नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के शवों की पहचान आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार भारत में उनके करीबी जैविक रिश्तेदारों की ‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ के लिए केंद्रीय और राज्य-स्तरीय फोरेंसिक प्रयोगशाला की सुविधा उपलब्ध कराएगी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी।
‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ किसी व्यक्ति की आनुवंशिक पहचान तय करने की एक वैज्ञानिक तकनीक होती है। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह आई अचानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 1,295 हो गई है और लगभग 5,000 लोग अभी लापता हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में रहने वाले प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदार-पिता, माता, बेटा, बेटी या भाई-बहन के जैविक नमूने एकत्र कर केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (सीएफएसएल), राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (एसएफएसएल), राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) की प्रयोगशालाओं और डीएनए जांच की सुविधा वाले एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में ‘डीएनए प्रोफाइल’ तैयार कराए जा सकते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि पहचान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संबंधित प्रयोगशालाओं की सेवाएं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय ने डीएनए जांच की सुविधा वाली सरकारी फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं की सूची भी साझा की है।
मंत्रालय ने कहा कि नेपाल पुलिस की सलाह के अनुसार पहचान के लिए ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा सकती है। इसके लिए नेपाली अधिकारियों द्वारा बताई गई तकनीकी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
इसी बीच अच्छी खबर यह कि त्रिशूली 3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में नौ दिन से फंसे दो लोगों को जिंदा बचा लिया गया। नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, सुरंग से जिंदा बचाए गए दो लोगों की पहचान परियोजना में मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन (45) और फोरमैन संजय साह (30) के रूप में हुई है।