बर्ड फ्लू से हुई मौत ने बढ़ाई चिकित्सकों की चिंता

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 2:31 AM IST

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के विनाशकारी प्रभाव के बीच 11 साल के बच्चे की बर्ड फ्लू से मौत ने चिकित्सा जगत की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि उनका मानना है कि एच5एन1 का मानव से मानव संक्रमण बहुत कम है।
इससे 90,000 करोड़ रुपये के घरेलू पॉल्ट्री उद्योग की भी चिंता बढ़ गई है, जो पिछले साल की कम बिक्री के बाद अब मांग में कुछ तेजी देख रहा है। अगर अंडों या चिकन की बिक्री या उत्पादन में कोई  कटौती होती है तो इस उद्योग के राजस्व पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक भारत में पॉल्ट्री क्षेत्र से करीब 6 करोड़ लोग सीधे जुड़े हैं।  
एच5एन1 वायरस को सामान्य तौर पर बर्ड फ्लू के नाम से जाना जाता है। यह चिकन से फैलता है, लेकिन अन्य चिडिय़ों जैसे बत्तख और कौवे भी इस  वायरस के वाहक होते हैं।
बगैर कोई जोखिम लेते हुए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत देश के अपने सभी केंद्रों को सचेत कर दिया है, जिससे कि संदिग्ध मामलों पर नजर रखी जा सके।
नैशनल सेंटर फार डिजीड कंट्रोल के निदेशक सुजीत कुमार सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हमनें जांच की है और संपर्कों की निगरानी की है। यहां तक कि हम संबंधित गांवों में गए हैं। हम कल अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी करेंगे।’
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि 2 जुलाई को 12 साल का एक बच्चा भर्ती हुआ था, जिसे निमोनिया और ल्यूकेमिया की शिकायत थी। उसकी मौत 12 जुलाई को हो गई।
एक सूत्र के हवाले से पीटीआई ने खबर दी है, ‘उसके नमूने कोविड-19 नेगेटिव पाए गए। वह इनफ्लुएंजा पॉजिटिव पाया गया, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई। उसके बाद उसके नमूने को नैशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी, पुणे भेजा गया, जहां उन्होंने एच5एन1 एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि की।’
एहतियात के तौर पर उस मरीज के संपर्क में आए एम्स के सभी कर्मचारियों को किसी तरह के फ्लू के लक्षण को लेकर खुद पर नजर रखने को कहा गया और ऐसा कुछ होने पर तत्काल प्राधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए गए।
फोर्टिस अस्पताल में पल्मोनोलॉजी के विभागाध्यक्ष और निदेशक विकास मौर्य ने  कहा कि मानव से मानव में बर्ड फ्लू का संचार तेज नहीं है और यह दुर्लभ है। मौर्य ने कहा, ‘लेकिन संक्रमित पक्षी (जैसे पॉल्ट्री उद्योग) इस बीमारी की वजह हो सकते हैं। यह सांस संबंधी बीमारी है और अगर यह गंभीर होता है तो मरीज की मौत भी हो सकती है।’ 

First Published : July 21, 2021 | 11:54 PM IST