लीशन आफ कंस्ट्रक्शन आफ अफर्डेबल ऐंड मिड इनकम हाउसिंग (एसडब्ल्यूएएमआईएच) इन्वेस्टमेंड फंड के बाद अहमदाबाद की लूमस अल्टरनेटिवल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स और मुंबई की निसस फाइनैंस ने भी दबाव वाली रियल एस्टेट संपत्तियों के लिए फंड पेश किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब बिक्री बहुत कम है और बैंकों व गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से वित्तपोषण नहीं हो रहा है तो ऐसे में फंड प्रबंधक अपने निवेश से बेहतर रिटर्न की संभावना देख रहे हैं। लूमस अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स ने देश के कुछ प्रमुख रियल स्टेट डेवलपरों से समझौता कर 300 करोड़ रुपये का दबाव वाली संपत्ति केंद्रित रियल एस्टेट फंड पेश किया है। प्रस्तावित फंड से देश के 6 शहरों में प्रति ट्रांजेक्शन 20 से 40 करोड़ रुपये निवेश कर अंतिम छोर के वित्तपोषण और दबाव वाली आवासीय व वाणिज्यिक परियोजनाओं का अधिग्रहण किया जाएगा। लूमस की स्थापना अनुरंजन मोहनॉट ने की थी, जो पहले अरविंद ग्रुप की एम्प्लस कैपिटल एडवाइजर्स के सीईओ थे। मोहनॉट ने कहा, ‘दबाव वाली संपत्तियों का अधिग्रहण परिचालन में भूमिका निभा रहे रियल एस्टेट डेवलपर साझेदार के रूप में करेंगे। निवेशकों के लिए यह हर तरफ से लाभदायक अवसर होगा।’
मुंबई की निसस फाइनैंस को भी निवेशकोंं से 500 करोड़ रुपये फंड के लिए प्रतिबद्धता मिली है। निसस फाइनैंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अमित गोयनका ने कहा कि एनबीएफसी के साथ वाली या दबाव वाली परियोजनाओं की जरूरतें पूरी करने में इसका इस्तेमाल होगा। गोयनका ने कहा, ‘हमारी नजर उन परियोजनाओं पर है, जो धन की कमी की वजह से अटकी हैं और उनका प्रबंधन कमजोर है।’
एनारॉक कैपिटल के कॉर्पोरेट फाइनैंस के अध्यक्ष विशाल श्रीवास्तव ने हाल के एक नोट में कहा है कि अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन के नए स्रोत की जरूरत है। श्रीवास्तव ने कहा, ‘अगर उन्हें धन मिलत जाता है तो  डेलवपर प्रीमियम भुगतान करने को तैयार हैं, जिससे वे बढ़ी हुई पूंजी से परियोजना पूरी करने में सक्षम होंगे और एनबीएफसी अपने बकाये की भरपाई कर सकेंगे और अपनी बैलेंस शीट दुरुस्त कर सकेंगे। खरीदारों को उनके फ्लैट मिल सकेंगे और ज्यादा खरीदार तैयार फ्लैट की ओर आकर्षित होंगे।’
श्रीवास्तव के मुताबिक 25,000 करोड़ रुपये के एसडब्ल्यूएएमआईएच फंड के साथ विभिन्न अन्य विदेशी फंड हैं, जिनके पास 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम है। इसमें से बड़ा हिस्सा करीब 60 प्रतिशत अमेरिका के फंडों का है, उसके बाद 31 प्रतिशत एशिया (भारत को छोड़कर), 6 प्रतिशत भारत और 3 प्रतिशत यूरोप के फंडों की हिस्सेदारी है।  यह धन मुख्य रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुडग़ांव, मुंबई और थाणे, बेंगलूरु, हैदराबाद, पुणे  की परियोजनाओं के लिए जुटाया गया है।

डिस्कॉम के लिए अब तक 68,000 करोड़ रुपये ऋण
दबाव झेल रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए घोषित 90,000 करोड़ रुपये के नकदी समर्थन पैकेज में से अब तक 68,000 करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर किया जा चुका है। इससे बिजली वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई में नकदी संकट से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों के लिए 90,000 करोड़ रुपये के नकदी समर्थन की घोषणा की थी। कोविड-19 पर अंकुश के लिए लागू लॉकडाउन की वजह से बिजली वितरण कंपनियों की मांग काफी घटी थी। एक सूत्र ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों आरईसी लिमिटेड और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने मई में डिस्कॉम के लिए घोषित 90,000 करोड़ रुपये के पैकेज के तहत 68,000 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया है। इस पैकेज के तहत ऋण का वित्तपोषण पीएफएसी व आरईसी बराबर अनुपात में करेंगी। भाषा
 

First Published : August 10, 2020 | 12:06 AM IST