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WTO बैठक बेनतीजा खत्म, क्यों नहीं बनी सहमति?

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ई-कॉमर्स नियमों पर सहमति नहीं, भारत ने दबाव के बीच विरोध किया

Last Updated- April 01, 2026 | 8:54 AM IST
WTO

विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक ने बेहद चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य के बीच बहुपक्षवाद की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। साथ ही यह संकेत भी दिया कि विकासशील और गरीब देश अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल ‘नियम मानने वाले’ नहीं रह सकते। यह बात वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को कही।

सोशल मीडिया पोस्ट में अग्रवाल ने कहा, ‘कृषि से लेकर ई-कॉमर्स और डब्ल्यूटीओ सुधार तक सदस्य देशों ने यह सुनिश्चित किया कि डब्ल्यूटीओ की चर्चाएं खुली, निष्पक्ष, समावेशी और सदस्य प्रधान रहें।’ 26 से 29 मार्च तक कैमरून की राजधानी याउंडे में आयोजित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की यह बैठक किसी मंत्रिस्तरीय घोषणा को अपनाए बिना समाप्त हो गई क्योंकि प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी और देशों के पास समय समाप्त हो गया। लंबित वार्ताएं अब जिनेवा में जारी रहेंगी, जो डब्ल्यूटीओ का मुख्यालय है।

इस बैठक में भारत ने विकसित और समृद्ध देशों के भारी दबाव का सामना किया और कई मुद्दों पर अकेले खड़े होकर उन प्रस्तावों का विरोध किया, जो उसके अनुसार वैश्विक व्यापार निकाय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे। जिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, उनमें ई-कॉमर्स पर सीमा शुल्क न लगाने की अस्थायी छूट भी शामिल है।

यह छूट पिछले 28 वर्षों से लागू है और हर दो वर्ष में इसे बढ़ाया जाता रहा है। इस बार यह महीने के अंत में पहली बार समाप्त हो जाएगा क्योंकि भारत और ब्राजील सहित कई विकासशील देशों ने विकसित देशों विशेषकर अमेरिका के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। विकसित देश इस प्रतिबंध को स्थायी बनाने या दीर्घकालिक विस्तार पर सहमति चाहते थे। भारत और अन्य विकासशील देशों का तर्क है कि स्थायी छूट से राजस्व नुकसान होगा और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में नीति निर्माण की स्वतंत्रता सीमित हो जाएगी।

इस बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने निराशा जताई कि डब्ल्यूटीओ ई-कॉमर्स छूट को स्थायी बनाने या दो साल से अधिक बढ़ाने पर सहमति नहीं बना सका। एक आधिकारिक बयान के हवाले से ग्रीर ने कहा, ‘दुर्भाग्य से छूट की अवधि और स्वरूप को लेकर अमेरिका के संशोधित प्रस्तावों के बावजूद दो सदस्य देश 28 साल बाद इसे समाप्त होने देना चाहते हैं, बजाय इसके कि नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के हित में सही कदम उठाएं।’

उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर डब्ल्यूटीओ के बाहर इच्छुक व्यापार साझेदारों के साथ मिलकर बहुपक्षीय ई-कॉमर्स छूट समझौते पर काम करेगा। केवल ई-कॉमर्स ही नहीं, बल्कि इस बैठक में भारत ने ‘इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट समझौते’ में शामिल होने का भी विरोध किया, जबकि 166 सदस्य देशों में से 29 देश इसका समर्थन कर रहे हैं।

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First Published - April 1, 2026 | 8:54 AM IST

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