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‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी और पलटवार: ईरान की गिरफ्त में अमेरिकी पायलट? बढ़ी व्हाइट हाउस की बेचैनी

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ईरान ने अमेरिका के दो युद्धक विमान मार गिराए हैं। लापता पायलट की तलाश और परमाणु संयंत्रों पर हमलों ने जंग को और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर ला दिया है

Last Updated- April 04, 2026 | 6:45 PM IST
Donald trump
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप | फाइल फोटो

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है और हालात पल-पल और गंभीर होते जा रहे हैं। शनिवार को खाड़ी के आसमान में जो कुछ हुआ, उसने वॉशिंगटन की चिंताएं चरम पर पहुंचा दी हैं। ईरान के ऊपर उड़ रहे अमेरिका के दो युद्धक विमानों को मार गिराया गया है, जिसके बाद एक अमेरिकी पायलट लापता है। ईरानी सेना अब उस पायलट को ढूंढने के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है, जबकि अमेरिकी प्रशासन अपने जवान को सुरक्षित निकालने के लिए जद्दोजहद कर रहा है।

यह घटना राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के उन दावों पर भी सवालिया निशान लगाती है, जिसमें उन्होंने ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण होने की बात कही थी।

आसमान से जमीन तक बढ़ा तनाव

मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिका का दो सीटों वाला F-15E जेट और एक A-10 वारहॉग (Warthog) विमान निशाना बने। F-15E जेट को ईरानी सीमा के भीतर मार गिराया गया, जबकि A-10 वारहॉग विमान ईरान की गोलाबारी की चपेट में आने के बाद पड़ोसी देश कुवैत में जाकर क्रैश हुआ। बताया जा रहा है कि कुवैत में गिरे विमान का पायलट सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा, लेकिन F-15E का एक पायलट अभी भी लापता है।

उस लापता पायलट को बचाने के लिए भेजे गए दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने हमला किया। हालांकि, ये हेलीकॉप्टर किसी तरह बचकर निकलने में सफल रहे, लेकिन उन पर सवार क्रू को कितनी चोटें आई हैं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दक्षिण-पश्चिमी इलाके की घेराबंदी कर दी है। वहां के स्थानीय गवर्नर ने तो यहां तक ऐलान कर दिया है कि जो कोई भी अमेरिकी सैनिक को पकड़ेगा या मारेगा, उसे विशेष सम्मान दिया जाएगा।

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जुबानी जंग और कूटनीतिक गतिरोध

एक तरफ जहां मैदान-ए-जंग में मिसाइलें चल रही हैं, वहीं सोशल मीडिया पर शब्दों के बाण छोड़े जा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में शांति वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि ईरान इस “अवैध युद्ध” को पूरी तरह खत्म करने की शर्तों पर ही बात करेगा।

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का मकसद ‘सत्ता परिवर्तन’ से गिरकर अब सिर्फ अपने पायलटों को ढूंढने तक सीमित रह गया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने पहले ही ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी दे रखी है। हालांकि, अमेरिका के भीतर इस युद्ध को लेकर जनता में गुस्सा बढ़ रहा है। बढ़ती तेल की कीमतों और गिरती रेटिंग्स ने ट्रंप प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है, जिसके चलते कैबिनेट में बड़े बदलाव की भी चर्चा है।

रिहाइशी इलाकों और परमाणु संयंत्रों पर हमले

हालांकि, शनिवार को भी हमलों का सिलसिला थमा नहीं। ईरान के दक्षिण-पश्चिमी पेट्रोकेमिकल जोन पर हवाई हमले हुए, जिसमें पांच लोग घायल हुए हैं। सबसे डराने वाली खबर बुशहर परमाणु संयंत्र के पास से आई, जहां एक प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। हालांकि, संयंत्र सुरक्षित बताया जा रहा है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर परमाणु संयंत्र को नुकसान पहुंचा, तो रेडियोधर्मी बादल पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए काल बन जाएंगे।

इधर, इजरायली सेना ने भी तेहरान पर जोरदार हमलों की लहर शुरू कर दी है। इस युद्ध का असर अब दुबई तक महसूस किया जा रहा है, जहां आसमान में हुई झड़पों के बाद गिरा मलबा ओरेकल जैसी कंपनियों की इमारतों पर गिरा। अब तक इस संघर्ष में 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 300 से अधिक घायल हुए हैं। दुनिया भर में ऊर्जा का संकट गहरा गया है और कच्चे तेल की कीमतों में 11% तक का भारी उछाल देखा गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडराने लगा है।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - April 4, 2026 | 6:44 PM IST

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