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भारत ने किया सीजफायर का स्वागत, शांति और संवाद पर दिया जोर

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भारत ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत करते हुए संवाद, कूटनीति और व्यापार बहाली पर जोर दिया

Last Updated- April 09, 2026 | 9:31 AM IST
US iran war

भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्ध विराम का स्वागत किया है। भारत ने बुधवार को उम्मीद जताई कि पश्चिम एशिया में यह घटनाक्रम ‘यूक्रेन में शांति प्रयासों को भी बल मिलेगा ।’ विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर 11 और 12 अप्रैल को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा करेंगे। जयशंकर 9 और 10 अप्रैल को मॉरीशस में 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लेने वाले थे। इस मामले से वाकिफ लोगों के मुताबिक अमेरिका-ईरान युद्ध विराम के संदर्भ में यूएई दौरे का कार्यक्रम भी जोड़ दिया गया है।

भारत की तरफ से जारी बयान में युद्ध विराम का स्वागत किया गया और ‘तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति’ के आह्वान पर फिर जोर दिया गया। बयान के मुताबिक संघर्ष विराम के बाद भारत को होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार बहाल होने की भी उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को भारी पीड़ा पहुंचाई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार तंत्र को बाधित किया है। मंत्रालय के बयान में जिन पश्चिमी एशिया और यूक्रेन
के संघर्षों का जिक्र किया गया है उनसे भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता पैदा हो गई है।

भारत के सामने अब चुनौती ईरान, खाड़ी देशों, इजरायल और अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखना है। हालांकि, उसने होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों की आवाजाही के लिए ईरान को शुल्क भुगतान की खबरों को खारिज कर दिया है और कहा कि होर्मुज स्ट्रे एक अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भारतीय ध्वज वाले जहाज इस जलमार्ग से गुजर सकेंगे।

सूत्रों के मुताबिक जयशंकर की यूएई यात्रा उन्हें पश्चिमी एशिया की स्थिति के बारे में अमीराती नेतृत्व के आकलन और दृष्टिकोण को समझने, भारत को ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा करने, खाड़ी देश को भारत के निर्यात को फिर से शुरू करने का मौका देगी। इसके साथ ही संघर्ष के दौरान वहां रहने एवं काम करने वाले 35 लाख भारतीयों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए अमीराती नेतृत्व को धन्यवाद देने का भी मौका मिलेगा।

जयशंकर की मुलाकात यूएई के उनके समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और खाड़ी देश के अन्य नेतृत्वकर्ताओं से होनी है। भारत और यूएई के बीच रणनीतिक साझेदारी है जो पिछले दस वर्षों में और मजबूत हुई है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने जनवरी में भारत का दौरा किया था।

नई दिल्ली यूएई-पाकिस्तान संबंधों में पनप रही कड़वाहट पर भी नजर रख रही है जहां अबू धाबी कथित तौर पर इस्लामाबाद से खाड़ी देश को बकाया 3.5 अरब डॉलर के ऋण की वापसी की मांग कर रहा है। पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम में मध्यस्थता करने के मुद्दे पर भारत का यह भी मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करना उसका काम नहीं था। भारत के अनुसार ईरान और पाकिस्तान की सीमाएं आपस में लगती हैं इसलिए उन्होंने संघर्ष विराम के लिए प्रयास किया।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान का वर्तमान नेतृत्व खासकर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने व्हाइट हाउस में महत्त्वपूर्ण पहुंच बना ली है जिसका आंशिक श्रेय उनके आपसी व्यापारिक संबंधों को जाता है। ट्रंप प्रशासन ने फरवरी में पाकिस्तान सरकार के साथ मैडिसन एवेन्यू स्थित पाकिस्तान के स्वामित्व वाले रूजवेल्ट हाउस के ‘संयुक्त पुनर्विकास’ के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसकी कीमत 1 अरब डॉलर बताई जा रही है। यह जायदाद पाकिस्तान सरकार की है और पुनर्विकास उसके निजीकरण अभियान का हिस्सा है।

मॉरीशस की अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर वहां उस देश के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करेंगे। इससे उन्हें हिंद महासागर क्षेत्र के विदेश मंत्रियों और उप-विदेश मंत्रियों (जिनमें मिस्र, ओमान और सऊदी अरब शामिल हैं) के साथ बातचीत करने का अवसर भी मिलेगा जो हिंद महासागर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

जयशंकर की यूएई यात्रा के साथ-साथ विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने द्विपक्षीय व्यापार एवं रक्षा संबंधों की समीक्षा करने और पश्चिम एशियाई संकट पर चर्चा करने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर अमेरिका रवाना हो गए। सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि मिसरी की यात्रा ‘हमारे अमेरिकी भागीदारों के साथ भारत-अमेरिका साझेदारी की व्यापकता की समीक्षा करने और व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी सहित हमारे द्विपक्षीय एजेंडे के प्रमुख स्तंभों पर चर्चा को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करती है।’

भारत-तुर्किये परामर्श

भारत-तुर्की विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) का 12वां दौर बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और तुर्किये की तरफ से विदेश मामलों के उप मंत्री बेरिस एकिन्सी ने की। इस परामर्श का पिछला दौर जून 2022 में अंकारा में आयोजित किया गया था।

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First Published - April 9, 2026 | 9:31 AM IST

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